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Hisar News: ओलों ने तोड़ीं किसानों की उम्मीदें
Wed, 01 Apr 2026 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Wed, 01 Apr 2026 12:27 AM IST
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सिवानी मंडी में गिरे ओले। संवाद
सिवानी मंडी। सिवानी मंडी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मंगलवार को मौसम का बदला रूप आफत बनकर बरसा। ओलावृष्टि और तेज बारिश से फसलें नष्ट हो गईं। खेतों और सड़कों पर ओलों की सफेद चादर बिछ गई।
सिवानी, बड़वा, खेड़ा, झुंपा, मोतीपुरा, सैनीवास, लीलस, रूपाणा, किकराल, नलोई, बख्तावरपुरा और मोहिला सहित करीब 20 गांवों में 15 मिनट तक ओले गिरने से गेहूं, चना और सरसों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा। सिवानी निवासी किसान पंडित विनोद वशिष्ठ ने हरियाणवी लहजे में कहा कि राम नै किते का कोनी छोड्या। ओलां तै कटी-कटाई फसल खराब होगी। सारी साल की मेहनत पर पानी फिरग्या।
अखिल भारतीय किसान सभा के पदाधिकारी दयानंद पूनिया, सुकर्म जागलान, अंतर कसवां, मास्टर उमराव सिंह, महाबीर भौभिया, रामकिशन भाकर और रामचंद्र फौजी ने बताया कि गेहूं की पकी फसल को 50 से 100 प्रतिशत तक नुकसान हुआ जबकि सरसों और चने की कटी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत गिरदावरी कर किसानों को 50,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाए। इसके लिए बुधवार दोपहर 12 बजे एसडीएम को मांगपत्र सौंपा जाएगा। किसान नेताओं ने यह भी कहा कि जब क्षेत्र में ओलावृष्टि हो रही थी उस समय मुख्यमंत्री तोशाम थे ऐसे में उन्हें सिवानी क्षेत्र के लिए तुरंत राहत की घोषणा करनी चाहिए थी।
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जलभराव से आवागमन प्रभावित :
उद्योगपति बाबूलाल जिंदल, पूर्व सरपंच सतपाल गोदारा, दीपक पोपली और पूर्व पार्षद प्रमिला भांभू ने बताया कि दोपहर करीब 2:45 से 3:00 बजे ओले गिरे। इसके बाद तेज बारिश हुई। चालक गाड़ियों और खुद को बचाने के लिए सुरक्षित स्थान खोजते दिखे। शहर की कई गलियों में जलभराव से आवागमन भी प्रभावित हुआ।
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ओलावृष्टि और बारिश फसलों को नुकसान की सूचना है। प्रशासन की ओर रिपोर्ट ली जाएगी। प्रभावित किसानों की आवाज उच्च अधिकारियों तक पहुंचाकर यथासंभव सहायता दिलाई जाएगी।- डॉ. सुभाष कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग, सिवानी मंडी।
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सिवानी, बड़वा, खेड़ा, झुंपा, मोतीपुरा, सैनीवास, लीलस, रूपाणा, किकराल, नलोई, बख्तावरपुरा और मोहिला सहित करीब 20 गांवों में 15 मिनट तक ओले गिरने से गेहूं, चना और सरसों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा। सिवानी निवासी किसान पंडित विनोद वशिष्ठ ने हरियाणवी लहजे में कहा कि राम नै किते का कोनी छोड्या। ओलां तै कटी-कटाई फसल खराब होगी। सारी साल की मेहनत पर पानी फिरग्या।
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अखिल भारतीय किसान सभा के पदाधिकारी दयानंद पूनिया, सुकर्म जागलान, अंतर कसवां, मास्टर उमराव सिंह, महाबीर भौभिया, रामकिशन भाकर और रामचंद्र फौजी ने बताया कि गेहूं की पकी फसल को 50 से 100 प्रतिशत तक नुकसान हुआ जबकि सरसों और चने की कटी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत गिरदावरी कर किसानों को 50,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाए। इसके लिए बुधवार दोपहर 12 बजे एसडीएम को मांगपत्र सौंपा जाएगा। किसान नेताओं ने यह भी कहा कि जब क्षेत्र में ओलावृष्टि हो रही थी उस समय मुख्यमंत्री तोशाम थे ऐसे में उन्हें सिवानी क्षेत्र के लिए तुरंत राहत की घोषणा करनी चाहिए थी।
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जलभराव से आवागमन प्रभावित :
उद्योगपति बाबूलाल जिंदल, पूर्व सरपंच सतपाल गोदारा, दीपक पोपली और पूर्व पार्षद प्रमिला भांभू ने बताया कि दोपहर करीब 2:45 से 3:00 बजे ओले गिरे। इसके बाद तेज बारिश हुई। चालक गाड़ियों और खुद को बचाने के लिए सुरक्षित स्थान खोजते दिखे। शहर की कई गलियों में जलभराव से आवागमन भी प्रभावित हुआ।
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ओलावृष्टि और बारिश फसलों को नुकसान की सूचना है। प्रशासन की ओर रिपोर्ट ली जाएगी। प्रभावित किसानों की आवाज उच्च अधिकारियों तक पहुंचाकर यथासंभव सहायता दिलाई जाएगी।- डॉ. सुभाष कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग, सिवानी मंडी।