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महिला का गलत इलाज करने पर दो अस्पताल व डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज
Updated Wed, 26 Sep 2018 01:30 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। किडनी पेशेंट महिला का गलत इलाज करने से कोर्ट के आदेेश पर दो अस्पताल व एक एमडी डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया के आदेश पर ऋषि नगर स्थित कार्तिक अस्पताल, सेवक सभा अस्पताल व कार्तिक अस्पताल के संचालक डॉ. अरविंद गुप्ता के खिलाफ धारा 302, 304, 337, 338, 418, 440 व एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।
इस बारे में टिब्बा दानाशेर निवासी वकील घीसाराम ने बताया कि उनकी पत्नी सुनहरी देवी कुछ समय से किडनी की बीमारी से ग्रस्त थी। उनकी पत्नी को आठ अक्तूबर 2015 को चेकअप के लिए कार्तिक अस्पताल ले जाया गया। यहां पर डॉ. अरविंद गुप्ता ने चेकअप के बाद उनको सेवक सभा अस्पताल में दाखिल कर लिया। वहां पर एडमिट करने के बाद डॉक्टर ने उनका इलाज शुरू कर दिया। आरोप के अनुसार डॉ. ने किडनी पेशेंट के जरूरी टेस्ट भी नहीं करवाए। इसके अलावा यह भी चेक नहीं किया कि उनकी कितनी प्रतिशत किडनी डैमेज हो चुकी है। डॉक्टर ने बिना परिजनों की अनुमति के उनका डायलिसिस कर दिया। उनको अस्पताल में तीन से चार बार एडमिट करवाया गया और डॉक्टर ने उनका हर बार डायलिसिस किया। डायलिसिस करने से उनकी पत्नी को आराम मिलने के बजाय दर्द ज्यादा बढ़ता चला गया और 22 नवंबर 2015 को उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने उनके जरूरी मेडिकल कागजात इकट्ठा करके इस बारे में 26 अक्तूबर 2017 को डॉक्टर के खिलाफ मरीज का लापरवाही से इलाज करने की शिकायत सिटी थाना पुलिस को दी।
मेडिकल बोर्ड में नहीं था किडनी स्पेशलिस्ट डॉक्टर
इस बारे में शिकायतकर्ता ने बताया कि पुलिस को शिकायत देने के बाद इस बारे में एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि डायलिसिस करने से पहले परिजनों की अनुमति नहीं ली गई थी। डॉक्टर ने मरीज का इलाज सही तरीके से किया था। जब उन्होंने मेडिकल बोर्ड के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि इसमें कोई भी किडनी रोग स्पेशलिस्ट डॉक्टर को शामिल ही नहीं किया गया था। जब बोर्ड में कोई स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही नहीं था तो यह बात अपनी रिपोर्ट में कैसे बता दी कि इलाज सही तरीके से किया गया है। इसके बाद उन्होंने इस बारे में कोर्ट में इस्तगासा दायर कर दिया।
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कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज
पुलिस द्वारा मामला दर्ज नहीं करने पर उन्होंने इस बारे में कोर्ट में 11 सितंबर 2018 को इस्तगासा दायर कर दिया। कोर्ट ने मामले पर 20 सितंबर को सुनवाई करते हुए आरोपी डॉ. अरविंद गुप्ता, कार्तिक अस्पताल व सेवक सभा अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश जारी किए। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। केस की जांच डीएसपी दलजीत सिंह कर रहे हैं।
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हिसार। किडनी पेशेंट महिला का गलत इलाज करने से कोर्ट के आदेेश पर दो अस्पताल व एक एमडी डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया के आदेश पर ऋषि नगर स्थित कार्तिक अस्पताल, सेवक सभा अस्पताल व कार्तिक अस्पताल के संचालक डॉ. अरविंद गुप्ता के खिलाफ धारा 302, 304, 337, 338, 418, 440 व एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।
इस बारे में टिब्बा दानाशेर निवासी वकील घीसाराम ने बताया कि उनकी पत्नी सुनहरी देवी कुछ समय से किडनी की बीमारी से ग्रस्त थी। उनकी पत्नी को आठ अक्तूबर 2015 को चेकअप के लिए कार्तिक अस्पताल ले जाया गया। यहां पर डॉ. अरविंद गुप्ता ने चेकअप के बाद उनको सेवक सभा अस्पताल में दाखिल कर लिया। वहां पर एडमिट करने के बाद डॉक्टर ने उनका इलाज शुरू कर दिया। आरोप के अनुसार डॉ. ने किडनी पेशेंट के जरूरी टेस्ट भी नहीं करवाए। इसके अलावा यह भी चेक नहीं किया कि उनकी कितनी प्रतिशत किडनी डैमेज हो चुकी है। डॉक्टर ने बिना परिजनों की अनुमति के उनका डायलिसिस कर दिया। उनको अस्पताल में तीन से चार बार एडमिट करवाया गया और डॉक्टर ने उनका हर बार डायलिसिस किया। डायलिसिस करने से उनकी पत्नी को आराम मिलने के बजाय दर्द ज्यादा बढ़ता चला गया और 22 नवंबर 2015 को उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने उनके जरूरी मेडिकल कागजात इकट्ठा करके इस बारे में 26 अक्तूबर 2017 को डॉक्टर के खिलाफ मरीज का लापरवाही से इलाज करने की शिकायत सिटी थाना पुलिस को दी।
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मेडिकल बोर्ड में नहीं था किडनी स्पेशलिस्ट डॉक्टर
इस बारे में शिकायतकर्ता ने बताया कि पुलिस को शिकायत देने के बाद इस बारे में एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि डायलिसिस करने से पहले परिजनों की अनुमति नहीं ली गई थी। डॉक्टर ने मरीज का इलाज सही तरीके से किया था। जब उन्होंने मेडिकल बोर्ड के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि इसमें कोई भी किडनी रोग स्पेशलिस्ट डॉक्टर को शामिल ही नहीं किया गया था। जब बोर्ड में कोई स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही नहीं था तो यह बात अपनी रिपोर्ट में कैसे बता दी कि इलाज सही तरीके से किया गया है। इसके बाद उन्होंने इस बारे में कोर्ट में इस्तगासा दायर कर दिया।
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कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज
पुलिस द्वारा मामला दर्ज नहीं करने पर उन्होंने इस बारे में कोर्ट में 11 सितंबर 2018 को इस्तगासा दायर कर दिया। कोर्ट ने मामले पर 20 सितंबर को सुनवाई करते हुए आरोपी डॉ. अरविंद गुप्ता, कार्तिक अस्पताल व सेवक सभा अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश जारी किए। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। केस की जांच डीएसपी दलजीत सिंह कर रहे हैं।