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जेल में मां के साथ बच्चों को लॉकअप में न रखने के निर्देश
Updated Wed, 25 Apr 2018 01:17 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
जेल में सजा काट रही महिलाओं के साथ सलाखों के पीछे जीवन बिताने पर मजबूर उनके बेकसूर बच्चों के दिन जल्द बदलेंगे। हरियाणा राज्य बाल संरक्षण आयोग की ओर से प्रदेश के सभी जेल अधीक्षकों को इन बच्चों को प्रतिमाह दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता व अन्य निर्धारित सुविधाएं मुहैया करवाने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग की ओर से इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, भरण-पोषण की योजना का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।
बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने बताया कि काफी बच्चे अपनी माताओं के साथ जेल में जीवन बिताने को मजबूर हैं। ऐसे बच्चे जेल के माहौल में रहते-रहते नकारात्मक विचारधारा का शिकार हो जाते हैं। ऐसे बच्चे न तो अपनी माताओं के अपराध के बारे में जानते हैं और न ही अपने परिवार वालों को पहचानते हैं। कई नाबालिग बच्चे हैं, जिनकी मां जेलों में बंद हैं वे घर या अन्य जगह पर पल रहे हैं। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इनके पालन-पोषण, पढ़ाई और अन्य सुविधाएं मुहैया कराने का बीड़ा उठाया है। आयोग ने जेल विभाग के महानिदेशक को पत्र लिखा है।
बाल संरक्षण आयोग करेगा बच्चों की आर्थिक मदद
इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। चिल्ड्रन इन नीड ऑफ केयर एंड प्रोटेक्शन एक्ट के तहत आने वाले इन बच्चों की आयोग आर्थिक मदद करेगा। इसके तहत ऐसे बच्चों की मदद के लिए हर महीने 2 हजार रुपये देने का प्रावधान है। आयोग की ओर से इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए जेल विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है जिसमें तय होगा कि इन बच्चों को कैसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। आयोग उन बच्चों की सूची तैयार कर रहा है। ऐसे बच्चों को आश्रम और हॉस्टल में भेजने का प्रबंध किया जाएगा। इनका स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे बच्चों से भी संपर्क साधा जाएगा, जो पिता, दादा-दादी या रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई, भरण-पोषण की योजना भी सरकार को भेजी जाएगी।
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जेल अधीक्षकों को गाइड लाइन जारी
सभी जेल अधीक्षकों को गाइडलाइन जारी की गई है। जेल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अपनी मां के साथ जेल में रह रहे बच्चों को लॉकअप में न रखा जाए। जेलों की क्रैच में बच्चों के लिए निर्धारित सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाने को कहा गया है। बच्चों के आधार कार्ड व जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का जिम्मा जेल प्रशासन का होगा। जेलों में बंद बच्चों को वीकली आउटिंग पर भेजा जाएगा। बच्चों की हर महीने काउंसिलिंग भी करवाई जाएगी।
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हिसार।
जेल में सजा काट रही महिलाओं के साथ सलाखों के पीछे जीवन बिताने पर मजबूर उनके बेकसूर बच्चों के दिन जल्द बदलेंगे। हरियाणा राज्य बाल संरक्षण आयोग की ओर से प्रदेश के सभी जेल अधीक्षकों को इन बच्चों को प्रतिमाह दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता व अन्य निर्धारित सुविधाएं मुहैया करवाने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग की ओर से इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, भरण-पोषण की योजना का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।
बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने बताया कि काफी बच्चे अपनी माताओं के साथ जेल में जीवन बिताने को मजबूर हैं। ऐसे बच्चे जेल के माहौल में रहते-रहते नकारात्मक विचारधारा का शिकार हो जाते हैं। ऐसे बच्चे न तो अपनी माताओं के अपराध के बारे में जानते हैं और न ही अपने परिवार वालों को पहचानते हैं। कई नाबालिग बच्चे हैं, जिनकी मां जेलों में बंद हैं वे घर या अन्य जगह पर पल रहे हैं। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इनके पालन-पोषण, पढ़ाई और अन्य सुविधाएं मुहैया कराने का बीड़ा उठाया है। आयोग ने जेल विभाग के महानिदेशक को पत्र लिखा है।
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बाल संरक्षण आयोग करेगा बच्चों की आर्थिक मदद
इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। चिल्ड्रन इन नीड ऑफ केयर एंड प्रोटेक्शन एक्ट के तहत आने वाले इन बच्चों की आयोग आर्थिक मदद करेगा। इसके तहत ऐसे बच्चों की मदद के लिए हर महीने 2 हजार रुपये देने का प्रावधान है। आयोग की ओर से इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए जेल विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है जिसमें तय होगा कि इन बच्चों को कैसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। आयोग उन बच्चों की सूची तैयार कर रहा है। ऐसे बच्चों को आश्रम और हॉस्टल में भेजने का प्रबंध किया जाएगा। इनका स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे बच्चों से भी संपर्क साधा जाएगा, जो पिता, दादा-दादी या रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई, भरण-पोषण की योजना भी सरकार को भेजी जाएगी।
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जेल अधीक्षकों को गाइड लाइन जारी
सभी जेल अधीक्षकों को गाइडलाइन जारी की गई है। जेल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अपनी मां के साथ जेल में रह रहे बच्चों को लॉकअप में न रखा जाए। जेलों की क्रैच में बच्चों के लिए निर्धारित सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाने को कहा गया है। बच्चों के आधार कार्ड व जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का जिम्मा जेल प्रशासन का होगा। जेलों में बंद बच्चों को वीकली आउटिंग पर भेजा जाएगा। बच्चों की हर महीने काउंसिलिंग भी करवाई जाएगी।