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अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस : शब्दों की जरूरत न ही आवाज के मोहताज....खामोशी ही रिश्तों की जुबां, राष्ट्रपति अवाॅर्डी जाह्नवी अब लिख रही किताब
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पटेल नगर का मूक बधिर परिवार।
हिसार। कुछ आवाजें कानों तक नहीं पहुंचतीं मगर दिलों में उतर जाती हैं। कुछ शब्द जुबां से नहीं निकलते फिर भी अपनी कहानी कह जाते हैं। हिसार के पटेल नगर में रहने वाला विजय का परिवार ऐसी ही खामोश आवाज की मिसाल है। परिवार के चारों सदस्य मूक-बधिर हैं लेकिन सांकेतिक भाषा के जरिए उनकी दुनिया संवाद और संवेदनाओं से भरी है।
टेलर मास्टर विजय और उनकी पत्नी कुसुम मूक-बधिर हैं। उनकी बड़ी बेटी जाह्नवी और छोटा बेटा शरण भी मूक-बधिर हैं। जाह्नवी दसवीं कक्षा की छात्रा है। निबंध लेखन, डांस और चैस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रपति ने वर्ष 2024 में उसे सर्वश्रेष्ठ बालिका के तौर पर सम्मानित किया था।
अब जाह्नवी अपने अनुभवों को किताब का रूप देने में जुटी है। वह अपनी प्रतिभा को नए मुकाम तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। दोनों बच्चे श्रवण वाणी केंद्र में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार के चारों सदस्य सांकेतिक भाषा में आपस में बातचीत करते हैं। दिनभर की बातें इसी भाषा के जरिए साझा होती हैं। मोबाइल भी उनके संवाद का अहम माध्यम है। खासकर व्हाट्सएप का वे बखूबी इस्तेमाल करते हैं। संदेश लिखकर वे सामान्य लोगों तक अपनी बात पहुंचाते हैं।
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23 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाएगा। यह दिन उन लोगों की दुनिया को समझने का अवसर भी देता है जिनके लिए सांकेतिक भाषा संवाद का प्रमुख माध्यम है। जिले के सरकारी कार्यालयों में मूक-बधिर लोगों के लिए सांकेतिक भाषा की सुविधाओं की प्रभावशीलता पर आज भी सवाल उठते हैं।
श्रवण एवं वाणी निशक्त जनकल्याण केंद्र के आजीवन सदस्य सत्यपाल अग्रवाल ने बताया कि जिले के अधिकतर सरकारी कार्यालयों में सांकेतिक भाषा दुभाषियों की व्यवस्था नहीं है। मूक-बधिर व्यक्ति अपनी बात रखने के लिए कई बार तीसरे व्यक्ति पर निर्भर हो जाते हैं। इससे उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई मामलों में बिना काम करवाए लौटना पड़ता है।
आज सुनी जाएगी खामोशी की आवाज
श्रवण एवं वाणी निशक्त जन कल्याण केंद्र में बुधवार को ‘खामोशी की आवाज शहीदों के नाम’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें श्रवण एवं वाणी बाधित विद्यार्थी शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। केंद्र के सहायक निदेशक अमित चौधरी ने बताया कि कार्यक्रम विद्यार्थियों की प्रतिभा और क्षमता को समाज के सामने लाने का अवसर है। खेल, शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजन में करनाल, गुरुग्राम सहित प्रदेश के अन्य श्रवण एवं वाणी निशक्त जन कल्याण केंद्रों के विद्यार्थी भी हिस्सा लेंगे। विद्यार्थी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, नृत्य और माइम के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाएंगे।
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टेलर मास्टर विजय और उनकी पत्नी कुसुम मूक-बधिर हैं। उनकी बड़ी बेटी जाह्नवी और छोटा बेटा शरण भी मूक-बधिर हैं। जाह्नवी दसवीं कक्षा की छात्रा है। निबंध लेखन, डांस और चैस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रपति ने वर्ष 2024 में उसे सर्वश्रेष्ठ बालिका के तौर पर सम्मानित किया था।
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अब जाह्नवी अपने अनुभवों को किताब का रूप देने में जुटी है। वह अपनी प्रतिभा को नए मुकाम तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। दोनों बच्चे श्रवण वाणी केंद्र में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार के चारों सदस्य सांकेतिक भाषा में आपस में बातचीत करते हैं। दिनभर की बातें इसी भाषा के जरिए साझा होती हैं। मोबाइल भी उनके संवाद का अहम माध्यम है। खासकर व्हाट्सएप का वे बखूबी इस्तेमाल करते हैं। संदेश लिखकर वे सामान्य लोगों तक अपनी बात पहुंचाते हैं।
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23 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाएगा। यह दिन उन लोगों की दुनिया को समझने का अवसर भी देता है जिनके लिए सांकेतिक भाषा संवाद का प्रमुख माध्यम है। जिले के सरकारी कार्यालयों में मूक-बधिर लोगों के लिए सांकेतिक भाषा की सुविधाओं की प्रभावशीलता पर आज भी सवाल उठते हैं।
श्रवण एवं वाणी निशक्त जनकल्याण केंद्र के आजीवन सदस्य सत्यपाल अग्रवाल ने बताया कि जिले के अधिकतर सरकारी कार्यालयों में सांकेतिक भाषा दुभाषियों की व्यवस्था नहीं है। मूक-बधिर व्यक्ति अपनी बात रखने के लिए कई बार तीसरे व्यक्ति पर निर्भर हो जाते हैं। इससे उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई मामलों में बिना काम करवाए लौटना पड़ता है।
आज सुनी जाएगी खामोशी की आवाज
श्रवण एवं वाणी निशक्त जन कल्याण केंद्र में बुधवार को ‘खामोशी की आवाज शहीदों के नाम’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें श्रवण एवं वाणी बाधित विद्यार्थी शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। केंद्र के सहायक निदेशक अमित चौधरी ने बताया कि कार्यक्रम विद्यार्थियों की प्रतिभा और क्षमता को समाज के सामने लाने का अवसर है। खेल, शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजन में करनाल, गुरुग्राम सहित प्रदेश के अन्य श्रवण एवं वाणी निशक्त जन कल्याण केंद्रों के विद्यार्थी भी हिस्सा लेंगे। विद्यार्थी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, नृत्य और माइम के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाएंगे।