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हिसार की बेटी रीना ने दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो की फतेह
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किलिमंजारो पर फतेह करने वाली पर्वतारोही रीना भट्टी।
- फोटो : Hisar
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शहर के श्यामलाल बाग की बेटी रीना भट्टी ने दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो को फतेह किया है। रीना ने छह घंटे में यह चढ़ाई पूरी की। इस अभियान के दौरान रीना के साथ चार जर्मनी के पर्वतारोही भी थे। रीना के मुताबिक अब उसका लक्ष्य विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतेह करना है। बता दें कि किलिमंजारो की ऊंचाई 5895 मीटर (19341 फुट) है। यह दुनिया की सात सबसे ऊंची चोटियों में से एक है।
फिल्म से ली पर्वतारोही बनने की प्रेरणा
रीना ने बताया कि वह स्कूल के समय में कबड्डी खेलती थी। इस वजह से खेलों की तरफ उसका काफी रुझान था। शुरू में वह शौकिया तौर पर ट्रैकिंग पर जाती थी। इसी बीच उसने हॉलीवुड फिल्म एवरेस्ट देखी। वह इस फिल्म से काफी प्रभावित हुई। वह शुरू से जीवन में कुछ ऐसा करना चाहती थी, जिससे उसका व उसके परिवार का नाम रोशन हो सके। इस फिल्म के बाद उसे पर्वतारोही बनने की ठानी। परिवार वालों ने भी इस फैसले में उसका सहयोग किया। पहले उसने हिमाचल प्रदेश से पर्वतारोहण का बेसिक व एडवांस कोर्स किया। इसी बीच उसने हिमाचल प्रदेश में स्थित फ्रेंडशिप पीक (17,353 फुट) पर चढ़ाई की। इसके अलावा उसने इसी साल जनवरी-फरवरी में चादर ट्रैक पर ट्रैकिंग की। यह 65 किलोमीटर लंबा ट्रैक है और यहां का तापमान माइनस 30 डिग्री रहता है। बर्फ की 12 से 14 मीटर की परत यहां जमी रहती है।
किलिमंजारो पर चढ़ने का था सपना
रीना के मुताबिक जब से उसने पर्वतारोही बनने की ठानी, तब से उसका किलिमंजारो पर चढ़ाई करने का सपना था। रीना ने बताया कि उन्होंने पांच फरवरी की रात साढ़े 12 बजे चढ़ाई शुरू की थी और सुबह साढ़े बजे वह चोटी पर पहुंच गए थे। चढ़ाई के दौरान यहां का तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस था और ऊंचाई के साथ हवा की गति बढ़ती जा रही थी। आक्सीजन की कमी के कारण सांस लेने में परेशानी और सिर में दर्द होना आदि तकलीफों का सामना करना पड़ा। मगर उसने हिम्मत नहीं हारी। रीना के पिता बलवान सिंह की ऑटो मार्केट में वर्कशॉप है और मां बाला देवी एक गृहिणी है। रीना एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती है। रीना ने बताया कि अब उसका लक्ष्य माउंट एवरेस्ट की चोटी पर झंडा फहराना है।
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फिल्म से ली पर्वतारोही बनने की प्रेरणा
रीना ने बताया कि वह स्कूल के समय में कबड्डी खेलती थी। इस वजह से खेलों की तरफ उसका काफी रुझान था। शुरू में वह शौकिया तौर पर ट्रैकिंग पर जाती थी। इसी बीच उसने हॉलीवुड फिल्म एवरेस्ट देखी। वह इस फिल्म से काफी प्रभावित हुई। वह शुरू से जीवन में कुछ ऐसा करना चाहती थी, जिससे उसका व उसके परिवार का नाम रोशन हो सके। इस फिल्म के बाद उसे पर्वतारोही बनने की ठानी। परिवार वालों ने भी इस फैसले में उसका सहयोग किया। पहले उसने हिमाचल प्रदेश से पर्वतारोहण का बेसिक व एडवांस कोर्स किया। इसी बीच उसने हिमाचल प्रदेश में स्थित फ्रेंडशिप पीक (17,353 फुट) पर चढ़ाई की। इसके अलावा उसने इसी साल जनवरी-फरवरी में चादर ट्रैक पर ट्रैकिंग की। यह 65 किलोमीटर लंबा ट्रैक है और यहां का तापमान माइनस 30 डिग्री रहता है। बर्फ की 12 से 14 मीटर की परत यहां जमी रहती है।
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किलिमंजारो पर चढ़ने का था सपना
रीना के मुताबिक जब से उसने पर्वतारोही बनने की ठानी, तब से उसका किलिमंजारो पर चढ़ाई करने का सपना था। रीना ने बताया कि उन्होंने पांच फरवरी की रात साढ़े 12 बजे चढ़ाई शुरू की थी और सुबह साढ़े बजे वह चोटी पर पहुंच गए थे। चढ़ाई के दौरान यहां का तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस था और ऊंचाई के साथ हवा की गति बढ़ती जा रही थी। आक्सीजन की कमी के कारण सांस लेने में परेशानी और सिर में दर्द होना आदि तकलीफों का सामना करना पड़ा। मगर उसने हिम्मत नहीं हारी। रीना के पिता बलवान सिंह की ऑटो मार्केट में वर्कशॉप है और मां बाला देवी एक गृहिणी है। रीना एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती है। रीना ने बताया कि अब उसका लक्ष्य माउंट एवरेस्ट की चोटी पर झंडा फहराना है।
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