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30 से 50 फीसदी तक महंगी हुईं कॉपी-किताबें
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हिसार। शैक्षणिक सत्र 2022-23 की शुरुआत में अभिभावकों पर महंगाई का दोहरा असर पड़ना शुरू हो गया है। कोरोना महामारी के कारण लोगों के काम धंधे पहले ही मंदे हो चुके हैं। हालात सामान्य होने पर महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ रखी है। कच्ची सब्जियों से लेकर खाने-पीने की वस्तुएं व अन्य रोजमर्रा का सामान महंगा हो गया। अब पुस्तकों व कॉपी की कीमत भी 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वहीं साथ ही निजी स्कूलों ने भी फीस बढ़ा दी है। फीस व पुस्तकों के मूल्यों में बढ़ोतरी होने से अभिभावकों पर दोहरी मार पड़ी है।
जिले के नामी निजी स्कूलों में पहली कक्षा के एक छात्र की पुस्तकों का सेट की कीमत करीब 5 हजार या इससे भी अधिक रुपये बताई जा रही है। वहीं स्थानीय निजी स्कूलों में पहली कक्षा की पुस्तकें 1 हजार से 3 हजार रुपये की आ रही हैं। अभिभावकों को कहना है जब पहली कक्षा की पुस्तकें इतनी महंगी आ रही तो बड़ी कक्षाओं की पुस्तकें 7 से 10 हजार रुपये तक खरीदी जा रही हैं। निजी स्कूल संचालकों द्वारा बढ़ाई गई फीस के कारण आर्थिक रूप से कमजोर व सामान्य परिवार के मुखियाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निजी स्कूल कर रहे मनमानी
शहर के नामी निजी स्कूलों मे अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन स्कूलों ने बगैर जरूरत की पुस्तकों व प्रैक्टिस बुक को अनिवार्य कर रखा है। इसके साथ ही ट्यूशन फीस, वाहन का किराया भी जोड़ा जाता है। अभिभावकों ने कहा कि इन स्कूलों द्वारा हर साल सिलेब्स बदल दिया जाता है। ऐसे में पिछले साल वाली पुस्तकें इस सत्र वाले विद्यार्थियों के काम नहीं आएंगी। अभिभावकों ने ये भी बताया कि इन निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित की गई पुस्तकें एक ही दुकान पर मिलेंगी। ओर वह दुकानदार अपने मनमाने रेट पर बेचेगा।
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इन कारणों से बढ़ी पुस्तकों की कीमतें
पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि सरकार कागज पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है, जिसके कारण कागज महंगा हो गया है। लेबर महंगी हो गई है। ट्रांसपोर्ट की दरें बढ़ गई है। प्रिंटिंग प्रेस पर टैक्स गया है। इस कारण पुस्तकों की कीमत बढ़ी है। पुस्तक विक्रेताओं का तर्क ये भी है कि कोरोना के कारण लगातार दो साल से पुस्तक कारोबार काफी घाटे में चल रहा था। इस कारण भी पब्लिकेशन हाउस ने पुस्तकों की कीमतें बढ़ाई हैं।
पुस्तकों की सूची देख स्कूल बदल रहे अभिभावक
निजी स्कूल संचालकों द्वारा जब अभिभावकों को महंगी पुस्तकों की सूची दी जा रही है तो अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला किसी दूसरे स्कूल में करवाने की सोच रहे हैं। क्योंकि बच्चों के बस्ते का बोझ अभिभावकों की जेब पर पड़ने लगा है। पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि खरीदारी करने पर अभिभावकों को 10 से 15 प्रतिशत की छूट दी जाती है, लेकिन निजी स्कूल संचालक की और से पुस्तकों के सेट पर अभिभावकों को किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलती है।
