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शव रखकर बैठे भगाना के पीड़ितों को हल्का बल प्रयोग कर पुलिस ने लिया हिरासत में
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हिसार। लघु सचिवालय के बाहर पिछले 12 दिनों से शव रखकर धरने पर बैठे भगाना के लोगों को रविवार को पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर हिरासत में ले लिया। शव को ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं एडीसी अमरजीत सिंह मान, एसडीएम परमजीत सिंह चहल सहित कई अन्य प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस बल की मौजूदगी में भगाना गांव में मृतक के परिजनों और पंचायत को सौंप दिया। देर शाम शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मामले के अनुसार स्थायी रैन बसेरे की मांग को लेकर लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे भगाना के अनुसूचित जाति के लोगों में से 55 वर्षीय राजबीर पेंटर की 17 अप्रैल को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। मांगें पूरी होने तक धरनारत लोगों ने शव का अंतिम संस्कार नहीं करने की मांग पर अड़े थे। चुनाव आचार संहिता के मद्देनजर और शव में किसी तरह के संक्रमण की दिक्कत के चलते जिला प्रशासन ने सीएमओ को शव की जांच के आदेश दिए थे। रविवार को सीएमओ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान एहतियात के तौर पर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। डॉक्टरों की टीम ने 12 दिन से रखे शव से संक्रमण फैलने का खतरा बताया। इसके बाद मौके पर मौजूद एडीसी, एसडीएम व अन्य अधिकारियों ने धरने पर बैठे लोगों से शव का दाह संस्कार किए जाने को लेकर बात की, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर मौके पर मौजूद धरनारत 94 पुरुषों और 32 महिलाओं को हिरासत में ले लिया। सभी को हिरासत में लेकर सदर थाने ले जाया गया। वहीं देर रात सभी को रिहा कर दिया गया।
शव को प्रशासन पुलिस बल के साथ गांव छोड़कर आया
धरनारत लोगों को हिरासत में लेने के बाद राजबीर के शव को पुलिस सुरक्षा में भगाना गांव ले जाया गया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा भारी पुलिस बल भी साथ था। गांव में मृतक के परिजनों और सरपंच शक्ति सिंह को शव सौंप दिया गया। इसके बाद गांव के श्मशानघाट में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान पुलिस बल और अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
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सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज
पुलिस ने इस मामले में हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में शांति भंग करने के आरोप में केस दर्ज किया है। प्रवक्ता के अनुसार हिरासत में लिए गए सभी 94 पुरुषों और 33 महिलाओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 107/51 के तहत केस दर्ज किया गया है।
ये था मामला
मई 2012 में भगाना गांव में एक मकान के आगे दीवार बनाकर रास्ता बंद करने को लेकर अनुसूचित जाति और सवर्णों में विवाद हो गया था। इसके चलते 21 मई 2012 को गांव से करीब सवा 200 परिवार पलायन करके हिसार आ गए थे और लघु सचिवालय के बाहर डेरा डालकर धरना शुरू कर दिया था। उसके बाद कुछ परिवार गांव लौट गए थे, जबकि कुछ परिवार तब से यहीं बैठे हुए थे।
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मामले के अनुसार स्थायी रैन बसेरे की मांग को लेकर लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे भगाना के अनुसूचित जाति के लोगों में से 55 वर्षीय राजबीर पेंटर की 17 अप्रैल को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। मांगें पूरी होने तक धरनारत लोगों ने शव का अंतिम संस्कार नहीं करने की मांग पर अड़े थे। चुनाव आचार संहिता के मद्देनजर और शव में किसी तरह के संक्रमण की दिक्कत के चलते जिला प्रशासन ने सीएमओ को शव की जांच के आदेश दिए थे। रविवार को सीएमओ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान एहतियात के तौर पर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। डॉक्टरों की टीम ने 12 दिन से रखे शव से संक्रमण फैलने का खतरा बताया। इसके बाद मौके पर मौजूद एडीसी, एसडीएम व अन्य अधिकारियों ने धरने पर बैठे लोगों से शव का दाह संस्कार किए जाने को लेकर बात की, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर मौके पर मौजूद धरनारत 94 पुरुषों और 32 महिलाओं को हिरासत में ले लिया। सभी को हिरासत में लेकर सदर थाने ले जाया गया। वहीं देर रात सभी को रिहा कर दिया गया।
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शव को प्रशासन पुलिस बल के साथ गांव छोड़कर आया
धरनारत लोगों को हिरासत में लेने के बाद राजबीर के शव को पुलिस सुरक्षा में भगाना गांव ले जाया गया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा भारी पुलिस बल भी साथ था। गांव में मृतक के परिजनों और सरपंच शक्ति सिंह को शव सौंप दिया गया। इसके बाद गांव के श्मशानघाट में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान पुलिस बल और अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
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सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज
पुलिस ने इस मामले में हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में शांति भंग करने के आरोप में केस दर्ज किया है। प्रवक्ता के अनुसार हिरासत में लिए गए सभी 94 पुरुषों और 33 महिलाओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 107/51 के तहत केस दर्ज किया गया है।
ये था मामला
मई 2012 में भगाना गांव में एक मकान के आगे दीवार बनाकर रास्ता बंद करने को लेकर अनुसूचित जाति और सवर्णों में विवाद हो गया था। इसके चलते 21 मई 2012 को गांव से करीब सवा 200 परिवार पलायन करके हिसार आ गए थे और लघु सचिवालय के बाहर डेरा डालकर धरना शुरू कर दिया था। उसके बाद कुछ परिवार गांव लौट गए थे, जबकि कुछ परिवार तब से यहीं बैठे हुए थे।