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Hisar News: सफाई व्यवस्था को लेकर पार्षद भी नाराज, बोले ठेका देने के बाद भी नहीं हो रहा कचरे का उठान
Tue, 20 May 2025 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 20 May 2025 12:05 AM IST
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हांसी के तिकोना पार्क पर लगे कचरे के ढेर दिखाते पार्षद।
हांसी। शहर में सफाई व्यवस्था फिर से बिगड़ चुकी है। सफाई व्यवस्था के विरोध में अब पार्षद भी उतर आए हैं। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था के लिए 2.34 करोड़ रुपये का टेंडर दिया हुआ है। वहीं 40 लाख रुपये की लागत से नई जेसीबी मशीन भी खरीदी गई है, लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है।
पार्षद कृष्ण सैनी, पार्षद दुलीचंद व पार्षद प्रवीन वाल्मीकि ने सोमवार को तिकोना पार्क पर लगे कचरे के ढेर दिखाए। उन्होंने कहा कि वह बिगड़ी सफाई व्यवस्था को लेकर नगर परिषद के अधिकारियों से शिकायत कर जांच करने की मांग की है। साथ ही ठेकेदार का भुगतान रोकने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था पर नगर परिषद करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
इसके अलावा नगर परिषद की टिप्पर व जेसीबी का ठेकेदार इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके अनुसार इस बारे में नगर परिषद के अधिकारियों को भी जानकारी है। ठेकेदार के टिप्पर उपयोग करने से घरों से नियमित उठान नहीं हो रहा है। जिससे आमजन परेशान हो रहे हैं। वहीं घरों से नियमित उठान न होने के कारण आमजन बाहर सड़कों किनारे कचरा फेंक रहे हैं, लेकिन सड़कों किनारे भी नियमित कचरा नहीं उठा रहा है। उन्होंने बताया कि करीब तीन महीने पहले 2.34 करोड़ रुपये की लागत से जींद की फर्म को टेंडर दिया था। लेकिन फर्म ने कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दिया। इसमें कई कर्मचारी काम छोड़ भी चुके हैं।
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पार्षद कृष्ण सैनी, पार्षद दुलीचंद व पार्षद प्रवीन वाल्मीकि ने सोमवार को तिकोना पार्क पर लगे कचरे के ढेर दिखाए। उन्होंने कहा कि वह बिगड़ी सफाई व्यवस्था को लेकर नगर परिषद के अधिकारियों से शिकायत कर जांच करने की मांग की है। साथ ही ठेकेदार का भुगतान रोकने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था पर नगर परिषद करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
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इसके अलावा नगर परिषद की टिप्पर व जेसीबी का ठेकेदार इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके अनुसार इस बारे में नगर परिषद के अधिकारियों को भी जानकारी है। ठेकेदार के टिप्पर उपयोग करने से घरों से नियमित उठान नहीं हो रहा है। जिससे आमजन परेशान हो रहे हैं। वहीं घरों से नियमित उठान न होने के कारण आमजन बाहर सड़कों किनारे कचरा फेंक रहे हैं, लेकिन सड़कों किनारे भी नियमित कचरा नहीं उठा रहा है। उन्होंने बताया कि करीब तीन महीने पहले 2.34 करोड़ रुपये की लागत से जींद की फर्म को टेंडर दिया था। लेकिन फर्म ने कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दिया। इसमें कई कर्मचारी काम छोड़ भी चुके हैं।
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