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पराली जलाने से नष्ट हो रहे मित्र कीट, प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा : प्रो. कांबोज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Dec 2022 11:57 PM IST
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Friendly insects being destroyed by stubble burning, have to return to natural farming: Prof. combos
हिसार- गांव सदलपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित किसान मेला- किसान चौपाल में उपस्थित किसा? - फोटो : Hisar
हिसार। धरती में ही कृषि को फायदा पहुंचाने वाले कीट मौजूद रहते हैं। अगर हम पराली जलाएंगे तो मित्र कीट नष्ट हो जाएंगे, जिससे फसल की पैदावार घटेगी। हमें मित्र कीटों को बचाने के लिए पराली जलाने से दूरी बनानी होगी। किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा। अपने खाने की थाली से जहर को दूर करना होगा। यह कहना है एचएयू के कुलपति प्रो.बीआर कांबोज का।
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वे सोमवार को सदलपुर के कृषि विज्ञान केंद्र में अमर उजाला की ओर से आयोजित किसान मेला किसान चौपाल कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि किसानों को संबोधित कर रहे थे। कुलपति प्रो. कांबोज ने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को आगे आना होगा। आज आपके खाने की थाली में जहर है। इस जहर से मुक्ति पानी होगी। जैविक खेती-प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा। किसान पहले खाने के लिए सब्जियां उगाते समय उसमें कीटनाशकों, रासासयनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं करता। हमें हर गांव में इस मुहिम को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन को लेकर सरकार की ओर से व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है जिसका काफी असर भी देखने को मिला। पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई है।
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हिसार जिले में पराली जलाने के केस पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम हो गए। प्राकृतिक खेती से किसानों की आय दोगुनी का लक्ष्य जल्द पूरा होगा। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि एचएयू के विस्तार शिक्षा निदेशक बलवान सिंह मंडल ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयाम से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी फसलों की अच्छी गुणवत्ता के लिए प्राकृतिक तकनीकों को ही अपनाना होगा।
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अभ्यास से सीख सकते हैं विधि
उन्होंने कहा कि कृषि के अवशेषों को जलाने के बजाये गलाने से अधिक फायदा होगा। एचएयू के मौसम विभाग के अध्यक्ष डॉ. एमएल खिचड़ ने कहा कि प्रदेश के हर गांव के किसान एचएयू के मौसम विभाग से जुड़ चुके हैं। करीब 5 लाख किसानों तक मौसम विभाग मैसेज के जरिये संदेश पहुंचा रहा है। खेती में मौसम के पूर्वानुमान का बड़ा महत्व है। केंद्र के समन्वयक डॉ. नरेंद्र ने किसानों को जीवामृत, नेमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, दशपर्ण अर्क बनाने की विधि समझाई। उन्होंने कहा कि किसान इस बार में केंद्र में आकर प्रैक्टिकल तौर पर सीख सकते हैं। किसानों को दिखाने के लिए यहां प्राकृतिक खेती के मॉडल प्रदर्शनी प्लांट लगाए गए हैं।
इस दौरान सह निदेशक डॉ. एके गोदारा, डॉ. बलजीत सहारण, डॉ.ओमप्रकाश बिश्नोई, डॉ. सुरेंद्र सिहाग, डॉ. बृजलाल, डॉ. सुरेंद्र जाजूदा, डॉ. कृष्ण ने प्राकृतिक खेती तथा पराली प्रबंधन पर अपने विचार रखे। डॉ. कुलदीप सिंह, इंजीनियर अजीत, डॉ. दिनेश कुमार, दीपक कुमार, सतबीर सिंह मौजूद रहे।

प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित
इस मौके पर दस प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। प्रगतिशील किसानों ने अपने उत्पादों की एक प्रदर्शनी लगाई। कार्यक्रम में करीब 550 किसानों ने पंजीकरण कराया। कुलपति प्रो. बीआर कांबोज व किसानों को फार्म का भ्रमण कराया गया। केंद्र पर जनवरी माह में दूसरा किसान मेला आयोजित किया जाएगा।

हिसार- गांव सदलपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित किसान मेला- किसान चौपाल में उपस्थित किसा?

हिसार- गांव सदलपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित किसान मेला- किसान चौपाल में उपस्थित किसा?- फोटो : Hisar

हिसार- गांव सदलपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में कुलपति प्रो.बीआर कांबोज को पगड़ी पहनाकर स्वागत ?

हिसार- गांव सदलपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में कुलपति प्रो.बीआर कांबोज को पगड़ी पहनाकर स्वागत ?- फोटो : Hisar

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