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Hisar News: सिवानी न्यायिक परिसर में एडीजे कोर्ट स्थापना को मिली सैद्धांतिक मंजूरी
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सिवानी मंडी। क्षेत्र के अधिवक्ताओं और आमजन के लिए राहत की खबर है। लंबे समय से लंबित सिवानी न्यायिक परिसर में एडीजे (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश) कोर्ट की मांग को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं भिवानी जिले के इंस्पेक्टिंग जस्टिस संदीप मुद्गिल ने सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया।
भिवानी न्यायिक परिसर के निरीक्षण के दौरान सिवानी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उनसे मुलाकात कर यह मांग रखी जिस पर न्यायाधीश ने सकारात्मक रुख दिखाया।
बार एसोसिएशन के प्रधान अधिवक्ता डीके सांगवान के नेतृत्व में उपप्रधान अधिवक्ता कुलदीप शर्मा, सचिव अधिवक्ता कुलदीप खोड तथा वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र सिंह बेडवाल ने न्यायमूर्ति संदीप मुद्गिल से मुलाकात की। अधिवक्ताओं ने बताया कि उच्च स्तर के मामलों की सुनवाई के लिए पक्षकारों को भिवानी या अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और आर्थिक परेशानी होती है।
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स्थानीय सुनवाई से मिलेगा लाभ
न्यायमूर्ति संदीप मुद्गिल ने अधिवक्ताओं की बातें गंभीरता से सुनते हुए कहा कि एडीजे कोर्ट की स्थापना न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण कदम होगी। डीके सांगवान ने कहा कि यह क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम साबित होगा और इससे गंभीर आपराधिक, दीवानी व सत्र मामलों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर संभव होगी जिससे आम नागरिकों को अन्य जिलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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भिवानी न्यायिक परिसर के निरीक्षण के दौरान सिवानी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उनसे मुलाकात कर यह मांग रखी जिस पर न्यायाधीश ने सकारात्मक रुख दिखाया।
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बार एसोसिएशन के प्रधान अधिवक्ता डीके सांगवान के नेतृत्व में उपप्रधान अधिवक्ता कुलदीप शर्मा, सचिव अधिवक्ता कुलदीप खोड तथा वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र सिंह बेडवाल ने न्यायमूर्ति संदीप मुद्गिल से मुलाकात की। अधिवक्ताओं ने बताया कि उच्च स्तर के मामलों की सुनवाई के लिए पक्षकारों को भिवानी या अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और आर्थिक परेशानी होती है।
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स्थानीय सुनवाई से मिलेगा लाभ
न्यायमूर्ति संदीप मुद्गिल ने अधिवक्ताओं की बातें गंभीरता से सुनते हुए कहा कि एडीजे कोर्ट की स्थापना न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण कदम होगी। डीके सांगवान ने कहा कि यह क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम साबित होगा और इससे गंभीर आपराधिक, दीवानी व सत्र मामलों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर संभव होगी जिससे आम नागरिकों को अन्य जिलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।