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सिरमौर बनने वाला ग्वार उद्योग गिन रहा अंतिम सांसें

Thu, 26 Nov 2015 12:15 AM IST
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो Updated Thu, 26 Nov 2015 12:15 AM IST
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ग्वार उद्योग ने रॉकेट की गति से ऊंची भरी, लेकिन उतनी ही तेेजी से इस उद्योग का भट्टा भी बैठा। सिवानी मंडी की तरह मंडी आदमपुर का ग्वार उद्योग एशिया का सिरमौर बना। वर्ष 2010 में ग्वार से संबंधित उद्योग आदमपुर में लगने शुरू हुए और दो साल में इस उद्योग ने आदमपुर को एशिया में प्रसिद्ध कर दिया। 2012-13 में ये उद्योग इतनी तेजी से पनपा कि इस दौरान यहां 2 से 20 यूनिट हो गई जिसमें 18 यूनिट ग्वार गम की और 2 यूनिट पॉडर प्रोडक्शन की लगी। जिससे ये उद्योग ही नहीं आदमपुर मंडी भी ग्वार के मामले में एशिया में नंबर वन पर आ गई थी, लेकिन समय ने पलटी मारी और उद्योग को ले बैठीष। अब ये उद्योग अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है। अब कई उद्योगों के बंद होने से हजारों लोग बेेरोजगार हो गए। एशिया की सबसे बड़ी मंडी जोधपुर के बाद आदमपुर का ही स्थान है।
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क्या है ग्वार इंडस्ट्री
ग्वार की फसल दक्षिण हरियाणा तथा राजस्थान में ही होती है। ग्वार से 3 तरह के प्रोडक्ट बनाए जाते हैं जिसमें चूरी, कोरमा और ग्वार दाल है। इसमें से ग्वार दाल से ग्वार गम बनाई जाती है और गम से पाऊडर बनता है। पाऊडर के भी अलग-अलग तरह के उत्पादन होते हैं। जिसमें जो सबसे अच्छी क्वालिटी का पाऊडर होता है वो खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होता है। बाकी उत्पाद को तेल के कुओं के लिए निर्यात किया जाता है। इसी तरह कोरमा और चूरी से कैटल फीड बनाई जाती है।  
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बिजली निगम के फैसले ने तोड़ी उद्योग की कमर
ग्वार उद्योग फसल आधारित उद्योग है। फसल साल में सिर्फ एक ही बार होती है, लेकिन बिजली निगम के नियमों को देखते हुए इस उद्योग को चलाना मुश्किल हो गया है। अगर कोई उद्योगपति कुछ दिन अपनी यूनिट को बंद रखना चाहता है तो बिजली निगम उससे अगलेे 3 महीने का बिल वसूलता है। इसके अलावा 17 केवीएच लोड का बिल भी लेती है। इसके कारण इस उद्योग को चलाना मुश्किल हो गया है।
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प्रकृति की मार भी पड़ रही है उद्योग पर    
पिछले दो से तीन सालों में ग्वार का उत्पादन तेजी से घटा है जिसके कारण उद्योग को चलाए रखना मुश्किल हो रहा है। असल में पिछले कुछ सालों में मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण ग्वार की खेती को भारी नुकसान हुआ है। पिछले कुछ सालों में ऐसी स्थिती रही जब फसल के पकने के समय आया उसी दौरान बारिश हो गई जिससे ये फसल खराब हो गई। इस साल सफेद मक्खी इस फसल को चट कर गई।
क्या कहते हैं उद्योगपति
इस उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार इस पर से मार्केट फीस हटा सकती है। इससे उद्योग के साथ साथ किसानों को भी भारी फायदा होगा। इसके अलावा बिजली निगम को अपनी पॉलिसी में बदलाव लाना होगा।  
- उद्योगपति प्रहलाद राय भाण वाले
 ग्वार को कारोबार इस समय मंदी के दौर से गुजर रहा है। सरकार को चाहिए वे इस उद्योग को बचाने के लिए इस पर लगी मार्केट फीस हटा ले ताकि ये उद्योग दोबारा से पुनर्जीवित हो सके। इसके अलावा  बिजली निगम उद्यागों से ऑवर लोड, फिक्स चार्जिंग तथा फ्यूल चार्ज के नाम पर कई तरह की वसूली होती है। यदि ये वसूली ना की जाएं तो भी उद्योग को काफी फायदा हो सकता है।
-संदीप मित्तल, उद्योगपति
ग्वार उद्योग पर सरकार के साथ-साथ प्रकृति की भी बड़ी मार पड़ी है जिसके कारण ये उद्योग आज संकट के दौर से गुजर रहा है। सरकार को चाहिए ग्वार से बने उत्पादों पर शोध करवाएं ताकि इनका इस्तेमाल अधिक से अधिक भारत में हो। जिससे किसानों के साथ-साथ उद्योगों को भी फायदा हो।

-  मांगेराम सिंगला उद्योगपति
 लगातार कच्चे तेल के दाम में गिरावट के कारण ग्वार उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। जब तक अरब देशों में शांति स्थापित नहीं होती तब तक इस उद्योग के उभरने में दिक्कतें आती रहेंगी। सरकार को चाहिए के इस उद्योग को वो किसी भी तरह से सहायता देकर इसकी मदद करें।
- मनोहर लाल मित्तल, उद्योगपति

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