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दावा : चार साल पहले शहर हो चुका बेसहारा पशु मुक्त, हकीकत : हर चौक-चौराहों पर पशुओं का लगा जमावड़ा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 11:47 PM IST
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Claim: Four years ago the city became destitute animal free Reality: Animals gathered at every square and intersection
लाहौरिया चौक के पास मेन रोड पर बैठे बेसहारा पशु। - फोटो : Hisar
हिसार। प्रशासन की ओर से हिसार शहर की सड़कों को चार साल पहले बेसहारा पशुओं से मुक्त कराने का कागजों में दावा किया जा रहा है, मगर हकीकत इससे उलट है। सड़कों, चौक-चौराहों पर बेसहारा पशुओं के झुंड हादसों को न्योता दे रहे हैं।
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वर्ष 2017 में जिला प्रशासन ने शहर को बेसहारा पशु मुक्त घोषित किया था। लेकिन आज भी शहर की सड़कों पर ढाई से तीन हजार लावारिस पशु घूम रहे हैं। नगर निगम का पशु पकड़ने का अभियान सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 50 एकड़ में बने गोअभयारण्य की क्षमता करीब 3500 पशुओं की है, लेकिन वहां सिर्फ 1200 पशुओं को रखा गया है। बता दें कि शहर में बेसहारा पशुओं की समस्या कम होने की बजाय दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। जिला व नगर निगम प्रशासन इस समस्या का समाधान ही नहीं कर पा रहे हैं। बेसहारा पशुओं के कारण हर रोज हादसे हो रहे हैं, जिनमें लोगों को जान भी गंवानी पड़ रही है।
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गोअभयारण्य में 3500 पशु रखने की क्षमता
प्रदेश सरकार ने बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए 50 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई, जिस पर 14 करोड़ की लागत से गोअभयारण्य तैयार किया गया। 25 एकड़ में गोअभयारण्य व साढ़े 12 एकड़ में नंदीशाला बनाई गई है। इसके अलावा साढ़े 12 एकड़ जमीन चारे के रखी गई है, जिसकी चहारदीवारी का निर्माण किया जा रहा है। यहां पशुओं के लिए चारा उगाया जाएगा। गोअभयारण्य में 10 शेड बन चुके हैं, जबकि 8 शेड का निर्माण जारी है। इसके अलावा पीने के पानी के लिए टैंक बनाए गए हैं। शेड के नीचे करीब 3500 पशुओं को रखा जा सकता है। वर्तमान में गोअभयारण्य में करीब 1200 पशु हैं, जिनमें 800 गाय व 400 नंदी शामिल हैं। मतलब शहर में घूम रहे सभी पशुओं को भी पकड़कर गोअभयारण्य में रखा जा सकता है। उधर, प्रदेश सरकार से तरफ से जिला प्रशासन को सड़कों से बेसहारा पशुओं को हटाने के लिए 50-50 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई गई थी।
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डेढ़ माह पहले ही निगमायुक्त ने दिया था पशुुुओं को पकड़ने का आदेश
वर्ष 2019 में गोअभयारण्य में करीब 500 गायों की मौत हुई, फिर वर्ष 2020 में लॉकडाउन के कारण बेसहारा पशु पकड़ने का अभियान बंद कर दिया था। इसके बाद इसी वर्ष करीब डेढ़ माह पहले ही निगमायुक्त ने अधिकारियों को पशु पकड़ने का आदेश दिया था। इसके बाद से प्रतिदिन 10 से 15 पशु पकड़े जा रहे हैं। हालांकि बीच में गाड़ी के खराब होने व अन्य कारणों से अभियान बंद हो जाता है।

पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। ज्यादा से ज्यादा बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए दो गाड़ियां किराये पर ली जा रही हैं। साथ ही कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात करवाया गया है। जल्द ही शहरवासियों को लावारिस पशुओं से निजात मिल सकेगी। - अशोक गर्ग, निगमायुक्त
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