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सैकड़ों मजदूरों को पीएफ का 6.18 करोड़ रुपये न देने के मामले में अब 8 अप्रैल को होगी सुनवाई होगी सुनवाई
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हिसार। नगर निगम व इससे काम करने वाली एजेंसियों की तरफ से सैकड़ों मजदूरों को पीएफ का 6.18 करोड़ रुपये न देने मामले में कोर्ट ने सुनवाई के लिए आगामी तिथि 8 अप्रैल निर्धारित की है। इससे पहले 9 मार्च को नगर निगम ने ईपीएफओ की तरफ से पीएफ की ली गई 6.18 करोड़ रुपये की राशि को रुकवाने के लिए कोर्ट में अपील की थी। सुनवाई के दौरान निगम प्रशासन का कहना था कि 6.18 करोड़ रुपये की राशि का डिमांड ड्राफ्ट बिना निगम अधिकारियों की सहमति के किया गया। इस मामले में निगम प्रशासन ने पंजाब नेशनल बैंक व ईपीएफओ को पार्टी बनाया है। उधर, निगम प्रशासन इस मामले को लेकर ईपीएफओ की ट्रिब्यूनल में जाने की तैयारी कर रहा है।
72 सुनवाई के बाद आया था न्यायिक फैसला
बता दें कि नगर निगम व इससे काम करने वाली 104 एजेंसियां सैकड़ों मजदूरों के पीएफ का पैसा डकार गए। निगम प्रशासन ने निर्माण व अन्य तरह के काम करने वाली एजेंसियों को तो यह राशि जारी कर दी थी, लेकिन इन एजेंसियों ने यह पैसा मजदूरों के खातों में जमा नहीं कराया। इस मामले में ईपीएफओ की न्यायिक जांच में नगर निगम को दोषी माना गया था। यह मामला 30 जून 2016 में पकड़ में आया था। इस मामले में 72 बार सुनवाई के बाद न्यायिक फैसला सुनाया गया था। न्यायिक फैसले में तुरंत प्रभाव से 6.18 करोड़ रुपये की राशि जमा करवाने के आदेश दिए गए थे। जब निगम प्रशासन ने ईपीएफओ को इस राशि का भुगतान नहीं किया गया तो ईपीएफओ ने निगम के अकाउंट को ही सीज कर दिया। आखिर में निगम प्रशासन को इस राशि का भुगतान कर अपने अकाउंट को खुलवाना पड़ा।
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72 सुनवाई के बाद आया था न्यायिक फैसला
बता दें कि नगर निगम व इससे काम करने वाली 104 एजेंसियां सैकड़ों मजदूरों के पीएफ का पैसा डकार गए। निगम प्रशासन ने निर्माण व अन्य तरह के काम करने वाली एजेंसियों को तो यह राशि जारी कर दी थी, लेकिन इन एजेंसियों ने यह पैसा मजदूरों के खातों में जमा नहीं कराया। इस मामले में ईपीएफओ की न्यायिक जांच में नगर निगम को दोषी माना गया था। यह मामला 30 जून 2016 में पकड़ में आया था। इस मामले में 72 बार सुनवाई के बाद न्यायिक फैसला सुनाया गया था। न्यायिक फैसले में तुरंत प्रभाव से 6.18 करोड़ रुपये की राशि जमा करवाने के आदेश दिए गए थे। जब निगम प्रशासन ने ईपीएफओ को इस राशि का भुगतान नहीं किया गया तो ईपीएफओ ने निगम के अकाउंट को ही सीज कर दिया। आखिर में निगम प्रशासन को इस राशि का भुगतान कर अपने अकाउंट को खुलवाना पड़ा।
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