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बाजरे की किस्मों के लिए एचएयू ने तीन कंपनियों के साथ किया समझौता
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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) द्वारा विकसित बाजरे की उन्नत किस्में अब देश के अन्य प्रदेशों में भी अपना परचम लहराएंगी। इसके लिए विश्वविद्यालय ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत तकनीकी व्यवसायीकरण को बढ़ावा देते हुए दक्षिण भारत की तीन प्रमुख कंपनियों से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया शोध किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा, तब तक उसका कोई फायदा नहीं है। इसलिए इस तरह के समझौते पर हस्ताक्षर कर विश्वविद्यालय का प्रयास है कि यहां से विकसित उन्नत किस्मों व तकनीकों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जा सके।
समझौते के तहत विश्वविद्यालय की ओर से विकसित बाजरे की किस्म एचएचबी 67 संशोधित, एचएचबी 299 व एचएचबी 311 का बीज तैयार कर कंपनियां किसानों तक पहुंचाएंगी, ताकि किसानों को उन्नत किस्म का विश्वसनीय बीज मिल सके और उनकी पैदावार में इजाफा हो सके। इस मौके पर कुलपति के ओएसडी एवं मानव संसाधन निदेशालय के निदेशक डॉ. अतुल ढींगड़ा, अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत, डॉ. एसके पाहुजा, डॉ. अनिल यादव, डॉ. विनोद कुमार आदि मौजूद रहे।
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इन कंपनियों के साथ हुआ समझौता
दक्षिण भारत की श्रीसांइ सद्गुरु सीड्स, हैदराबाद (तेलंगाना) के साथ बाजरे की किस्म एचएचबी 67 संशोधित व एचएचबी 299 के समझौता ज्ञापन पर एचएयू की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत ने हस्ताक्षर किए हैं, जबकि कंपनी की तरफ से अंबाती संजीव रेड्डी ने हस्ताक्षर किए। वहीं, बाजरे की एचएचबी 299 व एचएचबी 311 किस्म के लिए समझौता श्रीमुरलीधर सीड् कॉरपोरेशन, कुरनूल, आंधप्रदेश के साथ हुआ है, जिसमें कंपनी की ओर से मुरलीधर रेड्डी ने हस्ताक्षर किए हैं। तीसरी कंपनी मैसर्ज देव एग्रीटेक गुरुग्राम के साथ समझौता हुआ है, जिसमें कंपनी की ओर से डॉ. यशपाल ने हस्ताक्षर किए।
लाइसेंस फीस के तहत मिलेगा कंपनी को अधिकार
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद अब कंपनी विश्वविद्यालय को लाइसेंस फीस अदा करेगी, जिसके तहत उसे बीज का उत्पादन व विपणन करने का अधिकार प्राप्त होगा। इसके बाद किसानों को उन्नत किस्म का बीज मिल सकेगा। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित इन किस्मों में अन्य किस्मों की तुलना में अधिक खनिज व पैदावार मिलती है।
किस्मों की खासियत
एचएचबी 67(संशोधित) संकर किस्म में बायो टेक्नोलॉजी विधि द्वारा जोगिया प्रतिरोधी जीन डाले गए हैं। एचएचबी 299 व एचएचबी 311 अधिक लौह युक्त (73-83 पीपीएम) संकर बाजरा की किस्में हैं। इनके सिट्टे शंक्वाकार व मध्यम लंबे होते हैं। एचएचबी 299 किस्म 80-82 दिनों में जबकि एचएचबी 311 किस्म 75-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। अच्छा रख रखाव करने पर एचएचबी 299 व एचएचबी 311 क्रमश: 49.0 व 45.0 मन प्रति एकड़ तक पैदावार देने की क्षमता रखती हैं। सभी किस्में जोगिया रोगरोधी हैं।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया शोध किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा, तब तक उसका कोई फायदा नहीं है। इसलिए इस तरह के समझौते पर हस्ताक्षर कर विश्वविद्यालय का प्रयास है कि यहां से विकसित उन्नत किस्मों व तकनीकों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जा सके।
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समझौते के तहत विश्वविद्यालय की ओर से विकसित बाजरे की किस्म एचएचबी 67 संशोधित, एचएचबी 299 व एचएचबी 311 का बीज तैयार कर कंपनियां किसानों तक पहुंचाएंगी, ताकि किसानों को उन्नत किस्म का विश्वसनीय बीज मिल सके और उनकी पैदावार में इजाफा हो सके। इस मौके पर कुलपति के ओएसडी एवं मानव संसाधन निदेशालय के निदेशक डॉ. अतुल ढींगड़ा, अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत, डॉ. एसके पाहुजा, डॉ. अनिल यादव, डॉ. विनोद कुमार आदि मौजूद रहे।
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इन कंपनियों के साथ हुआ समझौता
दक्षिण भारत की श्रीसांइ सद्गुरु सीड्स, हैदराबाद (तेलंगाना) के साथ बाजरे की किस्म एचएचबी 67 संशोधित व एचएचबी 299 के समझौता ज्ञापन पर एचएयू की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत ने हस्ताक्षर किए हैं, जबकि कंपनी की तरफ से अंबाती संजीव रेड्डी ने हस्ताक्षर किए। वहीं, बाजरे की एचएचबी 299 व एचएचबी 311 किस्म के लिए समझौता श्रीमुरलीधर सीड् कॉरपोरेशन, कुरनूल, आंधप्रदेश के साथ हुआ है, जिसमें कंपनी की ओर से मुरलीधर रेड्डी ने हस्ताक्षर किए हैं। तीसरी कंपनी मैसर्ज देव एग्रीटेक गुरुग्राम के साथ समझौता हुआ है, जिसमें कंपनी की ओर से डॉ. यशपाल ने हस्ताक्षर किए।
लाइसेंस फीस के तहत मिलेगा कंपनी को अधिकार
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद अब कंपनी विश्वविद्यालय को लाइसेंस फीस अदा करेगी, जिसके तहत उसे बीज का उत्पादन व विपणन करने का अधिकार प्राप्त होगा। इसके बाद किसानों को उन्नत किस्म का बीज मिल सकेगा। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित इन किस्मों में अन्य किस्मों की तुलना में अधिक खनिज व पैदावार मिलती है।
किस्मों की खासियत
एचएचबी 67(संशोधित) संकर किस्म में बायो टेक्नोलॉजी विधि द्वारा जोगिया प्रतिरोधी जीन डाले गए हैं। एचएचबी 299 व एचएचबी 311 अधिक लौह युक्त (73-83 पीपीएम) संकर बाजरा की किस्में हैं। इनके सिट्टे शंक्वाकार व मध्यम लंबे होते हैं। एचएचबी 299 किस्म 80-82 दिनों में जबकि एचएचबी 311 किस्म 75-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। अच्छा रख रखाव करने पर एचएचबी 299 व एचएचबी 311 क्रमश: 49.0 व 45.0 मन प्रति एकड़ तक पैदावार देने की क्षमता रखती हैं। सभी किस्में जोगिया रोगरोधी हैं।