{"_id":"6240af50be5ca574e17cdb1e","slug":"kuldeep-bishnoi-s-show-of-strength-outside-hisar-after-seven-years-hisar-news-hsr6276581182","type":"story","status":"publish","title_hn":"सात साल बाद हिसार से बाहर कुलदीप बिश्नोई का शक्ति प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सात साल बाद हिसार से बाहर कुलदीप बिश्नोई का शक्ति प्रदर्शन
विज्ञापन
हिसार। करीब सात साल बाद कुलदीप बिश्नोई अपने गढ़ हिसार से बाहर करनाल में शक्ति दिखाकर अपने नए अभियान की शुरुआत कर दी है। उन्होंने हर जिला स्तर पर कार्यक्रम कर अपने पुराने कार्यकर्ताओं-मतदाताओं को साथ जोड़ने की मुहिम शुरू करने का एलान किया है। कुलदीप बिश्नोई ने हिसार से बाहर आखिरी बार 2014 के चुनाव में रैलियां की थीं। वर्ष 2016 में दोबारा से कांग्रेस में आने के बाद उन्होंने हिसार से बाहर अपने स्तर पर कोई कार्यक्रम नहीं किया था।
पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह से मात मिलने के बाद कुलदीप बिश्नोई ने सीएम मनोहरलाल के विधानसभा क्षेत्र में चुनौती देने का साहस किया है। कुलदीप कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश करना चाहते हैं। इस कारण उन्होंने हर जिला स्तर पर इस तरह के आयोजन कर अपनी खुद की ताकत दिखाने का फैसला लिया है। बता दें कि चौधरी भजनलाल करनाल लोकसभा से सांसद रह चुके हैं। इसके बाद कुलदीप बिश्नोई का अगला लक्ष्य फरीदाबाद हो सकता है। फरीदाबाद से भी चौधरी भजनलाल सांसद रहे थे। तीसरा लक्ष्य भिवानी हो सकता है। इसके अलावा कुलदीप बिश्नोई पंचकूला-कालका सीट पर भी प्रभाव रखते हैं। हरियाणा के अधिकतर हिस्सों में उनके पिता के समय से ही लोग उनसे जुड़े हैं।
वर्ष 1996 में भजनलाल का मुख्यमंत्री का आखिरी कार्यकाल था। उनके बाद भजनलाल परिवार के लोग अब तक 23 चुनाव लोकसभा-विधानसभा जीत चुके हैं। आदमपुर में 1966 से अब तक भजनलाल परिवार की जीतता रहा है। इस सीट भजनलाल 9 बार विधायक, उनकी पत्नी जसमा देवी एक बार, कुलदीप बिश्नोई 4 बार, रेणुका बिश्नोई विधायक एक बार विधायक रह चुकी हैं। हिसार से सांसद का चुनाव लड़ चुके भव्य बिश्नोई भी अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जून-जुलाई में हिसार लौटेंगे। इसके बाद वह भी राजनीति में सक्रिय होंगे।
विज्ञापन
चौधरी भजनलाल के नेतृत्व में 2005 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 67 विधायक जीते थे। जिसके बाद चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सीएम बनाया गया। नाराज चौधरी भजनलाल ने 2007 में हरियाणा जनहित कांग्रेस का गठन किया। हजकां ने 2009 के चुनाव में 5 सीट जीती। जिसमें दो सीट करनाल जिले तथा तीन हिसार जिले से थी। 2011 में पूर्व सीएम चौधरी भजनलाल के निधन के बाद कुलदीप बिश्नोई हजकां के अध्यक्ष बने। 2014 में हजकां-भाजपा का लोकसभा का चुनाव गठबंधन से लड़ा। जिसमें कुलदीप बिश्नोई हिसार लोकसभा सीट से हार गए थे। विधानसभा चुनाव से पहले ही यह गठबंधन टूट गया। हजकां ने अपने दम पर चुनाव लड़ा जिसमें वह केवल दो सीट जीत सकी। 2016 में कुलदीप ने हजकां का कांग्रेस में विलय कर दिया था। भजनलाल 12 साल प्रदेश के सीएम रहे थे।
