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सृष्टि के प्रथम इंजीनियर, शिल्पकार और कुशल वास्तुकार थे भगवान विश्वकर्मा : मंत्री रणबीर गंगवा
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हिसार- विश्वकर्मा जयंती पर श्री विश्वकर्मा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य
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हिसार। प्रदेश के लोक निर्माण एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम इंजीनियर, शिल्पकार और कुशल वास्तुकार माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार उन्होंने स्वर्गलोक, पुष्पक विमान, द्वारका नगरी, इंद्रप्रस्थ और अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया।
मंत्री रणबीर गंगवा बुधवार को विश्वकर्मा धर्मशाला में आयोजित भगवान विश्वकर्मा जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा जयंती का विशेष महत्व मजदूरों, कारीगरों, इंजीनियरों और उद्योगों से जुड़े लोगों के लिए है। यह पर्व हमें सिखाता है कि श्रम ही पूजा है। कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि लगन और निष्ठा ही कार्य को महान बनाती है।
उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा यह प्रेरणा देते हैं कि ज्ञान और तकनीक का उपयोग समाज की भलाई और मानवता की प्रगति के लिए होना चाहिए। आज की तेज-तर्रार और प्रतिस्पर्धा वाली दुनिया में कौशल विकास का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को विविध कौशलों का अर्जन करना होगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस अवसर पर अखिल भारतीय जांगिड़ ब्राह्मण सभा के प्रभारी अजय कांत जांगड़ा, जिला अध्यक्ष उदय सिंह जांगड़ा, धर्मशाला प्रधान रामधन चानी, वेद प्रकाश, अमीलाल जांगड़ा आदि मौजूद रहे।
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कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा दे रही सरकार
गंगवा ने कहा कि प्रदेश सरकार कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। यह निवेश देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश सरकार हर जिले में एक मॉडल कौशल महाविद्यालय और एक मॉडल कौशल विद्यालय स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। इससे युवाओं को ऐसा प्रशिक्षण मिलेगा जिससे वे स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को भी रोजगार दे सकें।
मंत्री रणबीर गंगवा बुधवार को विश्वकर्मा धर्मशाला में आयोजित भगवान विश्वकर्मा जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा जयंती का विशेष महत्व मजदूरों, कारीगरों, इंजीनियरों और उद्योगों से जुड़े लोगों के लिए है। यह पर्व हमें सिखाता है कि श्रम ही पूजा है। कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि लगन और निष्ठा ही कार्य को महान बनाती है।
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उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा यह प्रेरणा देते हैं कि ज्ञान और तकनीक का उपयोग समाज की भलाई और मानवता की प्रगति के लिए होना चाहिए। आज की तेज-तर्रार और प्रतिस्पर्धा वाली दुनिया में कौशल विकास का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को विविध कौशलों का अर्जन करना होगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस अवसर पर अखिल भारतीय जांगिड़ ब्राह्मण सभा के प्रभारी अजय कांत जांगड़ा, जिला अध्यक्ष उदय सिंह जांगड़ा, धर्मशाला प्रधान रामधन चानी, वेद प्रकाश, अमीलाल जांगड़ा आदि मौजूद रहे।
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कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा दे रही सरकार
गंगवा ने कहा कि प्रदेश सरकार कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। यह निवेश देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश सरकार हर जिले में एक मॉडल कौशल महाविद्यालय और एक मॉडल कौशल विद्यालय स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। इससे युवाओं को ऐसा प्रशिक्षण मिलेगा जिससे वे स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को भी रोजगार दे सकें।