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Hisar News: मुर्राह नस्ल का जलवा... छह लाख में बिकी भैंस
Sun, 20 Sep 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 20 Sep 2026 01:30 AM IST
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हांसी। मुर्राह नस्ल की उन्नत और गुणवत्तापूर्ण भैंसों की बढ़ती मांग के बीच शनिवार को गांव भाटला में एक पशुधन की कीमत लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी। यहां पशुपालक बजे सिंह के आंगन की शोभा और प्रतिदिन 21 लीटर दूध देने वाली भैंस को जींद जिले के ईटल गांव के रत्न सिंह ने 6 लाख रुपये में खरीदा।
बजे सिंह ने बताया कि बेची गई भैंस प्रतिदिन करीब 21 लीटर दूध देती है, जबकि इसकी मां भी लगभग 25 लीटर प्रतिदिन दूध देती थी। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में वह इस प्रकार की चार मुर्राह भैंसें बेच चुके हैं। उनके पास अभी भी कई अच्छी नस्ल की भैंसें और झोटे मौजूद हैं।
भैंस की बिक्री के अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग की पशु चिकित्सक डॉ. रीतू रानी, वीएलडीए अमित यादव, पशु परिचर विनोद कुमार और गांव के अनेक पशुपालक उपस्थित रहे। डॉ. रीतू रानी ने पशुपालकों से मुर्राह नस्ल की विशेषताओं, पशुपालन प्रबंधन और अच्छी नस्ल के पशुओं के आर्थिक महत्व पर चर्चा की।
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उन्नत नस्ल आर्थिक समृद्धि का आधार :
डॉ. रीतू ने कहा कि अच्छी नस्ल के पशुओं का चयन, कृत्रिम गर्भाधान, समय पर टीकाकरण, संतुलित पोषण, नियमित स्वास्थ्य देखभाल और वैज्ञानिक पशु प्रबंधन अपनाकर डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। यह बिक्री गुणवत्तापूर्ण पशुधन के बढ़ते आर्थिक महत्व और उन्नत नस्ल के पशुओं के प्रति पशुपालकों की बढ़ती रुचि को दर्शाती है।
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बजे सिंह ने बताया कि बेची गई भैंस प्रतिदिन करीब 21 लीटर दूध देती है, जबकि इसकी मां भी लगभग 25 लीटर प्रतिदिन दूध देती थी। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में वह इस प्रकार की चार मुर्राह भैंसें बेच चुके हैं। उनके पास अभी भी कई अच्छी नस्ल की भैंसें और झोटे मौजूद हैं।
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भैंस की बिक्री के अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग की पशु चिकित्सक डॉ. रीतू रानी, वीएलडीए अमित यादव, पशु परिचर विनोद कुमार और गांव के अनेक पशुपालक उपस्थित रहे। डॉ. रीतू रानी ने पशुपालकों से मुर्राह नस्ल की विशेषताओं, पशुपालन प्रबंधन और अच्छी नस्ल के पशुओं के आर्थिक महत्व पर चर्चा की।
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उन्नत नस्ल आर्थिक समृद्धि का आधार :
डॉ. रीतू ने कहा कि अच्छी नस्ल के पशुओं का चयन, कृत्रिम गर्भाधान, समय पर टीकाकरण, संतुलित पोषण, नियमित स्वास्थ्य देखभाल और वैज्ञानिक पशु प्रबंधन अपनाकर डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। यह बिक्री गुणवत्तापूर्ण पशुधन के बढ़ते आर्थिक महत्व और उन्नत नस्ल के पशुओं के प्रति पशुपालकों की बढ़ती रुचि को दर्शाती है।