चौधरी भजनलाल की विरासत को संभालने के लिए पूरे प्रदेश में जाएंगे। लोगों को एकजुट करने का संकल्प लेकर निकला हूं। उनके परंपरागत वोट बैंक को अपने साथ वापस लाएंगे। हर जिला स्तर पर कार्यक्रम किए जाएंगे। हर स्तर पर पार्टी को मजबूत किया जाएगा। - कुलदीप बिश्नोई ,विधायक आदमपुर
विज्ञापन
पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह से मात मिलने के बाद कुलदीप बिश्नोई ने सीएम मनोहरलाल के विधानसभा क्षेत्र में चुनौती देने का साहस किया है। कुलदीप कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश करना चाहते हैं। इस कारण उन्होंने हर जिला स्तर पर इस तरह के आयोजन कर अपनी खुद की ताकत दिखाने का फैसला लिया है। बता दें कि चौधरी भजनलाल करनाल लोकसभा से सांसद रह चुके हैं। इसके बाद कुलदीप बिश्नोई का अगला लक्ष्य फरीदाबाद हो सकता है। फरीदाबाद से भी चौधरी भजनलाल सांसद रहे थे। तीसरा लक्ष्य भिवानी हो सकता है। इसके अलावा कुलदीप बिश्नोई पंचकूला-कालका सीट पर भी प्रभाव रखते हैं। हरियाणा के अधिकतर हिस्सों में उनके पिता के समय से ही लोग उनसे जुड़े हैं।
विज्ञापन
वर्ष 1996 में भजनलाल का मुख्यमंत्री का आखिरी कार्यकाल था। उनके बाद भजनलाल परिवार के लोग अब तक 23 चुनाव लोकसभा-विधानसभा जीत चुके हैं। आदमपुर में 1966 से अब तक भजनलाल परिवार की जीतता रहा है। इस सीट भजनलाल 9 बार विधायक, उनकी पत्नी जसमा देवी एक बार, कुलदीप बिश्नोई 4 बार, रेणुका बिश्नोई विधायक एक बार विधायक रह चुकी हैं। हिसार से सांसद का चुनाव लड़ चुके भव्य बिश्नोई भी अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जून-जुलाई में हिसार लौटेंगे। इसके बाद वह भी राजनीति में सक्रिय होंगे।
विज्ञापन
चौधरी भजनलाल के नेतृत्व में 2005 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 67 विधायक जीते थे। जिसके बाद चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सीएम बनाया गया। नाराज चौधरी भजनलाल ने 2007 में हरियाणा जनहित कांग्रेस का गठन किया। हजकां ने 2009 के चुनाव में 5 सीट जीती। जिसमें दो सीट करनाल जिले तथा तीन हिसार जिले से थी। 2011 में पूर्व सीएम चौधरी भजनलाल के निधन के बाद कुलदीप बिश्नोई हजकां के अध्यक्ष बने। 2014 में हजकां-भाजपा का लोकसभा का चुनाव गठबंधन से लड़ा। जिसमें कुलदीप बिश्नोई हिसार लोकसभा सीट से हार गए थे। विधानसभा चुनाव से पहले ही यह गठबंधन टूट गया। हजकां ने अपने दम पर चुनाव लड़ा जिसमें वह केवल दो सीट जीत सकी। 2016 में कुलदीप ने हजकां का कांग्रेस में विलय कर दिया था। भजनलाल 12 साल प्रदेश के सीएम रहे थे।
चौधरी भजनलाल की विरासत को संभालने के लिए पूरे प्रदेश में जाएंगे। लोगों को एकजुट करने का संकल्प लेकर निकला हूं। उनके परंपरागत वोट बैंक को अपने साथ वापस लाएंगे। हर जिला स्तर पर कार्यक्रम किए जाएंगे। हर स्तर पर पार्टी को मजबूत किया जाएगा। - कुलदीप बिश्नोई ,विधायक आदमपुर