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कृषि पेज के लिए-----धान की पारंपरिक विधि छोड़ सीधी बुआई में सिरसा व जींद जिले ने हासिल किया निर्धारित लक्ष्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Jul 2022 09:51 PM IST
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For agriculture page-----Leaving the traditional method of paddy, Sirsa and Jind district achieved the set target in direct sowing
डीएसआस तकनीक में उपयोग में लाई जाने वाली मशीन। - फोटो : Hisar
हिसार। प्रदेश सरकार की तरफ से किसानों को धान की बुआई की पारंपरिक विधि को छोड़कर सीधी बुआई (डीएसआर) के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसे लेकर सरकार ने सभी जिलों के लिए लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं। हालांकि अभी तक सिरसा व जींद जिले ने ही इस लक्ष्य को हासिल किया है। वहीं सिर्फ 15 फीसदी लक्ष्य के साथ रोहतक प्रदेश में सबसे पीछे है।
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कृषि विभाग ने सिरसा को 8 हजार व जींद को 11 हजार एकड़ में धान की सीधी बुआई का लक्ष्य दिया था। खास बात यह है कि किसान भी सीधी बुआई में रुचि दिखा रहे हैं। इसका उदाहरण में सिरसा में इस बार 13423 एकड़ में धान की सीधी बुआई की गई है। इसके अलावा हिसार व रोहतक में 8-8 हजार एकड़ में सीधी बुआई का लक्ष्य है लेकिन हिसार ने सिर्फ (3200 एकड़) 22 प्रतिशत ही लक्ष्य पाया है।
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बता दें कि जल संरक्षण को बढ़ावा देने के मकसद से राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को धान की पारंपरिक बुआई को छोड़कर सीधी बुआई के लिए जागरूक कर रही है। विभाग इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण भी दे रहा है। साथ ही किसानों को प्रति एकड़ 4000 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। विभाग के अनुसार 2020 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 1 लाख 52 हजार 700 हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती की जाती है।
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प्रदेश में एक लाख एकड़ में सीधा धान बोने का लक्ष्य रखा
कृषि विभाग ने राज्य में कुल धान क्षेत्र के एक लाख एकड़ में सीधे धान बोने का लक्ष्य रखा है। योजना के तहत अधिकारी खेतों में जाकर बुआई का सत्यापन भी करेंगे। किसानों को योजना का लाभ उठाने के लिए मेरी फसल मेरी योजना पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। कृषि विभाग की तरफ से दिए गए लक्ष्य को हासिल करने में जींद व सिरसा जिला सबसे आगे है। इन दोनों जिलों ने अपना 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है। वहीं रोहतक इस सूची में सबसे पीछे है। उसने अभी तक लक्ष्य का 15 प्रतिशत ही हासिल किया है। इसके अलावा हिसार ने 22, कुरुक्षेत्र ने 34, अंबाला ने 38, यमुनानगर ने 49, अंबाला ने 38, कैथल ने 60, पानीपत ने 74, करनाल ने 74, फतेहाबाद ने 76 व सोनीपत ने 87 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।
कैथल व जींद में सबसे ज्यादा 11 हजार का लक्ष्य
विभाग ने सभी जिलों के अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए है। इसके तहत कैथल व जींद जिले में सबसे ज्यादा 11 हजार एकड़ का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा यमुनानगर, पानीपत व सोनीपत में 6-6 हजार, अंबाला में 7 हजार एकड़, सिरसा, हिसार व रोहतक में 8-8 हजार एकड़, फतेहाबाद में 9 हजार एकड़, करनाल व कुरुक्षेत्र में 10-10 हजार एकड़ का लक्ष्य रखा गया है। हरियाणा में 2020 के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 152700 हेक्टेयर धान क्षेत्र है।
सीधी बुआई के फायदे
सीधी बुआई के कई सारे फायदे हैं, एक तो इसमें पानी की बचत होती है। इससे लगभग 15-20 प्रतिशत पानी की बचत हो जाती है। रोपाई में लेबर की समस्या भी बहुत आती है। सीधी बुआई में मशीन से बुआई होती तो मजदूरों का खर्च भी बच जाता है। इसमें लागत भी कम आती है, क्योंकि इसमें सीधी बुआई हुई तो खर्च कम ही लगेगा। कृषि विभाग सीधी बुआई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डीएसआर मशीन पर 50 प्रतिशत सब्सिडी भी दे रहा है।

सरकार की तरफ से धान की सीधी बुआई की तकनीक को लेकर अब किसानों में जागरूकता आ रही है। धीरे-धीरे किसान इस तकनीक को अपना रहे हैं। विभाग भी इसे लेकर लगातार किसानों को जागरूक करने में लगा हुआ है। - गोपीराम सहारण, सहायक कृषि अभियंता, कृषि विभाग
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