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हिसार के सब्जी मंडी विक्रेता का बेटा गीतांश बंगलूरू में करेगा शोध

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 01:12 AM IST
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Geetansh, son of a vegetable market seller from Hisar, will do research in Bangalore
हिसार। शहर के हरि नगर निवासी गीतांश चावला का चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च बंगलूरू (जेएलएन सीएएसआर) में हुआ है। वे यहां से एमएससी केमिस्ट्री-पीएचडी का ड्यूल डिग्री कोर्स करेंगे। गीतांश के पिता सतीश कुमार सब्जी मंडी में सब्जी की दुकान चलाते हैं, जबकि मां गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।
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संस्थान की मात्र 10 सीटों के लिए हो रही प्रतिस्पर्धा में उत्तर भारत से चयनित होने वाले गीतांश एकमात्र विद्यार्थी हैं। गवर्नमेंट पीजी कॉलेज हिसार से बीएससी नॉन मेडिकल की पढ़ाई कर रहे गीतांश ने फरवरी में हुई आईआईटी जैम की परीक्षा में देशभर में 483वां रैंक हासिल किया था।
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देश के तीन प्रतिष्ठित संस्थानों में हुआ चयन
गीतांश का चयन देश के प्रतिष्ठित तीन संस्थानों में हुआ। दिव्यांश ने बताया कि आईआईटी मुंबई में एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग में एमएससी-पीएचडी के ड्यूल डिग्री कोर्स में दाखिला आईआईटी जैम के आधार पर हुआ। जेएलएनसीएएसआर बंगलूरू में आईआईटी जैम और इसके बाद साक्षात्कार के आधार पर इंटिग्रेटिड कोर्स एमएससी केमिस्ट्री-पीएचडी कोर्स में दाखिला हुआ। भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च में परीक्षा व दो चरण के साक्षात्कार के बाद एमएससी-पीएचडी के इंटिग्रेटिड कोर्स में दाखिले के योग्य हो गए। उन्होंने इनमें से जेएलएनसीएएसआर बंगलूरू को चुना है।
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गीतांश ने बताया कि उनके नाना एवं राजकीय पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. केसी अरोड़ा का उनकी सफलता के पीछे बड़ा हाथ है। वे केमिस्ट्री के शिक्षक रहे और लगातार उन्हें प्रोत्साहित करते रहे। उन्हीं की बदौलत आज उनका दाखिला देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में हुआ है।

19 हजार मिलेगी प्रतिमाह फैलोशिप
गीतांश को प्रतिमाह 19 हजार रुपये फैलोशिप मिलेगी। एमएससी के बाद पीएचडी में उनकी यह फैलोशिप बढ़कर 35 हजार रुपये हो जाएगी। यहां पढ़ाई करने की उनकी सालाना फीस मात्र 5 हजार रुपये है। गीतांश ने बताया कि वे देश के लिए ऐसे शोध कार्य करना चाहते हैं, जो सीधे तौर पर समाज के लिए हितकारी हों। वे खुश हैं कि उनका चयन ऐसी जगह हुआ है, जहां थ्योरी से अधिक प्रैक्टिकल कार्यों पर ध्यान दिया जाता है।
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