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लुवास के नए कैंपस में 2 करोड़ से बनी लैब, आईवीएफ तकनीक से सुधरेगी पशुओं की नस्ल
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लुवास के नए कैंपस में 2 करोड़ से बनी लैब, आईवीएफ तकनीक से सुधरेगी पशुओं की नस्ल
हिसार। लाला लाजपत राय पशु विज्ञान एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में आईवीएफ लैब बनकर तैयार हो गई है। 2 करोड़ की लागत से बनी इस हाईटेक लैब में आईवीएफ (इनविट्रो फर्टिलाइेजेशन) तकनीक से उच्च नस्ल की बछड़ियां और कटड़े पैदा किए जाएंगे। सबसे अधिक फोकस देसी नस्ल की गायों के संरक्षण पर रहेगा।
विश्वविद्यालय को मिले इस प्रोजेक्ट के तहत कम से कम 1500 ऐसे पशु तैयार किए जाएंगे, जो बेहद स्वस्थ एवं उच्च नस्ल के होंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने काम शुरू कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पशुपालकों, गोशालाओं व फार्म आदि से अच्छी नस्ल के पशुओं (गाय-भैंस) का एग्स लिया। वहीं, उच्च नस्ल के सांड़ या झोटे का सीमेन लिया जाएगा। दोनों को कल्चर लैब में ही फर्टिलाइज करने के बाद इसे इंक्यूबेसन लैब में 7 दिनों के लिए रखा जाएगा। भ्रूण तैयार होने के बाद इसे स्वस्थ गाय या भैंस की बच्चेदानी में रख दिया जाएगा और सामान्य समय के बाद बच्चा जन्म लेगा। इस तरह प्रोजेक्ट के तहत 1500 से अधिक उच्च नस्ल के बच्चे पैदा किए जाएंगे, जिनमें से अधिकांश बछड़ियां होंगी।
माइनस 196 डिग्री में संरक्षित हो सकेगा भ्रूण
आईवीएफ लैब को चार भागों में बांटा गया है। तीन लैब में विभिन्न प्रक्रिया से गुजरने के बाद एग्स और सीमेन से तैयार हुए भ्रूण को लिक्विड नाइट्रो स्टोरेज लैब में रखा जा सकता है। इस लैब का तापमान माइनस 196 डिग्री सेल्सियस तक होता है, इसलिए इसमें भ्रूण को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे भविष्य में वर्षों बाद भी अच्छी नस्ल के बछड़े या कटड़े पैदा किए जा सकेंगे।
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हमने नए कैंपस में आईवीएफ लैब बनाई है। इससे इनविट्रो फर्टिलाइेजेशन तकनीक के माध्यम से उच्च नस्ल के पशु तैयार किए जा सकेंगे। - डॉ. गुरदयाल सिंह, वीसी, लुवास
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हिसार। लाला लाजपत राय पशु विज्ञान एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में आईवीएफ लैब बनकर तैयार हो गई है। 2 करोड़ की लागत से बनी इस हाईटेक लैब में आईवीएफ (इनविट्रो फर्टिलाइेजेशन) तकनीक से उच्च नस्ल की बछड़ियां और कटड़े पैदा किए जाएंगे। सबसे अधिक फोकस देसी नस्ल की गायों के संरक्षण पर रहेगा।
विश्वविद्यालय को मिले इस प्रोजेक्ट के तहत कम से कम 1500 ऐसे पशु तैयार किए जाएंगे, जो बेहद स्वस्थ एवं उच्च नस्ल के होंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने काम शुरू कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पशुपालकों, गोशालाओं व फार्म आदि से अच्छी नस्ल के पशुओं (गाय-भैंस) का एग्स लिया। वहीं, उच्च नस्ल के सांड़ या झोटे का सीमेन लिया जाएगा। दोनों को कल्चर लैब में ही फर्टिलाइज करने के बाद इसे इंक्यूबेसन लैब में 7 दिनों के लिए रखा जाएगा। भ्रूण तैयार होने के बाद इसे स्वस्थ गाय या भैंस की बच्चेदानी में रख दिया जाएगा और सामान्य समय के बाद बच्चा जन्म लेगा। इस तरह प्रोजेक्ट के तहत 1500 से अधिक उच्च नस्ल के बच्चे पैदा किए जाएंगे, जिनमें से अधिकांश बछड़ियां होंगी।
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माइनस 196 डिग्री में संरक्षित हो सकेगा भ्रूण
आईवीएफ लैब को चार भागों में बांटा गया है। तीन लैब में विभिन्न प्रक्रिया से गुजरने के बाद एग्स और सीमेन से तैयार हुए भ्रूण को लिक्विड नाइट्रो स्टोरेज लैब में रखा जा सकता है। इस लैब का तापमान माइनस 196 डिग्री सेल्सियस तक होता है, इसलिए इसमें भ्रूण को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे भविष्य में वर्षों बाद भी अच्छी नस्ल के बछड़े या कटड़े पैदा किए जा सकेंगे।
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हमने नए कैंपस में आईवीएफ लैब बनाई है। इससे इनविट्रो फर्टिलाइेजेशन तकनीक के माध्यम से उच्च नस्ल के पशु तैयार किए जा सकेंगे। - डॉ. गुरदयाल सिंह, वीसी, लुवास