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Hisar News: कॉलेज व विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को करेंगे साइबर अपराधों के प्रति जागरूक
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हिसार। डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर खतरों से सुरक्षा के प्रति सतर्कता और जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एक अभियान शुरू किया है। इसमें शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया है। यूजीसी ने एक 126 पन्नों की हैंडबुक भी तैयार की है, जिसमें साइबर खतरों की पहचान, उनसे बचने के उपाय और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करने के तरीके विस्तार से बताए हैं। यूजीसी के अभियान के तहत शहर के सभी कॉलेज और विवि में विद्यार्थियों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक किया जाएगा।
इस हैंडबुक में पासवर्ड सुरक्षा, फिशिंग हमलों से बचाव, सुरक्षित ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा जैसे विषयों पर सरल और प्रभावी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वे साइबर सुरक्षा पर वर्कशॉप, सेमिनार और प्रशिक्षण सत्र आयोजित करें। शिक्षकों और कर्मचारियों को यह समझाने पर जोर दिया गया है कि कैसे वे अपनी व्यक्तिगत और पेशेवर जानकारी को ऑनलाइन सुरक्षित रख सकते हैं।
मौजूदा दौर में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें फिशिंग, डेटा चोरी, हैकिंग, और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे अपराध प्रमुख हैं। ये न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि संस्थानों और संगठनों पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। यूजीसी के इस अभियान का उद्देश्य इन्हीं खतरों को समय रहते पहचान कर उनसे बचने की रणनीति अपनाना है। यूजीसी की यह पहल विद्यार्थियों और शिक्षकों को डिजिटल युग में सुरक्षित रहने का मार्ग दर्शन प्रदान करेगी।
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इन उपायों को करके बच सकेंगे साइबर खतरों से
यूजीसी ने साइबर खतरों से बचने के लिए कुछ प्राथमिक उपाय बताए है, जिसमें इंटरनेट के इस्तेमाल के दौरान किसी भी एप या वेबसाइट पर आंख मूंद कर भरोसा न करें। मोबाइल या फिर लैपटाप का इस्तेमाल करते समय उनमें एंटीवायरस आदि को भी जरूर रखे। कोई भी एप या सॉफ्टवेयर सिर्फ अधिकृत स्टोर से ही खरीदे। अलग-अलग इंटरनेट एकाउंट के लिए अलग-अलग पासवर्ड रखें। हर महीने सभी पासवर्डों को बदलें। अपने सभी सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करें। उपयोग में न होने पर अपने मोबाइल का इंटरनेट, लोकेशन और कैमरा बंद कर दें। केवल उन विश्वसनीय ई-कॉमर्स वेबसाइटों का उपयोग करें जो एचटीटीपीएस या पैडलॉक संकेतों के माध्यम से सुलभ हैं।
क्या न करें
- अपने व्यक्तिगत विवरण में जैसे जन्मतिथि, माता-पिता का नाम इंटरनेट मीडिया में दर्ज न करें।
- वित्तीय लेनदेन के पिन या सीवीवी को भी सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर न साझा न करें। जितना संभव हो इस तरह के
- स्पैम ईमेल या मित्रता के संदिग्ध अनुरोधों पर प्रतिक्रिया न दें।
- उन लोगों के मैसेज पर क्लिक न करें जो गुमनाम नामों से आए हो।
- ऐसे ऐप इंस्टाल न करें जो अज्ञात स्रोतों से आते हैं या मुफ्त हैं। मुफ्त ऑफर या कम कीमत वाले उत्पाद आदि के झांसे में न आएं। फोन के कॉन्टेक्ट, फोटो आदि को देखने की अनुमति किस अनजान एप को न दें।
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यूजीसी की यह एक अच्छी पहल है। विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए सभी कॉलेजों में साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने के लिए सेमिनार व कार्यशाला का आयोजन करवाने के निर्देश दिए जाएंगे। - प्रो. संजीव कुमार, डीन ऑफ कॉलेजिज, जीजेयू। ं
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इस हैंडबुक में पासवर्ड सुरक्षा, फिशिंग हमलों से बचाव, सुरक्षित ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा जैसे विषयों पर सरल और प्रभावी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वे साइबर सुरक्षा पर वर्कशॉप, सेमिनार और प्रशिक्षण सत्र आयोजित करें। शिक्षकों और कर्मचारियों को यह समझाने पर जोर दिया गया है कि कैसे वे अपनी व्यक्तिगत और पेशेवर जानकारी को ऑनलाइन सुरक्षित रख सकते हैं।
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मौजूदा दौर में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें फिशिंग, डेटा चोरी, हैकिंग, और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे अपराध प्रमुख हैं। ये न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि संस्थानों और संगठनों पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। यूजीसी के इस अभियान का उद्देश्य इन्हीं खतरों को समय रहते पहचान कर उनसे बचने की रणनीति अपनाना है। यूजीसी की यह पहल विद्यार्थियों और शिक्षकों को डिजिटल युग में सुरक्षित रहने का मार्ग दर्शन प्रदान करेगी।
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इन उपायों को करके बच सकेंगे साइबर खतरों से
यूजीसी ने साइबर खतरों से बचने के लिए कुछ प्राथमिक उपाय बताए है, जिसमें इंटरनेट के इस्तेमाल के दौरान किसी भी एप या वेबसाइट पर आंख मूंद कर भरोसा न करें। मोबाइल या फिर लैपटाप का इस्तेमाल करते समय उनमें एंटीवायरस आदि को भी जरूर रखे। कोई भी एप या सॉफ्टवेयर सिर्फ अधिकृत स्टोर से ही खरीदे। अलग-अलग इंटरनेट एकाउंट के लिए अलग-अलग पासवर्ड रखें। हर महीने सभी पासवर्डों को बदलें। अपने सभी सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करें। उपयोग में न होने पर अपने मोबाइल का इंटरनेट, लोकेशन और कैमरा बंद कर दें। केवल उन विश्वसनीय ई-कॉमर्स वेबसाइटों का उपयोग करें जो एचटीटीपीएस या पैडलॉक संकेतों के माध्यम से सुलभ हैं।
क्या न करें
- अपने व्यक्तिगत विवरण में जैसे जन्मतिथि, माता-पिता का नाम इंटरनेट मीडिया में दर्ज न करें।
- वित्तीय लेनदेन के पिन या सीवीवी को भी सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर न साझा न करें। जितना संभव हो इस तरह के
- स्पैम ईमेल या मित्रता के संदिग्ध अनुरोधों पर प्रतिक्रिया न दें।
- उन लोगों के मैसेज पर क्लिक न करें जो गुमनाम नामों से आए हो।
- ऐसे ऐप इंस्टाल न करें जो अज्ञात स्रोतों से आते हैं या मुफ्त हैं। मुफ्त ऑफर या कम कीमत वाले उत्पाद आदि के झांसे में न आएं। फोन के कॉन्टेक्ट, फोटो आदि को देखने की अनुमति किस अनजान एप को न दें।
यूजीसी की यह एक अच्छी पहल है। विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए सभी कॉलेजों में साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने के लिए सेमिनार व कार्यशाला का आयोजन करवाने के निर्देश दिए जाएंगे। - प्रो. संजीव कुमार, डीन ऑफ कॉलेजिज, जीजेयू। ं