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जमीन का भूखा ‘स्वयंभू भगवान’
श्याम द्विवेदी/अमर उजाला
Updated Mon, 01 Dec 2014 12:17 AM IST
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सतलोक आश्रम का मुखिया धर्म के नाम पर जमीन के कारोबार में डूबा हुआ था। उसने बरवाला से लेकर बैतूल तक लैंडबैंक तैयार करने की योजना बनाई थी।
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इसके लिए उसने बाकायदे अपने खास लोगों को नियुक्त किया था। ये खास लोग हाईवे के आस पास ऐसी जमीन तलाशते थे, जहां एक साथ कई एकड़ जमीन मिल सके।
सूत्रों की मानें तो इसका मकसद रामपाल अपने आश्रम में ही आवासीय कॉलोनी, लग्जरी होटल और दो-तीन मंजिला फ्लैट बनाना था।
ये फ्लैट आश्रम से जुड़े धनाढ्य अनुयायियों के नाम किए जाने थे, जिसका वह रामपाल को मोटा पैसा पेमेंट करते। इसके अलावा जो होटल बनाए जाने थे ।
उनमें सत्संग के दौरान वीआईपी लोगों के रुकने की व्यवस्था की जानी थी। बताया जाता है कि रामपाल के इशारे पर इस योजना को उसका एक खास राजदार बलजीत मूर्त रूप दे रहा था।
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50 एकड़ में फैलाना चाहता था
हिसार-चंडीगढ़ हाईवे पर 12 एकड़ में बने वरवाला आश्रम के विस्तारीकरण की योजना थी। रामपाल इसके लिए 38 एकड़ और जमीन खरीदना चाहता था।
एक खास अनुयायी के अनुसार रामपाल अपने आश्रम को 50 एकड़ में फैलाना चाहता था। ताकि यहां एक लाख अनुयायी एक साथ बैठ सके।
बरवाला निवासी एक किसान ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि, उसकी जमीन आश्रम के पीछे कुछ दूरी पर है।
रामपाल का सहयोगी बलजीत लगातार उससे संपर्क में था। वह जमीन की मुंह मांगी कीमत देना चाहता था। इसके साथ ही वह यह प्रलोभन भी दे रहा था कि इस जमीन के बदले प्रदेश में कहीं भी इससे चार गुनी उपजाऊ जमीन खरीद ले।
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लेकिन बरवाला के किसान किसी भी स्थिति में अब रामपाल को जमीन देना नहीं चाहते। इसलिए हमने उन्हें इंकार कर दिया।
दो एकड़ जमीन के छह करोड़
स्थानीय किसान ने बताया कि आश्रम के पास दो एकड़ के खेत के रामपाल छह करोड़ रुपये देने को तैयार था। जबकि सामान्य तौर पर इस दो एकड़ खेत की कीमत 50 लाख रुपये ही है।
लेकिन किसान रामपाल को जमीन देने को तैयार नहीं हुआ। कई बार सत्संग के दौरान उसकी फसल भी बरबाद हो गई। किसान ने इसकी पुलिस एवं प्रशासनिक महकमे से शिकायत भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
66 एकड़ में बन रहा था बैतूल आश्रम
मध्यप्रदेश में भोपाल जिले के जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर अर्दन गांव में रामपाल का आलीशान आश्रम तैयार हो रहा था।
66 एकड़ में बन रहे इस आश्रम में सारी सुख सुविधाओं का ख्याल रखा गया। सुरक्षा की दृष्टि से यह बरवाला के सतलोक आश्रम की ही तरह मजबूत बनाया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार इस आश्रम को तैयार करने के लिए करीब 60 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया था। 14 जनवरी 2015 (मकर संक्रांति) को इसके उद्घाटन की तैयारी थी।
इस आश्रम के लिए जमीन का सौदा रामपाल के भाई बलबीर ने किया था। आश्रम में 50 हजार लोगों के एक साथ बैठने के लिए एक सेंट्रल हॉल बनवाया गया है।
इसके अलावा वहां सैकड़ों लग्जरी कमरे बनवाए गए हैं, जो वीआईपी लोगों के लिए बुक रहेंगे। यहां एक छोटी रिहायशी कॉलोनी का भी निर्माण किया गया है।
रामपाल के खास लोग यहां रहेंगे। रामपाल की गिरफ्तारी के बाद से इस आश्रम में निर्माण कार्य रोक दिया गया है। रामपाल के अनुयायी भूमिगत हो गए हैं।
अपना अलग पंथ चलाना चाहता था रामपाल
सतलोक आश्रम का प्रमुख रामपाल अपना एक अलग पंथ चलाना चाहता था। इसके लिए वह अल्पसंख्यक का दर्जा भी चाहता था।
इस कार्य को पूरा करने के लिए उसने एक वकील को लगाया था। रामपाल का अनुयायी डेढ़ साल से इसके लिए प्लानिंग कर रहा था।
डेढ़ साल पहले रामपाल का भक्त वह वकील अल्पसंख्यक आयोग के वरिष्ठ सदस्य के पास अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा लेने की रूपरेखा जानने के लिए प्रार्थना पत्र लेकर पहुंचा।
लेकिन वकील को यहां से आगे का रास्ता नहीं मिला। यह खुलासा अमर उजाला से हुई बातचीत में अल्पसंख्यक आयोग के वरिष्ठ सदस्य अजायब सिंह ने किया।
अजायब सिंह ने बताया कि रामपाल का अनुयायी वकील दिल्ली कार्यालय में आकर मिला था, लेकिन उन्हें साफ मना कर दिया है कि इस बारे में हम उसका कोई सहयोग भी नहीं कर सकते।
अल्पसंख्यक आयोग के वरिष्ठ सदस्य अजायब सिंह ने आशंका जताई कि रामपाल जैसे अन्य डेरों पर भी बरवाला वाली घटना मिल सकती है।
इनकी गतिविधियों पर राज्य सरकारों को नजर रखनी चाहिए। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उत्थान के लिए अल्पसंख्यक आयोग निरंतर प्रयासरत है और आयोग के पास आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई भी की जाती है।
हर महीने करीब पौने 2 लाख रुपये आता था बिजली का बिल
रामपाल ने बरवाला से कुछ दूरी पर जिस ‘सतलोक’ को बसा रखा था, वहां ‘भक्तों’ की सुविधा का खास ध्यान रखा गया था।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रामपाल की ‘सतलोक सिटी’ में बिजली की कमी न रहे, इसके लिए वहां 400 किलोवाट का ट्रांसफार्मर लगा था।
मकसद सिर्फ इतना था, कि यहां बिजली की कोई समस्या ना रहे। जानकारों के अनुसार रामपाल के आश्रम में लगे ट्रांसफार्मर से एक पूरे गांव को बिजली सप्लाई की जा सकती है।
आश्रम का एक महीने का बिजली बिल करीब पौने 2 लाख रुपये आता था। पिछले महीने ही आश्रम का बिल 1 लाख 72 हजार रुपये आया था। हालांकि रामपाल के आश्रम में बिजली विभाग का एक रुपया भी बकाया नहीं है।
200 यूनिट बिजली रोज होती थी खर्च
बरवाला के एसडीओ पकंज कुमार के अनुसार आश्रम में रामपाल ने खुद के खर्च पर 400 किलोवाट का ट्रांसफार्मर लगवाया था।
इसकी कीमत करीब साढ़े चार लाख रुपये है। आश्रम में हाईटेंशन कनेक्शन (एचटी) लगा हुआ है, जिस पर 285 किलोवाट बिजली सप्लाई की जाती थी।
पिछले महीने आए आश्रम के बिजली बिल 1 लाख 72 हजार को लेकर अनुमान लगाया जाए तो करीब 5733 यूनिट बिजली आश्रम में एक महीने के दौरान खर्च की गई है।
यानी रोजाना करीब 200 यूनिट अकेले रामपाल के आश्रम में प्रयोग की जाती रही। अधिकारियों के अनुसार सबसे पहले रामपाल के आश्रम में उसके ट्रस्ट के नाम पर 120 किलोवाट लोड का कनेक्शन लिया था, जो बाद में बढ़ाया गया।
आश्रम में कई उपकरण
रामपाल के आश्रम में ऐशोआराम व आवश्यकताओं को ध्यान रखते हुए कई तरह के बिजली संचालित उपकरण लगे हुए थे।
इनमें करीब 30 एसी, एक एक्स-रे मशीन, एक अल्ट्रासाउंड मशीन, रोटियां बनाने की एक बड़ी मशीन, एक लिफ्ट, एक आटा चक्की, चार ट्यूबवेल, पानी की मोटर, सैकड़ों पंखे, सैकड़ों लाइटें, गीजर, हीटर, कूलर, प्रेस, फ्रिज के अलावा और भी बहुत से उपकरण ऐसे थे, जो बिजली से चलाए जाते थे।
आम तौर पर एक गांव में 100 केवी के मुश्किल से चार ही ट्रांसफार्मर लगाए जाते हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि सतलोक आश्रम के ट्रांसफार्मर से एक गांव को बिजली मिल सकती है।
