राजस्थान सीमा से लगते 35 गांव में सूखे की मार
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राजस्थान बॉर्डर के साथ लगते जिले के 35 गांवों में सूखे की गंभीर तस्वीर उभर कर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद भी सरकारी प्रयास शुरू नहीं हुए हैं। अधिकारी सरकार के निर्देशों की बाट जोह रहे हैं, जबकि ग्रामीण जनता सरकारी मदद का इंतजार कर रही है। प्रशासन की ओर से इन गांवों को सूखा संभावित गांवों की सूची में शामिल किया गया है। इन गांव में नहरी पानी की व्यवस्था बेहद कमजोर है। सिंचाई के पूरे प्रबंध नहीं होने के कारण खरीफ की फसलों में आमतौर पर संकट रहता है। बालसमंद जैसे कई क्षेत्रों में ग्रामीण पानी के टैंकर खरीदकर प्यास बुझा रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि राजस्थान से पानी के महंगे टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं। यहां पेयजल समस्या के साथ पशुओं के पानी और चारे का संकट गहरा गया है।
15 साल पहले किया गया था सूखा घोषित
करीब 15 साल पहले जिले में आखिरी बार सूखा घोषित किया गया था। वर्ष 2000 में जिले में सूखा घोषित किया गया था। उस साल महज 82 एमएम बरसात रिकॉर्ड की गई थी। जिले में औसतन 416 एमएम बरसात होती है। उस साल महज 20 प्रतिशत ही बरसात होने के चलते सूखाग्रस्त माना गया था। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान बॉर्डर के साथ लगते 35 गांव सूखा संभावित सूची में शामिल किए गए हैं। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 1989 में सूखा घोषित किया गया था। उस साल महज 50 एमएम बरसात रिकॉर्ड की गई थी। जिले में रबी सीजन में करीब 3 लाख हेक्टेयर में बिजाई होती है, जिसमें गेहूं, चना, सरसों प्रमुख हैं। खरीफ के सीजन में 2.5 लाख हेक्टेयर में बिजाई होती है, जिसमें कपास, ग्वार, बाजरा प्रमुख फसल हैं। कुछ एरिया में मूंग व सब्जियों की खेती होती है।
जिले के सूखा संभावित गांव
काजला, मलापुर, न्यौली खुर्द, बगला, दड़ौली, चूली बागडियान, असरावां, सुलतानपुर, मुजादपुर, कंवारी, धमाना, चौधरीवास, गावड, गोरछी, सरसाना, पनिहारचक्क, भेरिया, नलवा, तलवंडी रुक्का, डाया, स्याहडवा, बालावास, दुबेटा, तलवंडी बादशाहपुर, बाडो ब्राह्मणाण, कालवास, रावतखेड़ा, चिडौद, बुडाक, बांडाहेडी, डोभी, खारिया, सलेमगढ़, बालसमंद, सुंडावास।
जिले में कुल एरिया - 404308 हेक्टेयर
जिले में कृषि एरिया - 340000 हेक्टेयर
कृषि का कुल सिंचित एरिया - 206000 हेक्टेयर
ट्यूबवेल आधारित सिंचित एरिया - 46287 हेक्टेयर
बरसात पर निर्भर एरिया - 87713 हेक्टेयर
सिंचाई के लिए 75670 ट्यूबवेल
जिले में नहरी पानी से छूटी जमीन की सिंचाई के लिए 75670 ट्यूबवेल हैं, जिसमें 60963 ट्यूबवेल डीजल पंप से चलते हैं। करीब 14658 ट्यूबवेल बिजली की मोटर से संचालित किए जा रहे हैं। जिले में 61 खुले कुएं सिंचाई के काम के लिए उपयोग किए जाते हैं।
326 जोहड़
रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 1326 जोहड़ चिह्नित हैं। चालू हालत के 662 सार्वजनिक जोहड़ हैं, जिनमें अधिकतर में बरसात का पानी भरता है। गर्मी के मौसम में आधे से अधिक जोहड़ सूख जाते हैं। कुछ 62 जोहड़ों में ही नहरी पानी पहुंचाने का प्रावधान हैं। कुल 151 छोटी बड़ी नहर हैं।
इतना एरिया बरसात पर निर्भर
हिसार सेकेंड ब्लॉक 36 प्रतिशत
बरवाला 32 प्रतिशत
हिसार फर्स्ट 30 प्रतिशत
हांसी सेकेंड 30 प्रतिशत
हांसी फर्स्ट 24 प्रतिशत
उकलाना 15 प्रतिशत
आदमपुर 15 प्रतिशत
अग्रोहा 14 प्रतिशत
नारनौंद 14 प्रतिशत
हिसार में भूजल का रिकॉर्ड
हिसार सिटी 6.5 मीटर, आदमपुर ब्लॉक 7.2 मीटर, अग्रोहा 10.29 मीटर, बरवाला में 6.61 मीटर, हांसी 4.74 मीटर, हिसार प्रथम ब्लॉक 6.17, हिसार सेकेंड ब्लॉक 9.77 मीटर, नारनौंद 10.24 मीटर, उकलाना 8.35 मीटर
कितनी हुई बरसात
वर्ष 2012 312 एमएएम
वर्ष 2013 318 एमएम
वर्ष 2014 325 एमएम
वर्ष 2015 319 एमएम
हिसार जिले में सूखे को लेकर अभी हमारे पास किसी तरह के निर्देश नहीं आए हैं। मुख्यालय की ओर से निर्देश मिलने पर कार्यवाही की जाएगी।
- ब्रह्मजीत अहलावत, जिला राजस्व अधिकारी, हिसार