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Hisar News: नशा मुक्ति केंद्र से बदल रही ज़िंदगियां
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हिसार महावीर कॉलोनी के वाटर वर्क्स के बाहर लगाया गया नोटिस बोर्ड। संवाद
हिसार। महाराजा अग्रसेन जिला नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नशा मुक्ति केंद्र संचालित किया जा रहा है। वहां तैनात मनोवैज्ञानिक डॉ. पूनम दहिया की टीम जिलेभर के नशा पीड़ितों और उनके परिजनों की काउंसिलिंग कर रही है। गंभीर मरीजों को आईपीडी (इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। इसकी मदद से कई लोग नशा छोड़कर सामान्य जीवन जीने लगे हैं।
पुलिस और परिजन नशा पीड़ितों को अस्पताल में ला रहे हैं। इनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति का आकलन कर नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। इंजेक्शन से नशा करने वालों की रक्त जांच से एचआईवी वायरस का भी पता लगाया जा रहा है।
इस रोग की पुष्टि होने पर काउंसिलिंग और इलाज कर पंजीकृत आवेदकों को वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। कुछ सुधार होने पर परिजन पीड़ितों को घर ले जा रहे हैं। लेकिन बाहर फिर से कुसंगत के चलते उन्हें कई बार अस्पताल लाने की जरूरत पड़ने लगी है।
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नशे के चंगुल से ऐसे उबरें नशा पीड़ित
धांसू क्षेत्र के निवासी युवक ने बताया कि स्कूल में पढ़ते समय वह गलत संगत के दोस्तों के साथ रहने लगा। उनके साथ शौक पूरे करते हुए वह नशे के दलदल में फंस गया था। कुछ नशेड़ी शुरुआत में सूंघकर नशा कर रहे थे। बाद में इससे जरूरत पूरी न होने पर एक-दूसरे को इंजेक्शन लगाकर मेडिकल और हेरोइन (चिट्टे) का नशा करने लगे। इससे आर्थिक संकट के साथ ही शारीरिक कमजोरी भी होने लगी। पीड़ित और परिवार की खुशहाली छिनने लगी। इससे चिंतित परिजनों ने उसे यहां सरकारी अस्पताल में लाकर इलाज कराया। चिकित्सकों की राय पर पीड़ितों समेत उनके परिजनों ने भी उसकी बेहतर देखभाल की। युवक को लगा कि उसे बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करनी चाहिए थी लेकिन वृद्धावस्था में माता-पिता को अक्षम व्यक्ति की भांति जवान बेटे की देखभाल करनी पड़ रही थी। यह बात उसे नागवार गुजरी। यह विडंबना दिल पर चुभने के कारण उसने कभी नशा न करने का संकल्प लिया और करीब दो साल से वह परिजनों के साथ कृषि कार्य में व्यस्त है।
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पुलिस और परिजन नशा पीड़ितों को अस्पताल में ला रहे हैं। इनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति का आकलन कर नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। इंजेक्शन से नशा करने वालों की रक्त जांच से एचआईवी वायरस का भी पता लगाया जा रहा है।
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इस रोग की पुष्टि होने पर काउंसिलिंग और इलाज कर पंजीकृत आवेदकों को वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। कुछ सुधार होने पर परिजन पीड़ितों को घर ले जा रहे हैं। लेकिन बाहर फिर से कुसंगत के चलते उन्हें कई बार अस्पताल लाने की जरूरत पड़ने लगी है।
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नशे के चंगुल से ऐसे उबरें नशा पीड़ित
धांसू क्षेत्र के निवासी युवक ने बताया कि स्कूल में पढ़ते समय वह गलत संगत के दोस्तों के साथ रहने लगा। उनके साथ शौक पूरे करते हुए वह नशे के दलदल में फंस गया था। कुछ नशेड़ी शुरुआत में सूंघकर नशा कर रहे थे। बाद में इससे जरूरत पूरी न होने पर एक-दूसरे को इंजेक्शन लगाकर मेडिकल और हेरोइन (चिट्टे) का नशा करने लगे। इससे आर्थिक संकट के साथ ही शारीरिक कमजोरी भी होने लगी। पीड़ित और परिवार की खुशहाली छिनने लगी। इससे चिंतित परिजनों ने उसे यहां सरकारी अस्पताल में लाकर इलाज कराया। चिकित्सकों की राय पर पीड़ितों समेत उनके परिजनों ने भी उसकी बेहतर देखभाल की। युवक को लगा कि उसे बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करनी चाहिए थी लेकिन वृद्धावस्था में माता-पिता को अक्षम व्यक्ति की भांति जवान बेटे की देखभाल करनी पड़ रही थी। यह बात उसे नागवार गुजरी। यह विडंबना दिल पर चुभने के कारण उसने कभी नशा न करने का संकल्प लिया और करीब दो साल से वह परिजनों के साथ कृषि कार्य में व्यस्त है।

हिसार महावीर कॉलोनी के वाटर वर्क्स के बाहर लगाया गया नोटिस बोर्ड। संवाद