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बजट की कमी से रुका जिला आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Feb 2022 12:05 AM IST
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Construction of District Ayurvedic Hospital halted due to budget constraints
हिसार। गांव मय्यड़ में निर्माणाधीन प्रदेश के पहले आयुष अस्पताल का काम बजट के अभाव में दो माह से बंद पड़ा है। अस्पताल के निर्माण के लिए 8.71 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था, जो पूरा खर्च हो चुका है। निर्माण एजेंसी की मानें तो बचे हुए निर्माण को पूरा करने में 50 लाख रुपये के बजट की और जरूरत पड़ेगी।
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बता दें कि वर्ष 2017 में आयुर्वेदिक अस्पताल बनाने की घोषणा हुई थी। अस्पताल के निर्माण के लिए मय्यड़ की पंचायत से 33 साल के लिए 16 एकड़ जमीन लीज पर ली गई है।
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बिजली के काम का बजट भी पांच गुना बढ़ा
अस्पताल में किए जाने वाले बिजली संबंधी काम का बजट भी बढ़कर पांच गुना हो गया है। पहले बिजली संबंधी कार्यों के लिए एक करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया था। मगर अब यह बढ़कर 5 करोड़ रुपये हो गया है। भवन में मरीजों के लिए लिफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
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तीन मंजिला है अस्ताल का भवन, 50 बेड की होगी सुविधा
अस्पताल का भवन तीन मंजिला है। इसमें 50 बेड की सुविधा उपलब्ध होगी। अस्पताल में रोगियों का आयुर्वेदिक पद्धति (पंचकर्म योगा) से इलाज किया जाएगा। ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी एवं प्रशासनिक अधिकारियों के कक्ष बनाए जाएंगे। प्रथम तल पर पंचकर्मा सेंटर, योगा हॉल एवं विभिन्न बीमारियों से पीड़ित रोगियों के दाखिले के लिए वार्ड बनाए जाएंगे। वहीं, द्वितीय तल पर स्पेशल वार्ड एवं डिलीवरी वार्ड बनाया जाएगा। अस्पताल परिसर में एक हर्बल गार्डन विकसित करने की योजना भी है, जहां 70 किस्म के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इनका इस्तेमाल दवा बनाने में किया जाएगा।
जिले में आयुर्वेद के करीब 44 एएमओ
जिलेभर में आयुर्वेद के करीब 44 एएमओ हैं, जो इस समय जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी पर तैनात हैं। इनमें 25 स्थायी और 19 कांट्रेक्ट पर हैं। हर रोज इनकी 40 से 50 ओपीडी रहती है।

कोरोना महामारी में लोगों का आयुर्वेद में बढ़ा विश्वास
कोरोना महामारी में आयुर्वेद इलाज कारगर साबित हुआ है। चिकित्सकों की मानें तो जिन कोरोना मरीजों का आयुर्वेद पद्धति से इलाज किया गया, उन मरीजों में 90 प्रतिशत जल्द रिकवरी हुई। ऐसे में लोगों का आयुर्वेद में काफी विश्वास बढ़ा।
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