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5 हजार प्रॉपर्टी की बैलेंस शीट जीरो मामले में जांच पूरी, सोमवार को फैसला, दो को क्लीन चिट
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हिसार। नगर निगम की पांच हजार प्रॉपर्टी की बैलेंस शीट जीरो करने के मामले में गठित जांच कमेटी की बैठक शुक्रवार को निगम कार्यालय में हुई। तीन घंटे चली बैठक में कमेटी ने मामले में शामिल कर्मचारियों के लिखित बयान दर्ज करते हुए मामले से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। कमेटी की अगली बैठक 12 जुलाई सोमवार को होगी, जिसमें जांच कमेटी अंतिम फैसला लेगी। इससे पहले कमेटी की बैठक 17 जून को हुई थी।
मामले में पांच कर्मचारी शामिल हैं, मगर कमेटी सदस्यों की मानें तो अब तक की जांच से दो कर्मचारियों की भूमिका नजर नहीं आ रही है। उन्हें कमेटी ने क्लीन चिट दी है, जबकि तीन कर्मचारी भ्रष्टाचार के खेल में पूरी तरह शामिल रहे हैं। कमेटी सदस्यों के मुताबिक कर्मचारी यह कुबूल नहीं कर रहे हैं कि उन्होंने भ्रष्टाचार किया है। वह सिर्फ यही बात कह रहे हैं कि कंपनी ने अपने स्तर पर ही इन पांच हजार बैलेंस शीट को जीरो किया है। शुक्रवार को जांच कमेटी की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई, जो दोपहर ढाई बजे तक चली। बैठक में मामले में शामिल कर्मचारी तत्कालीन सचिव राजेश महता, सेवानिवृत्त अधीक्षक कैलाश चंद्र, सहायक सत्यवान मलिक, क्लर्क नरेश व लेखाकार अंशु से लिखित में बयान लिए गए। इस दौरान कमेटी सदस्य सीनियर डिप्टी मेयर अनिल सैनी, पार्षद भूप सिंह रोहिल्ला, प्रीतम सैनी, ईओ राजेंद्र प्रसाद मौजूद रहे।
यह है मामला
15 सितंबर 2016 को निगम की ओर से एक निजी कंपनी को पत्र जारी कर 5 हजार बैलेंस सीट शून्य करवा दी थी, जिनका करोड़ों का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया था। मामले का खुलासा पूर्व मेयर शकुंतला राजलीवाला के कार्यकाल में हुआ था। पार्षदों की मांग पर जांच कमेटी बना दी गई, लेकिन अधिकारियों ने खुद को पाक साफ दिखाई दिया। अब पार्षदों ने दोबारा से आवाज उठाई तो सीनियर डिप्टी मेयर के नेतृत्व वाली कमेटी ने फिर से जांच शुरू की है। इन 5 हजार में करीब 4400 की जांच के दौरान रिकवरी हुई थी। इसमें 14 करोड़ से अधिक का राजस्व आया।
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इन बिंदुओं पर रिकॉर्ड सहित लिया जवाब
- किस अधिकारी के आदेश पर बकाया जीरो किया गया।
- किस तिथि को बकाया जीरो किया गया और उसके ठीक करने के लिए कब पत्र लिखा गया और उसकी कब रिकवरी हुई।
- बकाया जीरो करने पर हुई वित्तीय हानि के लिए कौन जिम्मेदार है।
- कार्यकारी हरदीप सिंह के समय जो जांच हुई, उसकी न तो जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई और न ही उस रिपोर्ट में हमारी सहमति दी थी, फिर भी हमारी सहमति दिखाई गई।
- किन कर्मचारियों को जी8 जारी की गई थी और क्या उन कर्मचारियों द्वारा उस जी8 की राशि जमा करवाई गई।
- पूर्ण वर्क ऑर्डर प्रस्तुत किए जाए।
- क्या बकाया जीरो करने के बाद किए गए कार्य को सत्यापन किया गया।
- जिन प्रॉपर्टी का बकाया जारी किया गया, क्या उन्हें ठीक करने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स की अदायगी की जा चुकी है अथवा नहीं।
- कितनी प्रॉपर्टी का बकाया जीरो किया गया, उसकी लिस्ट दी जाए, जिसमें प्रॉपर्टी आईडी व नाम दर्शाया जाए।
आगे की कार्रवाई
जांच कमेटी द्वारा सोमवार को होने वाली बैठक में जांच का पूरा निष्कर्ष निकाला जाएगा। इस निष्कर्ष के आधार पर कमेटी कार्रवाई के लिए निगम से सिफारिश करेगी। इसके बाद निगमायुक्त द्वारा इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। अगर इन कर्मचारियों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई की जाती है तो निगम को इसके लिए मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। साथ ही हाउस की बैठक में इस मामले को रखा जाएगा।
