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ड्रिप सिंचाई व सौर ऊर्जा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को कम करने में सहायक : प्रो. कांबोज
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।कुलपति प्रो. बीआर कांबोज साथ किसान व अन्य।
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय समन्वित कृषि-मौसम विज्ञान अनुसंधान परियोजना के तहत जलवायु परिवर्तन विषय पर एक दिवसीय किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कृषि मौसम विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम में किसानों को जलवायु परिवर्तन से कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने के उपायों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों से कहा कि वे पौधारोपण, मृदा प्रबंधन, ड्रिप सिंचाई, सौर उर्जा का उपयोग करके कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन से बचा सकते हैं।
कुलपति ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके कारण बाढ़, सूखा, कृषि संकट, खाद्य सुरक्षा और बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है, जिससे फसलों के उत्पादन में भी गिरावट आने की संभावना है। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि होने से वर्षा में भी कमी आ जाती है।
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि वर्षा जल के उचित प्रबंधन, जैविक एवं मिश्रित, कृषि फसल उत्पादन में नई तकनीक का विकास और जलवायु स्मार्ट कृषि के तहत निर्धारित मापदंडों को अपनाकर जलवायु परिवर्तन को कृषि के क्षेत्र में कम किया जा सकता है।
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छात्र कल्याण निदेशक व मौसम विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा जलवायु परिवर्तन को लेकर समय-समय पर किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यशाला में डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. चंद्रशेखर डागर ने भी जलवायु परिवर्तन के बारे में किसानों को विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर कुलसचिव सहित सभी महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, वैज्ञानिक व कर्मचारी उपस्थित रहे।
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कुलपति ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके कारण बाढ़, सूखा, कृषि संकट, खाद्य सुरक्षा और बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है, जिससे फसलों के उत्पादन में भी गिरावट आने की संभावना है। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि होने से वर्षा में भी कमी आ जाती है।
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अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि वर्षा जल के उचित प्रबंधन, जैविक एवं मिश्रित, कृषि फसल उत्पादन में नई तकनीक का विकास और जलवायु स्मार्ट कृषि के तहत निर्धारित मापदंडों को अपनाकर जलवायु परिवर्तन को कृषि के क्षेत्र में कम किया जा सकता है।
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छात्र कल्याण निदेशक व मौसम विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा जलवायु परिवर्तन को लेकर समय-समय पर किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यशाला में डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. चंद्रशेखर डागर ने भी जलवायु परिवर्तन के बारे में किसानों को विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर कुलसचिव सहित सभी महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, वैज्ञानिक व कर्मचारी उपस्थित रहे।