{"_id":"6785693514600136e2030cba","slug":"despite-the-release-of-budget-the-id-cards-could-not-be-made-hisar-news-c-21-hsr1020-544179-2025-01-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: सरकारी स्कूलों के 42,937 विद्यार्थियों को आईकार्ड नसीब नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: सरकारी स्कूलों के 42,937 विद्यार्थियों को आईकार्ड नसीब नहीं
Tue, 14 Jan 2025 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 14 Jan 2025 01:10 AM IST
विज्ञापन
हिसार। 2024 का शैक्षणिक सत्र खत्म होने वाला है, लेकिन अभी तक 1 से 5वीं कक्षा में पढ़ने वाले सरकारी स्कूलों के 42,937 विद्यार्थियों को आईकार्ड नसीब नहीं हो पाया है।
हैरानी की बात है कि इसके लिए 9 माह पहले ही 20.27 लाख रुपये का बजट जारी किया जा चुका था। क्योंकि पहले तो जेम पोर्टल नहीं चला, जिस कारण आईकार्ड के टेंंडर तक नहीं लग पाए, लेकिन जब पोर्टल चला तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिस कारण आज तक विद्यार्थियों के हाथ खाली है। कारण है अधिकारियों में इच्छाशक्ति की कमी। जिस कारण अधिकारियों ने विद्यार्थियों के आईकार्ड बनाने में कोई रूचि नहीं दिखाई। आलम यह है कि अब परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। जिसका बहाना बनाकर अब अधिकारी उपरोक्त प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डालने पर तूले हुए हैं। जेम पोर्टल की भूमिका : शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि आईकार्ड से संबंधित जितने भी टेंडर लगाएं जाएंगे वे सभी जेम पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। कारण यह है कि पोर्टल पर अपलोड तमाम जानकारी सीधे तौर पर शिक्षा निदेशालय के पास जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी, लेकिन बीते 120 दिन तक तकनीकी खामियों के कारण जेम पोर्टल ही नहीं चला, जिससे प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही लटक गई।
मौलिक शिक्षा निदेशक ने भी बरती लापरवाही : उपरोक्त प्रोजेक्ट को लेकर सबसे बड़ी लापरवाही मौलिक शिक्षा निदेशक की रही। क्योंकि वे बजट जारी करने के बाद प्रोजेक्ट को भूल गए, जिसके बाद उन्होंने इस मामले को लेकर कोई भी फीडबैक नहीं लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
हैरानी की बात है कि इसके लिए 9 माह पहले ही 20.27 लाख रुपये का बजट जारी किया जा चुका था। क्योंकि पहले तो जेम पोर्टल नहीं चला, जिस कारण आईकार्ड के टेंंडर तक नहीं लग पाए, लेकिन जब पोर्टल चला तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिस कारण आज तक विद्यार्थियों के हाथ खाली है। कारण है अधिकारियों में इच्छाशक्ति की कमी। जिस कारण अधिकारियों ने विद्यार्थियों के आईकार्ड बनाने में कोई रूचि नहीं दिखाई। आलम यह है कि अब परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। जिसका बहाना बनाकर अब अधिकारी उपरोक्त प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डालने पर तूले हुए हैं। जेम पोर्टल की भूमिका : शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि आईकार्ड से संबंधित जितने भी टेंडर लगाएं जाएंगे वे सभी जेम पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। कारण यह है कि पोर्टल पर अपलोड तमाम जानकारी सीधे तौर पर शिक्षा निदेशालय के पास जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी, लेकिन बीते 120 दिन तक तकनीकी खामियों के कारण जेम पोर्टल ही नहीं चला, जिससे प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही लटक गई।
विज्ञापन
मौलिक शिक्षा निदेशक ने भी बरती लापरवाही : उपरोक्त प्रोजेक्ट को लेकर सबसे बड़ी लापरवाही मौलिक शिक्षा निदेशक की रही। क्योंकि वे बजट जारी करने के बाद प्रोजेक्ट को भूल गए, जिसके बाद उन्होंने इस मामले को लेकर कोई भी फीडबैक नहीं लिया।
विज्ञापन