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23 साल तक किया नशा, आत्महत्या का भी विचार आया पर आज दूसरों को नशा छोड़ने को प्रेरित कर रहा रविंद्र
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मुनीष कुमार
हिसार। शहर की एक कॉलोनी वासी रविंद्र ने 25 साल की उम्र में ट्रांसपोर्ट में काम करना शुरू किया। उस दौरान वह चालक-परिचालकों की संगत में आया, जो नशा करते थे। धीरे-धीरे उसे भी आदत पड़ गई। मात्र एक साल में ही वह कई तरह के नशे करने लगा और 23 साल तक नशा किया। दो साल पहले वह नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र के डॉक्टरों के संपर्क में आया और नशा छोड़कर दवाइयां लीं। दवाइयों के साथ योग और भक्ति में ध्यान लगाया, जिससे उसने नशे पर न केवल पूरी तरह पार पा लिया, बल्कि आज दूसरों को भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करता है।
अमर उजाला टीम से बातचीत में रविंद्र ने बताया कि ट्रांसपोर्ट पर काम करते समय उसने देखा कि अधिकांश ट्रक चालक-परिचालक नशा करते थे। वह भी उनके साथ नशा करने लगा और उसका आदी हो गया। एक समय ऐसा भी आया कि उसके मन में आत्महत्या तक का विचार आया। आज उसकी उम्र 50 साल है और उसे नशा छोड़े लगभग दो साल हो गए हैं। एक साल से दवाइयां भी बंद हैं और सुबह शाम योग व भक्ति कर अपने नशे की लत पर पूरी तरह काबू पा लिया है। रविंद्र के अनुसार वह किसी को भी नशा करते देखता है तो उसका नशा छुड़वाने का प्रयास करता है। पहले उसे नशा छोड़ने के लिए राजी करता है और फिर उसे नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र के चिकित्सकों के पास लेकर जाता है।
लाखों रुपये भी खर्च किए
रविंद्र ने बताया कि नशे की लत के चलते उसका शरीर काफी हद तक खराब हो चुका था। कई बार कई डॉक्टरों से नशा छोड़ने को लेकर संपर्क किया। लाखों रुपये भी खर्च किए। सभी जगह से निराशा हाथ लगी। दो-ढाई साल पहले वह हिसार नागरिक अस्पताल गया। यहां डॉ. विनोद व डॉ. पूनम दहिया से संपर्क हुआ। दोनों डॉक्टरों के मार्गदर्शन के चलते आज वह पूरी तरह नशे से दूर है।
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क्या कहते हैं चिकित्सक
नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र की चिकित्सक डॉ. पूनम दहिया का कहना है कि नशा करने वाला व्यक्ति अगर दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ नशा छोड़ने की ठान ले तो नशा छोड़ना आसान होता है। रविंद्र इसका उदाहरण है। दवाइयों के साथ उसने योग को अपनाया, जिसने उसे नशा छोड़ने में सहायता की। नशा छुड़वाने के लिए जबरदस्ती की बजाय प्यार से काउंसिलिंग करके प्रयास किए जाने चाहिए।
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हिसार। शहर की एक कॉलोनी वासी रविंद्र ने 25 साल की उम्र में ट्रांसपोर्ट में काम करना शुरू किया। उस दौरान वह चालक-परिचालकों की संगत में आया, जो नशा करते थे। धीरे-धीरे उसे भी आदत पड़ गई। मात्र एक साल में ही वह कई तरह के नशे करने लगा और 23 साल तक नशा किया। दो साल पहले वह नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र के डॉक्टरों के संपर्क में आया और नशा छोड़कर दवाइयां लीं। दवाइयों के साथ योग और भक्ति में ध्यान लगाया, जिससे उसने नशे पर न केवल पूरी तरह पार पा लिया, बल्कि आज दूसरों को भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करता है।
अमर उजाला टीम से बातचीत में रविंद्र ने बताया कि ट्रांसपोर्ट पर काम करते समय उसने देखा कि अधिकांश ट्रक चालक-परिचालक नशा करते थे। वह भी उनके साथ नशा करने लगा और उसका आदी हो गया। एक समय ऐसा भी आया कि उसके मन में आत्महत्या तक का विचार आया। आज उसकी उम्र 50 साल है और उसे नशा छोड़े लगभग दो साल हो गए हैं। एक साल से दवाइयां भी बंद हैं और सुबह शाम योग व भक्ति कर अपने नशे की लत पर पूरी तरह काबू पा लिया है। रविंद्र के अनुसार वह किसी को भी नशा करते देखता है तो उसका नशा छुड़वाने का प्रयास करता है। पहले उसे नशा छोड़ने के लिए राजी करता है और फिर उसे नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र के चिकित्सकों के पास लेकर जाता है।
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लाखों रुपये भी खर्च किए
रविंद्र ने बताया कि नशे की लत के चलते उसका शरीर काफी हद तक खराब हो चुका था। कई बार कई डॉक्टरों से नशा छोड़ने को लेकर संपर्क किया। लाखों रुपये भी खर्च किए। सभी जगह से निराशा हाथ लगी। दो-ढाई साल पहले वह हिसार नागरिक अस्पताल गया। यहां डॉ. विनोद व डॉ. पूनम दहिया से संपर्क हुआ। दोनों डॉक्टरों के मार्गदर्शन के चलते आज वह पूरी तरह नशे से दूर है।
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क्या कहते हैं चिकित्सक
नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र की चिकित्सक डॉ. पूनम दहिया का कहना है कि नशा करने वाला व्यक्ति अगर दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ नशा छोड़ने की ठान ले तो नशा छोड़ना आसान होता है। रविंद्र इसका उदाहरण है। दवाइयों के साथ उसने योग को अपनाया, जिसने उसे नशा छोड़ने में सहायता की। नशा छुड़वाने के लिए जबरदस्ती की बजाय प्यार से काउंसिलिंग करके प्रयास किए जाने चाहिए।