कॉपी-किताब की कीमतें
प्री नर्सरी/नर्सरी 3 हजार रुपये
पहली से 5वीं कक्षा 4 से साढ़े 5 हजार रुपये।
6वीं से 8वीं कक्षा 5 से 7 हजार रुपये।
9वीं से 10वीं कक्षा 7 से 8 हजार रुपये।
11वीं से 12वीं कक्षा 9 से 11 हजार रुपये।
सामान्यत : स्कूल ड्रेस की कीमत
प्री प्राइमरी 500 से 700 रुपये।
पहली से 5वीं कक्षा 800 से 1000 रुपये।
6वीं से 8वीं कक्षा 1000 से 1800 रुपये।
9वीं से 12वीं कक्षा 2000 से 2500 रुपये।
अभिभावकों व पुस्तक विक्रेताओं से बातचीत
अगर देश की तरक्की करनी है तो शिक्षा व स्वास्थ्य निशुल्क होनी चाहिए। लेकिन हमारे यहां पुस्तकों की कीमत बढ़ रही है व दारू सस्ती हो रही है। गरीब लोगों पर इसका काफी विपरीत असर पड़ा है। मेरे बेटे आरिन की 12वीं कक्षा की पुस्तकें 5 हजार रुपये की आई हैं। - अशोक कुमार, घुड़साल
स्कूलों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षा की पुस्तकों की भी कीमत बढ़ गई। आर्थिक रूप से कमजोर व सामान्य अभिभावक काफी प्रभावित हुए हैं। मेरा मानना है कि पुस्तकों की कीमत नहीं बढ़नी चाहिए। वहीं निजी स्कूलों ने फीस भी बढ़ा दी है। वह गीत याद आ रहा है कि बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई। - विक्रम सहारण, घुड़साल
प्रिंटिंग के लिए कागज महंगा होने व जीएसटी लगने से पुस्तकों के दाम बढ़ गए हैं। ग्राहकों को 30 से 50 प्रतिशत अधिक रुपये देने पड़ रहे हैं। पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ-साथ सामान्य पुस्तकों के रेट भी बढ़ हैं। - प्रेम सागर, पुस्तक विक्रेता
पुस्तकों के करीब 30 से 50 प्रतिशत कीमत बढ़ी है। विभिन्न परीक्षाओं की तैयारियों की पुस्तकों के रेट भी बढ़े हैं। कागज के रेट बढ़ गए हैं व जीएसटी लग रहा है। वहीं ट्रांसपोर्ट व लेबर भी महंगी हो गई है। इस कारण पब्लिकेशन हाउस ने पुस्तकों के रेट में बढ़ोतरी की है। - रामबिलास जिंदल, पुस्तक विक्रेता
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जिले के नामी निजी स्कूलों में पहली कक्षा के एक छात्र की पुस्तकों का सेट की कीमत करीब 5 हजार या इससे भी अधिक रुपये बताई जा रही है। वहीं स्थानीय निजी स्कूलों में पहली कक्षा की पुस्तकें 1 हजार से 3 हजार रुपये की आ रही हैं। अभिभावकों को कहना है जब पहली कक्षा की पुस्तकें इतनी महंगी आ रही तो बड़ी कक्षाओं की पुस्तकें 7 से 10 हजार रुपये तक खरीदी जा रही हैं। निजी स्कूल संचालकों द्वारा बढ़ाई गई फीस के कारण आर्थिक रूप से कमजोर व सामान्य परिवार के मुखियाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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निजी स्कूल कर रहे मनमानी
शहर के नामी निजी स्कूलों मे अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन स्कूलों ने बगैर जरूरत की पुस्तकों व प्रैक्टिस बुक को अनिवार्य कर रखा है। इसके साथ ही ट्यूशन फीस, वाहन का किराया भी जोड़ा जाता है। अभिभावकों ने कहा कि इन स्कूलों द्वारा हर साल सिलेब्स बदल दिया जाता है। ऐसे में पिछले साल वाली पुस्तकें इस सत्र वाले विद्यार्थियों के काम नहीं आएंगी। अभिभावकों ने ये भी बताया कि इन निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित की गई पुस्तकें एक ही दुकान पर मिलेंगी। ओर वह दुकानदार अपने मनमाने रेट पर बेचेगा।
