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पहली एफआईआर में ही लिख दिया पिता को पीड़िता का पति
जितेंद्र सहारण/अमर उजाला हिसार
Updated Sat, 29 Aug 2015 01:04 AM IST
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शुक्रवार को धरातल पर आए महिला पुलिस थाने की पहली ही एफआईआर में पुलिसिया कार्यप्रणाली उजागर हो गई। केस दहेज प्रताड़ना का दर्ज हुआ और जब वित्त मंत्री द्वारा कंप्यूटर पर क्लिक किए जाने के बाद एफआईआर नंबर 1 की जो प्रति सामने आई उसमें पुलिस ने दो अलग-अलग व्यक्तियों को शिकायतकर्ता का पति बना दिया। गलती भले ही टाइपिंग की रही हो, पर चौंकाने वाली जरूर है। क्योंकि इस पहली एफआईआर पर आईजी, एसपी समेत पुलिस के हर आला अधिकारी की नजर थी, फिर भी इसमें गड़बड़ी हो ही गई।
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वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु द्वारा महिला थाने के उद्घाटन के बाद उन्होंने थाने की कंप्यूटर लैब जाकर वहां एफआईआर नंबर 1 दर्ज की। कुछ क्षण बाद ही एफआईआर की प्रति के साथ ही इसे दर्ज करने में हुई पुलिस की लापरवाही भी सामने आ गई।
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एफआईआर नंबर 1 उकलाना क्षेत्र के गांव बहरी अकबरपुर निवासी पिंकी देवी की है। पुलिस ने दहेज प्रताड़ना के आरोप में धारा 498ए, 323, 406 व 34 के तहत उसके पति प्रदीप निवासी जोगीवाला, सिरसा व उसकी सास संतोष के खिलाफ केस दर्ज किया।
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पीड़िता का आरोप है कि पति उससे दहेज में कार मांग रहा है। अब बात एफआईआर नंबर 1 में हुई गड़बड़ी की करें तो इसमें पुलिस ने शिकायत की पहली ही लाइन में पीड़िता के पिता महावीर सिंह को उसका पति लिख दिया। फिर दोबारा से पति का उल्लेख आया तो उसमें प्रदीप को पति लिखा। एफआईआर भी एक है, महिला भी एक लेकिन इसमें उसके पति के नाम दो अलग-अलग हैं।
कोर्ट तय नहीं, कहां भेजे एफआईआर
थाने के उद्घाटन के बाद पहली एफआईआर दर्ज की गई तो समस्या खड़ी हो गई कि दर्ज एफआईआर की प्रति किस कोर्ट में भेजें। गौरतलब है कि हर थाना वाइज कोर्ट तय हैं और जो भी एफआईआर थाने में दर्ज होती है। उसे 24 घंटे के अंदर संबंधित इलाका कोर्ट को भेजना होता है।
कुछ संगीन मामलों में हालांकि कोर्ट को सूचना तुरंत देने का नियम है। महिला थाना में सूचना ही नहीं दी गई है कि उनका इलाका कोर्ट कौन सा है।
दर्ज मामला चूंकि उकलाना क्षेत्र का था, इसको लेकर थाना प्रभारी ने एफआईआर उकलाना भेजने के लिए वहां के प्रभारी से संपर्क किया, लेकिन उसने लेने से मना कर दिया। तर्क दिया कि उनकी एफआईआर नंबर 1 तो कोई और है, इस नंबर से वे दूसरी एफआईआर नहीं ले सकते।
पहले दिन भीड़, कौन करेगा आखिर जांच
महिला थाने में पहले दिन मामला दर्ज कराने के लिए पीड़ित महिलाओं की भीड़ लग गई। एक एफआईआर दर्ज हुई, 6 अन्य शिकायतें जांच के लिए रख ली गई। पर साथ ही सवाल खड़ा हो गया कि जिस संख्या में शिकायतें आई हैं, क्रम यही रहा तो इनकी जांच कौन करेगा।
महिला थाने में फिलहाल 26 का स्टाफ तैनात किया गया है। इनमें जांच अधिकारी (आईओ) की पावर थाना प्रभारी सरोजबाला समेत 3 के पास है। दो अन्य आईओ में शीला देवी व संतोष का नाम है। थाना प्रभारी के पास चूंकि कई अन्य काम रहते हैं।
दो हैड कांस्टेबल हैं, जिनको आईओ की पावर है, लेकिन उनमें से एक को ड्राइवर का काम दिया गया है, जबकि दूसरी महिला कर्मी को मुंशी का चार्ज। दोनों इस हालत में किसी केस की जांच से नहीं जुड़ सकते। ऐसे में केवल 2 आईओ ही मामलों को समय पर कैसे निपटा पाएंगी, इस पर संशय है।
महिला थाने में पुरुष सिपाही भी तैनात होने हैं, लेकिन इसके लिए अभी किसी को भी डेप्यूट नहीं किया गया है। आईजी बताते हैं कि थाने में 45 का स्टाफ होगा, थाना प्रभारी का कथन है कि उनके पास 26 का स्टाफ है।
ये हालात भी कम चौंकाने वाले नहीं
महिलाओं के लिए अलग से थाना खोलने के साथ ही पुलिस ने पीड़ित महिलाओं को ऑप्शन दिया है कि वे चाहें तो क्षेत्र के संबंधित थाने में भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
अब थानों में महिला स्टाफ की स्थिति पर गौर करें तो जिले में पहले से चल रहे 10 थानों में से 7 थाने ऐसे हैं जिनमें कोई भी महिला आईओ नहीं है। थाना शहर, थाना सिविल लाइन व थाना बरवाला मे ही फिलहाल महिला आईओ तैनात हैं। नारनौंद थाना ऐसा है जहां एक भी महिला पुलिसकर्मी नहीं है।
एफआईआर नंबर 1 में जिस गड़बड़ी की बात कही जा रही है, वह केवल टाइपिंग का दोष है। इसे ठीक कर दिया गया है। उनका लक्ष्य थाने में आने वाली हर पीड़ित महिला को न्याय दिलाना है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होगी। पहला मामला पिंकी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने का दर्ज हुआ है। और भी कई शिकायतें मिली हैं, इन पर कार्रवाई तुरंत प्रभाव से शुरू कर दी गई है। - सरोजबाला, प्रथम प्रभारी महिला थाना