रिकार्ड कब्जे में लिया
कमेटी ने जीरो की गई बैलेंस शीट का रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए है। कर्मचारियों का लिखित में बयान दर्ज करवाया है। सोमवार को बैठक में कमेटी अपना फैसला सुनाएगी। - अनिल सैनी, सीनियर डिप्टी मेयर व कमेटी सदस्य
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मामले में पांच कर्मचारी शामिल हैं, मगर कमेटी सदस्यों की मानें तो अब तक की जांच से दो कर्मचारियों की भूमिका नजर नहीं आ रही है। उन्हें कमेटी ने क्लीन चिट दी है, जबकि तीन कर्मचारी भ्रष्टाचार के खेल में पूरी तरह शामिल रहे हैं। कमेटी सदस्यों के मुताबिक कर्मचारी यह कुबूल नहीं कर रहे हैं कि उन्होंने भ्रष्टाचार किया है। वह सिर्फ यही बात कह रहे हैं कि कंपनी ने अपने स्तर पर ही इन पांच हजार बैलेंस शीट को जीरो किया है। शुक्रवार को जांच कमेटी की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई, जो दोपहर ढाई बजे तक चली। बैठक में मामले में शामिल कर्मचारी तत्कालीन सचिव राजेश महता, सेवानिवृत्त अधीक्षक कैलाश चंद्र, सहायक सत्यवान मलिक, क्लर्क नरेश व लेखाकार अंशु से लिखित में बयान लिए गए। इस दौरान कमेटी सदस्य सीनियर डिप्टी मेयर अनिल सैनी, पार्षद भूप सिंह रोहिल्ला, प्रीतम सैनी, ईओ राजेंद्र प्रसाद मौजूद रहे।
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यह है मामला
15 सितंबर 2016 को निगम की ओर से एक निजी कंपनी को पत्र जारी कर 5 हजार बैलेंस सीट शून्य करवा दी थी, जिनका करोड़ों का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया था। मामले का खुलासा पूर्व मेयर शकुंतला राजलीवाला के कार्यकाल में हुआ था। पार्षदों की मांग पर जांच कमेटी बना दी गई, लेकिन अधिकारियों ने खुद को पाक साफ दिखाई दिया। अब पार्षदों ने दोबारा से आवाज उठाई तो सीनियर डिप्टी मेयर के नेतृत्व वाली कमेटी ने फिर से जांच शुरू की है। इन 5 हजार में करीब 4400 की जांच के दौरान रिकवरी हुई थी। इसमें 14 करोड़ से अधिक का राजस्व आया।
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इन बिंदुओं पर रिकॉर्ड सहित लिया जवाब
- किस अधिकारी के आदेश पर बकाया जीरो किया गया।
- किस तिथि को बकाया जीरो किया गया और उसके ठीक करने के लिए कब पत्र लिखा गया और उसकी कब रिकवरी हुई।
- बकाया जीरो करने पर हुई वित्तीय हानि के लिए कौन जिम्मेदार है।
- कार्यकारी हरदीप सिंह के समय जो जांच हुई, उसकी न तो जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई और न ही उस रिपोर्ट में हमारी सहमति दी थी, फिर भी हमारी सहमति दिखाई गई।
- किन कर्मचारियों को जी8 जारी की गई थी और क्या उन कर्मचारियों द्वारा उस जी8 की राशि जमा करवाई गई।
- पूर्ण वर्क ऑर्डर प्रस्तुत किए जाए।
- क्या बकाया जीरो करने के बाद किए गए कार्य को सत्यापन किया गया।
- जिन प्रॉपर्टी का बकाया जारी किया गया, क्या उन्हें ठीक करने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स की अदायगी की जा चुकी है अथवा नहीं।
- कितनी प्रॉपर्टी का बकाया जीरो किया गया, उसकी लिस्ट दी जाए, जिसमें प्रॉपर्टी आईडी व नाम दर्शाया जाए।
आगे की कार्रवाई
जांच कमेटी द्वारा सोमवार को होने वाली बैठक में जांच का पूरा निष्कर्ष निकाला जाएगा। इस निष्कर्ष के आधार पर कमेटी कार्रवाई के लिए निगम से सिफारिश करेगी। इसके बाद निगमायुक्त द्वारा इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। अगर इन कर्मचारियों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई की जाती है तो निगम को इसके लिए मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। साथ ही हाउस की बैठक में इस मामले को रखा जाएगा।
रिकार्ड कब्जे में लिया
कमेटी ने जीरो की गई बैलेंस शीट का रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए है। कर्मचारियों का लिखित में बयान दर्ज करवाया है। सोमवार को बैठक में कमेटी अपना फैसला सुनाएगी। - अनिल सैनी, सीनियर डिप्टी मेयर व कमेटी सदस्य