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Hisar News: गंदगी कायम...दावे साफ
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कैंप चौक पुल के पास लगे गंदगी के ढेर।
हिसार। आज दुनिभर में स्वच्छता दिवस मनाया जा रहा रहा है लेकिन शहर की गलियों में बिखरी गंदगी दावों को हकीकत का आईना दिखा रही है। हड़ताली सफाईकर्मियों के काम पर लौटने के सात दिन बाद भी सड़कों पर गंदगी कायम है और सफाई के दावे साफ यानी झूठे और बेमानी नजर आ रहे हैं। सड़कों पर कचरा फेंकने की लोगों की आदत भी शहर के सुंदरीकरण की राह में बड़ी चुनौती है।
6000 टन को हटाने की चुनौती के सामने अब तक महज 3200 टन की ही उठान हो सकी है। मुख्य मार्गों से लेकर रिहायशी इलाकों तक फैले कचरे और सड़ांध मारते सीवरेज के गंदे पानी ने राहगीरों और स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है।
सफाईकर्मियों की दो बार की 52 दिन की हड़ताल के दौरान शहर में लंबे समय तक गंदगी का दौर चला। 37 दिन लंबी चली हड़ताल खत्म होने के बाद नगर निगम अधिकारियों और सफाई कर्मियों ने एक सप्ताह में शहर को चकाचक करने का भरोसा दिया था। इसी दावे की जमीनी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला टीम ने शनिवार को शहर के कई हिस्सों का जायजा लिया।
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जगह-जगह कचरे के लगे ढेर, बदबू बढ़ा रही परेशानी
पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र में कचरा सड़ रहा है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी भर गया है और कचरे के पास पानी जमा होने से भीषण बदबू फैल रही है। बेसहारा गोवंश और कुत्ते गंदगी में घूमते नजर आए। डोगरान मोहल्ला में भी सड़कों पर लंबे समय से पड़ा कचरा नहीं उठाया गया है। यहां झाड़ू लगाने की व्यवस्था भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हुई है। कैंप चौक के पास आरओबी के लंबे हिस्से में कचरा फैला है। रोज हजारों लोग यहां से गुजरते हैं। बारिश के बाद दुर्गंध से परेशानी बढ़ गई है। दिल्ली रोड पर कृष्णा नगर के पास भी कचरे के ढेर लगे हैं। यहां कई बड़े शोरूम और सामने पीएलए मार्केट है जहां प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है।
एस्टोनिया से वर्ष 2008 में हुई स्वच्छता दिवस मनाने की शुरुआत :
विश्व स्वच्छता दिवस का उद्देश्य लोगों को स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इसकी शुरुआत 2008 में यूरोपियन देश एस्टोनिया के लेट्स टू इट अभियान से हुई तब करीब 50 हजार लोगों ने एक दिन में देश से कचरा हटाया। इसके बाद यह पहल भारत सहित दुनिया के कई देशों तक पहुंची।
लंबी हड़ताल के बाद करीब 6500 से 7000 हजार टन कचरा एकत्र हो गया था। इसे उठाने के लिए हमारी टीम लगातार काम कर रही हैं। जल्द उठान के लिए शुक्रवार को बैठक कर विशेष योजना बनाई थी। इस सप्ताह शहर का हर हिस्सा साफ-स्वच्छ नजर आएगा।
डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त, हिसार
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6000 टन को हटाने की चुनौती के सामने अब तक महज 3200 टन की ही उठान हो सकी है। मुख्य मार्गों से लेकर रिहायशी इलाकों तक फैले कचरे और सड़ांध मारते सीवरेज के गंदे पानी ने राहगीरों और स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है।
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सफाईकर्मियों की दो बार की 52 दिन की हड़ताल के दौरान शहर में लंबे समय तक गंदगी का दौर चला। 37 दिन लंबी चली हड़ताल खत्म होने के बाद नगर निगम अधिकारियों और सफाई कर्मियों ने एक सप्ताह में शहर को चकाचक करने का भरोसा दिया था। इसी दावे की जमीनी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला टीम ने शनिवार को शहर के कई हिस्सों का जायजा लिया।
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जगह-जगह कचरे के लगे ढेर, बदबू बढ़ा रही परेशानी
पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र में कचरा सड़ रहा है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी भर गया है और कचरे के पास पानी जमा होने से भीषण बदबू फैल रही है। बेसहारा गोवंश और कुत्ते गंदगी में घूमते नजर आए। डोगरान मोहल्ला में भी सड़कों पर लंबे समय से पड़ा कचरा नहीं उठाया गया है। यहां झाड़ू लगाने की व्यवस्था भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हुई है। कैंप चौक के पास आरओबी के लंबे हिस्से में कचरा फैला है। रोज हजारों लोग यहां से गुजरते हैं। बारिश के बाद दुर्गंध से परेशानी बढ़ गई है। दिल्ली रोड पर कृष्णा नगर के पास भी कचरे के ढेर लगे हैं। यहां कई बड़े शोरूम और सामने पीएलए मार्केट है जहां प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है।
एस्टोनिया से वर्ष 2008 में हुई स्वच्छता दिवस मनाने की शुरुआत :
विश्व स्वच्छता दिवस का उद्देश्य लोगों को स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इसकी शुरुआत 2008 में यूरोपियन देश एस्टोनिया के लेट्स टू इट अभियान से हुई तब करीब 50 हजार लोगों ने एक दिन में देश से कचरा हटाया। इसके बाद यह पहल भारत सहित दुनिया के कई देशों तक पहुंची।
लंबी हड़ताल के बाद करीब 6500 से 7000 हजार टन कचरा एकत्र हो गया था। इसे उठाने के लिए हमारी टीम लगातार काम कर रही हैं। जल्द उठान के लिए शुक्रवार को बैठक कर विशेष योजना बनाई थी। इस सप्ताह शहर का हर हिस्सा साफ-स्वच्छ नजर आएगा।
डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त, हिसार