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Haryana: 1954 की जंग जीते पांच गांवों के ग्रामीण ,खुशी में बांटे दो क्विंटल लड्डू

Wed, 28 Feb 2024 08:46 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 28 Feb 2024 08:46 PM IST
सार

सीएम ने 2719 परिवारों को मालिकाना हक देने का एलान किया था। आवास बचाओ संघर्ष समिति अब शुल्क कम कराने के लिए अनुरोध करेगी। 

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Haryana: Villagers of 5 villages got ownership of houses, distributed 2 quintal laddus in happiness
जानकारी देते ग्रामीण - फोटो : संवाद

विस्तार

हरियाणा के हिसार में ढाणी पीरावाली, बीड़, ढंढूर, झीड़ी, बीड़ बबरान, डिग्गी ताल के ग्रामीणों ने बुधवार को 2 क्विंटल लड्डू बांट कर अपनी खुशी जाहिर की। ग्रामीणों ने कहा कि हम 1954 की लड़ाई को जीत गए हैं। 70 साल बाद हमें अपना हक मिला है। हमारे काफी बुजुर्ग इस लड़ाई को लड़ते हुए दुनिया से विदा हो चुके हैं। आज उन बुजुगों की आत्मा को भी शांति मिली होगी। सात दशक बाद अब हमें अपने आशियाना का मालिकाना हक मिलेगा।

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आवास बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले ग्राम सचिवालय ढंढूर में जुटे इकट्ठा होकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल, कुलदीप बिश्नाई, आदमपुर के विधायक भव्य बिश्नोई का आभार जताया। सभी गांवों के सरपंच व गांवों के मौजिज लोग उपस्थित रहे। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें मालिकाना हक दिलाने में कुलदीप बिश्नोई व भव्य बिश्नोई ने विशेष प्रयास किए हैं।
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1954 में इन गांवों को बसाया गया था। तब से ही इन गांवों के लोग मालिकाना हक की मांग कर रहे थे। 2010 में सरकार ने ग्रामीणों को गांव खाली करने का नोटिस दिया था। 2022 उप चुनाव में भव्य बिश्नोई ने चुनाव मे वादा किया था कि उन्हें हर हाल मे मालिकाना हक दिलाकर रहेंगे।

विधायक भव्य बिश्नोई ने विधानसभा ने गांवों के मालिकाना हक संबंधी आवाज उठाई थी जिस पर मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए उपरोक्त पांच गांवों को मालिकाना हक दिए जाने की घोषणा की। चौधरी भजनलाल ने सबसे पहले इन गांवों को पेयजल कनेक्शन दिया था।


इस अवसर पर फूल चंद पूर्व सरपंच एवं प्रधान संघर्ष समिति, सतपाल सरपंच, गुरदयाल सरपंच, जरनैल सिंह, सरपंच प्रतिनिधि, दलीप सरपंच, परमजीत सिंह पम्मा, प्रधान गुरुद्वारा कमेटी, अमर सिंह पंच, भीम सिंह, हवा सिंह पंच, श्याम लाल, रमेश नापा सहित पांचों गांवों के ग्रामीण मौजूद रहे।

समिति शुल्क कम करने की मांग करेगी
समिति के सदस्यों ने कहा कि सरकार ने 2 से लेकर 4 हजार रुपये प्रति गज का शुल्क तय किया है। गांव के हिसाब से यह शुल्क अधिक है। काफी परिवार मजदूरी कर अपना परिवार पालते हैं। ऐसे में उनके लिए यह काफी अधिक कीमत हो जाएगी। समिति इस शुल्क को कम करने की मांग को लेकर सरकार से अनुरोध करेगी।

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