लेकिन अब आश्रम का कनेक्शन काटना ही पड़ेगा क्योंकि बिल रिकवरी की कोई संभावना नहीं लग रही है, प्रशासनिक जांच पूरी होते ही कनेक्शन कटवाएंगे।
एसके सिंह, एक्सईएन, बिजली निगम
मध्य प्रदेश स्थित रामपाल के आश्रम की जांच में जुटी हरियाणा पुलिस
अदालत की अवमानना के मामले में हरियाणा के हिसार से गिरफ्तार संत रामपाल के मध्य प्रदेश में निर्माणाधीन आश्रम की तलाशी में हरियाणा पुलिस जुट गई है।
जिला पुलिस अधीक्षक सुधीर लाड ने बताया कि शुक्रवार को टीम ने आश्रम के जमीनी कागजातों की जांच की और आज रामपाल की जायदाद की जांच होगी।
हरियाणा पुलिस की एक टीम बृहस्पतिवार की शाम को बैतूल जिले पहुंची। सुधीर ने बताया कि पिछले हफ्ते उन्होंने आश्रम की वीडियोग्राफी कर एक रिपोर्ट मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय भेजी थी, जो वहां से हरियाणा पुलिस को भेजी गई थी।
उन्होंने बताया कि रामपाल का यह निर्माणाधीन आश्रम 66 एकड़ में बन रहा है। इसमें 50 हजार लोग समायोजित हो सकते हैं। बैतूल में रामपाल के 30 से 40 अनुयायी थे।
इसके अलावा राज्य के अन्य भागों से भी लोग उससे मिलने यहां आते थे। रामपाल ने पुलिस की पूछताछ में खुलासा किया था कि यहां पर उसके कमांडो (सुरक्षा कर्मियों) की भर्ती करने से लेकर उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता था।
वर्ष 2010 में लागू किया गया कंट्रोल एरिया एक्ट
सतलोक आश्रम में बना संत रामपाल का राजमहल ‘अवैध’ है। जिला नगर योजनाकार की रिपोर्ट के अनुसार इस पांच मंजिला भवन को बनाने से पहले विभाग से किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई।
बरवाला में चंडीगढ़ रोड पर बने इस आश्रम पर कार्रवाई के बारे में जिला प्रशासन की ओर से जल्द ही फैसला लिया जाएगा।
आश्रम विवादों में आने के बाद जिला प्रशासन ने आश्रम की रिपोर्ट खंगालनी शुरू की तो पता लगा कि आश्रम का आधे से ज्यादा हिस्सा अवैध है।
2008 में आश्रम के लिए 6 एकड़ जमीन खरीदी गई थी। उस समय निर्माण के लिए किसी तरह की अनुमति की जरूरत नहीं थी। इस कारण यहां आश्रम का 6 एकड़ का एरिया वैध की श्रेणी में है।
वर्ष 2010 में प्रदेश सरकार ने बरवाला के आसपास कंट्रोल एरिया एक्ट लागू किया। इसके बाद किसी भी निर्माण से पहले अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया।
करीब साढ़े छह एकड़ एरिया कंट्रोल एक्ट लागू होने के बाद डेवलप किया गया, जिसके चलते उसके बाद में डेवलप किया गया एरिया अवैध माना गया है।
आश्रम के कोने में करीब आधे एकड़ में बनाया रामपाल का राजमहल पूरी तरह से अवैध है। यह निर्माण 2011 के बाद किया गया है। इस भवन को बनाने से पहले किसी तरह का मैप पास नहीं कराया गया।
गेट भी अवैध
जिला नगर योजनाकार की रिपोर्ट के अनुसार खेत मालिक अपने स्तर पर निर्माण कर उसका गेट हाइवे पर नहीं लगा सकता।
इस लिहाज से संत रामपाल के सतलोक आश्रम का गेट पूरी तरह से अवैध है। यह हाइवे के नियमों का उल्लंघन है। इसके अनुसार गेट को तोड़ा या सील किया जा सकता है।
लिफ्ट भी अवैध
प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार लिफ्ट लगाने से पहले बिजली विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिना अनुमति भवन में लिफ्ट लगाना गैर कानूनी है। रामपाल के भवन में मिली लिफ्ट भी अवैध है। प्रशासन अब इसे सील करने की बात कह रहा है।
जल्द फैसला लेंगे अधिकारी
जिला नगर योजनाकार हितेश शर्मा ने कहा कि संत रामपाल के आश्रम में 6.5 एकड़ एरिया व रामपाल का रिहायशी भवन अवैध है।
इस बारे में उपायुक्त को शुक्रवार को रिपोर्ट भेज दी गई है। सीलिंग के बारे में उच्च अधिकारियों की ओर से फैसला लिया जाएगा।