फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   hisar news

Hisar News: बदलते वातावरण को सहन करने वाली फल, अनाज की किस्में करनी होंगी विकसित

Wed, 24 Jul 2024 06:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Wed, 24 Jul 2024 06:50 AM IST
विज्ञापन
hisar news
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष (सेवानिवृत्त) डाॅ. आरके खटकड़ ने कहा कि बजट में कुछ बातें स्वागत योग्य हैं। इनमें क्लाइमेट रिसाइलेंट वैरायटी विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसके अनुसार फल, अनाज आदि की ऐसी किस्में विकसित की जाएंगी, जो बदलते वातावरण को सहन कर सकें। एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। यह अच्छी बात है, क्योंकि दिन प्रतिदिन फसलों में रसायनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
विज्ञापन


डॉ. खटकड़ ने बताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर कृषि विकास के लिए कार्य करेंगे। बैंकों को 20 लाख करोड़ रुपये कृषि क्षेत्र के लिए देना होगा। इससे किसानों को फायदा मिलेगा। 61 मंडियों को ई-मार्केटिंग के तहत लाया जाएगा। इससे एफपीओ व कोऑपरेटिव सोसायटी को फायदा होगा। आज के समय में देश में उत्पादन की कमी नहीं है। मार्केटिंग की समस्या है। अगर, मार्केटिंग की समस्या का हल हो जाए तो किसान कुछ भी उत्पादन करने को तत्पर है। किसान को कोई नई तकनीक अपनाने में दिक्कत नहीं है। बस उसे भाव ठीक मिलना चाहिए, जो अभी तक किसान को नहीं मिल रहा है। जब तक मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक किसान की आय को भी दोगुना नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन


भंडारण की गुणवत्ता व क्षमता बढ़ानी होगी
डॉ. खटकड़ ने कहा कि भाजपा सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था, वह आज तक हासिल नहीं हो सका है। सभी सरकारें सिर्फ वोट बैंक के लिए कृषि क्षेत्र का नाम लेती हैं, लेकिन अभी तक इस क्षेत्र में सुधार नहीं हुआ है। हम कृषि उत्पादन में पहले या दूसरे नंबर पर हैं। मगर, अंतरराष्ट्रीय मार्केट में हमारा हिस्सा 2 प्रतिशत ही है। हम सिर्फ 6 से 7 प्रतिशत कृषि उत्पादों को ही प्रोसेस करते हैं, जबकि मार्केट में वेल्यू एडीशन की ही वेल्यू है। स्टोरेज व्यवस्था ठीक न होने के कारण हमारा काफी अनाज खराब हो जाता है। खराब होने वाली फूड आइटम में 40 से 50 प्रतिशत स्टोरेज या ट्रांसर्पाेंटेशन में खराब हो जाता है। इसे बचाने के लिए भंडारण की गुणवत्ता व क्षमता दोनों बढ़ानी होगी। कोल्ड चेन आदि के लिए बजट बढ़ाया जाए। भंडारण व प्रोसेसिंग से इस नुकसान को रोका जा सकता है। इससे किसानों व ग्राहकों दोनों को फायदा होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


किसानों को एमएसपी की गारंटी मिलनी चाहिए
बजट में 1.52 लाख करोड़ का प्रावधान कृषि क्षेत्र के लिए किया गया है, जबकि कुल बजट 47.66 लाख करोड़ का है। इस हिसाब से कुल बजट का 3.19 प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र के आबंटित किया गया है, जबकि जीडीपी में कृषि क्षेत्र का 18 प्रतिशत का योगदान है और कुल काम करने वाली आबादी में से करीब 42 प्रतिशत आबादी को रोजगार दे रहा है। इस हिसाब से कुल बजट का 9 प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र को दिया जाना चाहिए। किसानों को एमएसपी नहीं दिया जा रहा है। किसानों को एमएसपी की गारंटी मिलनी चाहिए, ताकि उनका शोषण न हो सके। अभी तक किसानों के ट्यूबवेल सोलर सिस्टम से जोड़ना चाहिए, ताकि किसानों को बिजली के लिए इंतजार न करना पड़े। जहां नदियां हैं, वहां टर्बाइन लगाकर बिजली बनाई जा सकती है। इसके लिए बड़े प्लांट लगाने की जरूरत नहीं है। हम रिन्यूएबल एनर्जी का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। फिलहाल हम एग्रीकल्चर की जीडीपी का मात्र 0.6 प्रतिशत ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च कर रहे हैं, जबकि यह कम से कम यह 2 प्रतिशत होना चाहिए। जिस पर लगाए गए पैसे का आउटपुट काफी ज्यादा होता है।


रिसर्च व डेवलपमेंट पर फोकस करना होगा
वर्ष 1980 में चीन व भारत की इकोनाॅमी बराबर थी। चीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट के दम पर अमेरिका को टक्कर दे रहा है। अगर हम कृषि क्षेत्र में रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर 2 रुपये लगाते हैं तो हम 30 रुपये आसानी से निकाल सकते हैं। बजट में दलहन व तिलहन फसलों को उगाने पर भी जोर दिया गया है। मगर, यह तब तक सफल नहीं होगा, जब तक किसान की फसल एमएसपी रेट पर खरीदी नहीं जाएगी। सरकार की तरफ से इन फसलों पर इतना जोर देने व इसके रेट इतने ज्यादा होने के बाद भी किसान इन फसलों के प्रति रुचि नहीं दिखा रहा है, क्योंकि इसे उगाने में रिस्क काफी ज्यादा है और इसकी मार्केटिंग भी नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed