{"_id":"5b047a224f1c1bd4408b71a9","slug":"81527020066-hisar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"23 घंटे से लघु सचिवालय के गेट पर बैठे मृतक के बेटों समेत 67 लोग गिरफ्तार","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
23 घंटे से लघु सचिवालय के गेट पर बैठे मृतक के बेटों समेत 67 लोग गिरफ्तार
Updated Wed, 23 May 2018 01:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
रावलवास खुर्द गांव के वेदप्रकाश की हत्या के बाकी तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी की मांग को लेकर लघु सचिवालय का गेट बंद किए बैठे मृतक के बेटों समेत 67 लोगों को पुलिस ने मंगलवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। बसों में नई पुलिस लाइन में ले जाया गया। 67 लोगों में से 22 महिलाएं हैं। रावलवास के लोगों ने सोमवार 12 बजे लघु सचिवालय गेट के बाहर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद से गेट बंद था।
रावलवास खुर्द में 17 अप्रैल को वेदप्रकाश की हत्या की गई थी। पुलिस ने दो आरोपी गिरफ्तार किए हैं। बाद में मृतक के परिजन और परिचित लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ गए। सोमवार को काफी संख्या में लोग धरने पर बैठे लोगों के पक्ष में आए। सोमवार को मीटिंग लेने आए जन स्वास्थ्य मंत्री बनवारी लाल धरना दे रहे लोगों से बिना मिले दूसरे रास्ते से निकल गए। इस बात से धरने पर बैठ लोग बिफर गए थे। मेन गेट से अंदर जाने लगे थे। यह देखकर पुलिस ने गेट बंद कर दिया था। लोग गेट के आगे दरी बिछाकर बैठ गए थे। इससे गेट से लोगों की आवाजाही बंद हो गई थी। तीन प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार उनसे बात की। प्रदर्शनकारी डीसी के धरनास्थल पर आने की बात को लेकर अड़े रहे। डीसी खुद नहीं आए थे। प्रदर्शनकारी रातभर गेट के सामने ही डेरा डाले रहे।
डीसी के बुलाने पर नहीं गए अंदर, बाद में किए गिरफ्तार
मंगलवार सुबह दस बजे डीसी अशोक मीणा ने गेट के आगे धरने पर बैठे लोगों को बातचीत के लिए बुलाया। पीए ने मैसेज कमेटी को दिया। कमेटी के सदस्यों ने कहा कि जब तक डीसी आकर बात नहीं करते, तब तक वे गेट के आगे से नहीं उठेंगे। कुछ देर बाद तहसीलदार विनय ने धरना दे रहे लोगों को चेतावनी देकर कहा कि दस मिनट के अंदर रास्ता नहीं खोला गया तो कार्रवाई की जाएगी। चेतावनी को भी धरने पर बैठे लोगों ने नजरअंदाज कर दिया। उसके बाद पुलिस ने रास्ता रोककर बैठे लोगों को उठाया और उनको बसों में पुलिस लाइन में ले गए।
विज्ञापन
पुलिस लाइन में कराई मेडिकल जांच
पुलिस मृतक के बेटे अशोक, गोबिंद, बेटी मीना समेत 67 लोगों को सीआरपीसी की धारा 107 व 151 के तहत गिरफ्तार कर नई पुलिस लाइन मेें ले गई। पुलिस ने सिविल अस्पताल की टीम नई पुलिस लाइन में बुला ली। वहां उनकी मेडिकल जांच हुई। इन 67 लोगों में प्रदर्शन में अग्रणी रहे देेवीदास जींद और मनोज माजरा प्याऊ शामिल हैं।
जारी रहा विरोध...
बस में बिठाने के बावजूद नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शनकारियों ने बस में बैठने से आनाकानी की तो पुलिस ने सख्ती बरतते हुए सभी को अंदर बैठाया। इस धरने से जुड़े कुछ लोग मंगलवार को भी लघु सचिवालय धरनास्थल के करीब बैठे रहे। टेंट और अन्य सामान कब्जे में ले लिया। यह सामान ट्रैक्टर-ट्रॉली और ऑटो रिक्शा में लादकर थाने में ले जाया गया।
तहसीलदार ने देर शाम दी जमानत
पुलिस ने सभी आरोपियों को 107/151 के तहत गिरफ्तार किया गया था। मंगलवार को तहसीलदार विनय चौधरी ने आरोपियों की जमानत स्वीकार कर ली, जिसके बाद सभी आरोपियों को रिहा कर दिया गया। सोमवार दोपहर बाद से लघु सचिवालय का मेन गेट बंद था, जिसके चलते डीसी, एडीसी, एसडीएम सहित अन्य अधिकारी वैकल्पिक रास्ते से निकले थे। मंगलवार को अधिकारियों-कर्मचारियों को अपने कार्यालय जाने के लिए इस वैकल्पिक रास्ते को अपनाना पड़ा था।
विज्ञापन
हिसार।
रावलवास खुर्द गांव के वेदप्रकाश की हत्या के बाकी तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी की मांग को लेकर लघु सचिवालय का गेट बंद किए बैठे मृतक के बेटों समेत 67 लोगों को पुलिस ने मंगलवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। बसों में नई पुलिस लाइन में ले जाया गया। 67 लोगों में से 22 महिलाएं हैं। रावलवास के लोगों ने सोमवार 12 बजे लघु सचिवालय गेट के बाहर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद से गेट बंद था।
रावलवास खुर्द में 17 अप्रैल को वेदप्रकाश की हत्या की गई थी। पुलिस ने दो आरोपी गिरफ्तार किए हैं। बाद में मृतक के परिजन और परिचित लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ गए। सोमवार को काफी संख्या में लोग धरने पर बैठे लोगों के पक्ष में आए। सोमवार को मीटिंग लेने आए जन स्वास्थ्य मंत्री बनवारी लाल धरना दे रहे लोगों से बिना मिले दूसरे रास्ते से निकल गए। इस बात से धरने पर बैठ लोग बिफर गए थे। मेन गेट से अंदर जाने लगे थे। यह देखकर पुलिस ने गेट बंद कर दिया था। लोग गेट के आगे दरी बिछाकर बैठ गए थे। इससे गेट से लोगों की आवाजाही बंद हो गई थी। तीन प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार उनसे बात की। प्रदर्शनकारी डीसी के धरनास्थल पर आने की बात को लेकर अड़े रहे। डीसी खुद नहीं आए थे। प्रदर्शनकारी रातभर गेट के सामने ही डेरा डाले रहे।
विज्ञापन
डीसी के बुलाने पर नहीं गए अंदर, बाद में किए गिरफ्तार
मंगलवार सुबह दस बजे डीसी अशोक मीणा ने गेट के आगे धरने पर बैठे लोगों को बातचीत के लिए बुलाया। पीए ने मैसेज कमेटी को दिया। कमेटी के सदस्यों ने कहा कि जब तक डीसी आकर बात नहीं करते, तब तक वे गेट के आगे से नहीं उठेंगे। कुछ देर बाद तहसीलदार विनय ने धरना दे रहे लोगों को चेतावनी देकर कहा कि दस मिनट के अंदर रास्ता नहीं खोला गया तो कार्रवाई की जाएगी। चेतावनी को भी धरने पर बैठे लोगों ने नजरअंदाज कर दिया। उसके बाद पुलिस ने रास्ता रोककर बैठे लोगों को उठाया और उनको बसों में पुलिस लाइन में ले गए।
विज्ञापन
पुलिस लाइन में कराई मेडिकल जांच
पुलिस मृतक के बेटे अशोक, गोबिंद, बेटी मीना समेत 67 लोगों को सीआरपीसी की धारा 107 व 151 के तहत गिरफ्तार कर नई पुलिस लाइन मेें ले गई। पुलिस ने सिविल अस्पताल की टीम नई पुलिस लाइन में बुला ली। वहां उनकी मेडिकल जांच हुई। इन 67 लोगों में प्रदर्शन में अग्रणी रहे देेवीदास जींद और मनोज माजरा प्याऊ शामिल हैं।
जारी रहा विरोध...
बस में बिठाने के बावजूद नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शनकारियों ने बस में बैठने से आनाकानी की तो पुलिस ने सख्ती बरतते हुए सभी को अंदर बैठाया। इस धरने से जुड़े कुछ लोग मंगलवार को भी लघु सचिवालय धरनास्थल के करीब बैठे रहे। टेंट और अन्य सामान कब्जे में ले लिया। यह सामान ट्रैक्टर-ट्रॉली और ऑटो रिक्शा में लादकर थाने में ले जाया गया।
तहसीलदार ने देर शाम दी जमानत
पुलिस ने सभी आरोपियों को 107/151 के तहत गिरफ्तार किया गया था। मंगलवार को तहसीलदार विनय चौधरी ने आरोपियों की जमानत स्वीकार कर ली, जिसके बाद सभी आरोपियों को रिहा कर दिया गया। सोमवार दोपहर बाद से लघु सचिवालय का मेन गेट बंद था, जिसके चलते डीसी, एडीसी, एसडीएम सहित अन्य अधिकारी वैकल्पिक रास्ते से निकले थे। मंगलवार को अधिकारियों-कर्मचारियों को अपने कार्यालय जाने के लिए इस वैकल्पिक रास्ते को अपनाना पड़ा था।