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अब फोन पर होगी पैरेंट्स-टीचर मीटिंग

Mon, 20 Jan 2020 01:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jan 2020 01:21 AM IST
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education
अब पैरेंट्स-टीचर मीटिंग (पीटीएम) फोन पर होगी। शिक्षकों को प्रतिदिन दो से तीन अभिभावकों से फोन पर बात करनी होगी और उन्हें उनके बच्चे के बारे में रिपोर्ट देनी होगी। इसके अलावा बच्चों को प्रगति डायरी बनाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। बता दें कि विभाग की तरफ से स्कूलों में हर महीने में एक बार पैरेंट्स-टीचर का मीटिंग का आयोजन किया जाता है। मगर ज्यादातर बच्चों के अभिभावक इस मीटिंग में नहीं आते। इस वजह से उन्हें अपने बच्चे के प्रदर्शन के बारे में पता नहीं चल पाता।
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दिन में पांच मिनट देने होंगे टेलीफोनिक पीटीएम के लिए
विभाग के अनुसार अध्यापकों को अक्सर यह शिकायत करते हुए पाए गए हैं कि बच्चों के अभिभावक न तो बच्चों पर ध्यान देते हैं और न ही किसी पीटीएम का हिस्सा बनते हैं। इस समस्या के समाधान विभाग ने टेलीफोनिक पीटीएम कराने का फैसला किया है। इसके तहत एक अध्यापक अभिभावकों से फोन के द्वारा जुड़कर बच्चे से संबंधित समस्या का निवारण करे। वह प्रतिदिन दो से तीन अभिभावकों को 3-5 मिनट तक बात कर टेलीफोनिक पीटीएम को सफल बना सकते हैं। इससे अध्यापक और अभिभावक के मध्य एक स्वस्थ दूरी का निर्माण होगा, जिससे बच्चे के सीखने के वातावरण को और ज्यादा स्वस्थ बनाने में सहायता मिल सकेगी।
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कठिन विषयों को प्रगति डायरी में करेंगे नोट
इस पहल के तहत अध्यापक द्वारा एक विद्यार्थी को अपनी प्रगति-डायरी बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस डायरी में विद्यार्थी जिस भी विषय में कोई कठिनाई महसूस करता है या किसी भी पाठ में किसी भी प्रकार की कोई कठिनाई महसूस करता है तो वह उसमें लिखेगा। इसके बाद अपने अध्यापक की सहायता से उस कठिनाई को हल करेगा। इस कार्य द्वारा विद्यार्थी व अध्यापक, दोनों ही मिलकर किसी भी विषय की कठिनाइयों या समस्याओं को आसानी से समझकर समाधान कर सकते हैं। जैसे- सबसे मुश्किल प्रश्नों को बच्चा इस डायरी में लिखकर रख सकता है और अध्यापक उन प्रश्नों को सुलझाने में या समझाने में मदद करे।
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कहानी सुनाकर बनाई जाएगी भाषा पर पकड़
इस पहल के तहत प्रतिदिन प्रार्थना-सभा के समय अध्यापकों या बच्चों द्वारा कहानी को सुनाई जाएगी। उस कहानी को हिंदी से अंग्रेजी या अंग्रेजी से हिंदी में रूपांतरित किया जाएगा। कहानी का रोल प्ले किया जाएगा। इससे बच्चे की भाषा पर पकड़ के साथ-साथ अभिव्यक्ति मजबूत व स्पष्ट होगी। साथ ही बच्चे का बहुमुखी विकास भी होगा।
विभाग की तरफ से इन सुझावों को लागू करने को कहा गया है। मैंने इस बारे में स्कूलों को अवगत करा दिया है। इनसे बच्चों व शिक्षकों दोनों का फायदा होगा।
सतबीर सिंह, बीईईओ, हिसार द्वितीय।
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