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इन कारणों से बढ़ी पुस्तकों की कीमतें
पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि सरकार कागज पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है, जिसके कारण कागज महंगा हो गया है। लेबर महंगी हो गई है। ट्रांसपोर्ट की दरें बढ़ गई है। प्रिंटिंग प्रेस पर टैक्स गया है। इस कारण पुस्तकों की कीमत बढ़ी है। पुस्तक विक्रेताओं का तर्क ये भी है कि कोरोना के कारण लगातार दो साल से पुस्तक कारोबार काफी घाटे में चल रहा था। इस कारण भी पब्लिकेशन हाउस ने पुस्तकों की कीमतें बढ़ाई हैं।
पुस्तकों की सूची देख स्कूल बदल रहे अभिभावक
निजी स्कूल संचालकों द्वारा जब अभिभावकों को महंगी पुस्तकों की सूची दी जा रही है तो अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला किसी दूसरे स्कूल में करवाने की सोच रहे हैं। क्योंकि बच्चों के बस्ते का बोझ अभिभावकों की जेब पर पड़ने लगा है। पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि खरीदारी करने पर अभिभावकों को 10 से 15 प्रतिशत की छूट दी जाती है, लेकिन निजी स्कूल संचालक की और से पुस्तकों के सेट पर अभिभावकों को किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलती है।
कॉपी-किताब की कीमतें
प्री नर्सरी/नर्सरी 3 हजार रुपये
पहली से 5वीं कक्षा 4 से साढ़े 5 हजार रुपये।
6वीं से 8वीं कक्षा 5 से 7 हजार रुपये।
9वीं से 10वीं कक्षा 7 से 8 हजार रुपये।
11वीं से 12वीं कक्षा 9 से 11 हजार रुपये।
सामान्यत : स्कूल ड्रेस की कीमत
प्री प्राइमरी 500 से 700 रुपये।
पहली से 5वीं कक्षा 800 से 1000 रुपये।
6वीं से 8वीं कक्षा 1000 से 1800 रुपये।
9वीं से 12वीं कक्षा 2000 से 2500 रुपये।
अभिभावकों व पुस्तक विक्रेताओं से बातचीत
अगर देश की तरक्की करनी है तो शिक्षा व स्वास्थ्य निशुल्क होनी चाहिए। लेकिन हमारे यहां पुस्तकों की कीमत बढ़ रही है व दारू सस्ती हो रही है। गरीब लोगों पर इसका काफी विपरीत असर पड़ा है। मेरे बेटे आरिन की 12वीं कक्षा की पुस्तकें 5 हजार रुपये की आई हैं। - अशोक कुमार, घुड़साल
स्कूलों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षा की पुस्तकों की भी कीमत बढ़ गई। आर्थिक रूप से कमजोर व सामान्य अभिभावक काफी प्रभावित हुए हैं। मेरा मानना है कि पुस्तकों की कीमत नहीं बढ़नी चाहिए। वहीं निजी स्कूलों ने फीस भी बढ़ा दी है। वह गीत याद आ रहा है कि बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई। - विक्रम सहारण, घुड़साल
प्रिंटिंग के लिए कागज महंगा होने व जीएसटी लगने से पुस्तकों के दाम बढ़ गए हैं। ग्राहकों को 30 से 50 प्रतिशत अधिक रुपये देने पड़ रहे हैं। पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ-साथ सामान्य पुस्तकों के रेट भी बढ़ हैं। - प्रेम सागर, पुस्तक विक्रेता
पुस्तकों के करीब 30 से 50 प्रतिशत कीमत बढ़ी है। विभिन्न परीक्षाओं की तैयारियों की पुस्तकों के रेट भी बढ़े हैं। कागज के रेट बढ़ गए हैं व जीएसटी लग रहा है। वहीं ट्रांसपोर्ट व लेबर भी महंगी हो गई है। इस कारण पब्लिकेशन हाउस ने पुस्तकों के रेट में बढ़ोतरी की है। - रामबिलास जिंदल, पुस्तक विक्रेता