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हिसार में मां की अर्थी को बेटियों ने दिया कंधा: कोई बेटा नहीं, छह बेटियों ने निभाई अंतिम संस्कार की सभी रस्में
Tue, 03 Dec 2024 10:51 PM IST
अंकेश ठाकुर
संवाद न्यूज़ एजेंसी, बालसमंद
संवाद न्यूज़ एजेंसी, बालसमंद
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Tue, 03 Dec 2024 10:51 PM IST
सार
हरियाणा के हिसार में मां के अंतिम संस्कार में बेटियां शामिल हुईं। बुजुर्ग महिला का कोई बेटा नहीं है और आठ बेटियां हैं। इसलिए छह बेटियों ने मां की अर्थी कंधा दिया और अंतिम संस्कार की सभी रस्में निभाई।
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मां की अर्थी को कंधा देती बेटियां।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
हरियाणा के हिसार में बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उसकी बेटियों ने ही मां की अर्थी को कंधा दिया। मृतक महिला की छह बेटियां मां के अंतिम संस्कार में शामिल हुई। बेटियों ने ही अर्थी को श्मशानघाट पहुंचाया और सभी रस्मों के साथ मां का अंतिम संस्कार किया गया।
हिसार के गांव डोभी में बुजुर्ग महिला के निधन पर उसकी छह बेटियों ने दाह संस्कार पर पहुंचकर अर्थी को कंधा दिया। ग्रामीणों के मुताबिक मृतक महिला के बेटा नहीं है केवल आठ बेटियां है जिसमे से छह जीवित हैं दो की मृत्यु हो चुकी है। सभी बेटियों ने मिलकर मां की अर्थी को कंधा देकर रूढ़ी वादी बेड़ियों को खत्म करने का संदेश समाज को दिया है।
जानकारी के मुताबिक गांव डोभी निवासी 73 वर्षीय हरकोरी का निधन हो गया। बुजुर्ग का कोई बेटा न होने के चलते बेटियों ने मां की अर्थी को कंधा दिया। महिला की मृत्यु होने पर बेटियों ने न केवल खुद को संभाला बल्कि मां के अंतिम संस्कार की सभी रस्मों को निभाया। समाज, गांव एवं आसपास के क्षेत्र को इन बेटियों ने बड़ा संदेश भी दिया है। ऐसा कर अपराजिता नारी का परिचय दिया है। राममूर्ति, सुरती, भनतल, सुगना, सरोज और मैनावती ने अपनी बुजुर्ग मां का अंतिम संस्कार किया।
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हिसार के गांव डोभी में बुजुर्ग महिला के निधन पर उसकी छह बेटियों ने दाह संस्कार पर पहुंचकर अर्थी को कंधा दिया। ग्रामीणों के मुताबिक मृतक महिला के बेटा नहीं है केवल आठ बेटियां है जिसमे से छह जीवित हैं दो की मृत्यु हो चुकी है। सभी बेटियों ने मिलकर मां की अर्थी को कंधा देकर रूढ़ी वादी बेड़ियों को खत्म करने का संदेश समाज को दिया है।
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जानकारी के मुताबिक गांव डोभी निवासी 73 वर्षीय हरकोरी का निधन हो गया। बुजुर्ग का कोई बेटा न होने के चलते बेटियों ने मां की अर्थी को कंधा दिया। महिला की मृत्यु होने पर बेटियों ने न केवल खुद को संभाला बल्कि मां के अंतिम संस्कार की सभी रस्मों को निभाया। समाज, गांव एवं आसपास के क्षेत्र को इन बेटियों ने बड़ा संदेश भी दिया है। ऐसा कर अपराजिता नारी का परिचय दिया है। राममूर्ति, सुरती, भनतल, सुगना, सरोज और मैनावती ने अपनी बुजुर्ग मां का अंतिम संस्कार किया।
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