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Hisar: विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के आरोप में हरियाणा का स्वतंत्रता सेनानी आसाम में हुआ था गिरफ्तार

Mon, 11 Aug 2025 01:25 PM IST
शाहिल शर्मा माई सिटी रिपोर्टर हिसार
माई सिटी रिपोर्टर हिसार Published by: शाहिल शर्मा Updated Mon, 11 Aug 2025 01:25 PM IST
सार

स्वतंत्रता सेनानी बनवारी लाल भारद्वाज ने देश को आजादी दिलाने में अतुलनीय योगदान दिया। बनवारी लाल भारद्वाज को विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के आरोप में आसाम में गिरफ्तार कर लिया था। 

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Freedom fighter Banwari Lal Bhardwaj from Hisar
बनवारी लाल भारद्वाज, स्वतंत्रता सेनानी - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

गांव बूरे निवासी व स्वतंत्रता सेनानी बनवारी लाल भारद्वाज ने देश को आजादी दिलाने में अतुलनीय योगदान दिया। बनवारी लाल भारद्वाज को विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के आरोप में आसाम में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें छह माह सजा सुनाई गई। बेशक बनवारी लाल भारद्वाज ने देश को स्वतंत्रता दिलवाने में काफी योगदान दिया लेकिन आज उनके उत्तराधिकारी अपने हकों के लिए लड़ रहे हैं। गांव बूरे निवासी व स्व. बनवारी लाल के बेटे अंजनी शर्मा बताते हैं कि उनके पिता का जन्म 15 अगस्त 1914 को हुआ था। 

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उनके दादा का नाम मूलचंद भारद्वाज था। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की भावना कटू-कूट कर भरी हुई थी। वह महात्मा गांधी के विचारों से भी बहुत प्रभावित थे। काफी कम उम्र में ही वह आजादी के आंदोलन में कूद पड़े थे। सबसे पहले उन्हें सिवानी में स्वतंत्रता सेनानियों का सहयोग करने पर गिरफ्तार किया गया था। उस समय उन्हें 5 रुपये जुर्माना किया गया था। दादी बुरजी देवी ने वह जुर्माना भरा और उन्हें जेल छुड़वाया था। 
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असहयोग आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों ने उनके पिताजी की ड्यूटी आसाम में लगा दी थी। असहयोग आंदोलन में विदेशी कपड़ों के बहिष्कार को लेकर वह आसाम के डूमडूमा शहर में पकड़े गए और उन्हें 6 माह की जेल और 25 रुपये जुर्माने की सजा हुई। जुर्माना न भरने पर उन्हें डेढ़ माह की और सजा हुई। सजा पूरी करने के बाद वह हिसार आ गए। साल 1932 में उन्हें हिसार की अदालत ने 6 माह की कठोर कारावास और 25 रुपये की जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर उन्हें डेढ़ माह की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ी फरवरी 1932 में उन्हें लाहौर जेल स्थानांतरित कर दिया गया।

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कई बार किया गया था सम्मानित

बनवारी लाल भारद्वाज को केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से कई बार सम्मानित किया गया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्म शताब्दी समारोह में प्रदेश सरकार की तरफ से तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल ने उन्हें ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शताब्दी समारोह वर्ष के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के लिए प्रदेश की तरफ से ताम्रपत्र दिया गया। देश की आजादी के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरफ से 15 अगस्त 1972 को ताम्रपत्र भेंट किया गया।

भाजपा सरकार ने नहीं दी कोई सुविधा

अंजनी शर्मा के मुताबिक भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्वतंत्रता सेनानियों को कोई सुविधा नहीं दी गई है। सरकार से बार-बार मांग भी की गई है, जिसमें दो प्रतिशत आरक्षण और स्वतंत्रता सेनानी की प्रथम पीढ़ी को पेंशन देना शामिल है। पेंशन की मांग इसलिए की जा रही है कि स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सब कुछ देश का नाम समर्पित कर दिया और अपने बच्चों के पास कुछ छोड़ा। उनकी आर्थिक हालत को देखते हुए सरकार का दायित्व बनता है कि उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाया जाए। मगर सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है।

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