{"_id":"5dc8610b8ebc3e5b2475dcfb","slug":"civic-hisar-news-rtk5269545174","type":"story","status":"publish","title_hn":"सैनी सभा ट्रस्ट की बैठक में हंगामा, सभा के पुनर्गठन के लिए दिया 15 दिन का अल्टीमेटम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सैनी सभा ट्रस्ट की बैठक में हंगामा, सभा के पुनर्गठन के लिए दिया 15 दिन का अल्टीमेटम
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सैनी सभा ट्रस्ट की रविवार को सैनी सीनियर सेकेंडरी स्कूल स्थित ट्रस्ट कार्यालय में ट्रस्ट के प्रधान ओमप्रकाश सैनी सीसवालिया की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें सैनी संघर्ष समिति और पदाधिकारियों के बीच जमकर बहस हुई। समिति सदस्यों का कहना था कि सैनी सभा अपने उद्देश्य से भटक गई है और संस्थापक स्व. चौ. नंदराम सैनी ने जिन उद्देश्यों से सैनी सभा का गठन किया था, वर्तमान पदाधिकारी उन उद्देश्यों को भुलाकर स्वहित के लिए कार्य कर रहे हैं।
बैठक में सैनी संघर्ष समिति के सदस्यों एडवोकेट मुकेश सैनी, मुकेश सैनी मोनू, सतबीर, आनंद, छबीलदास, सुंदर, रोबिन, अमित, सुमित, मास्टर नरेश, मास्टर रमेश, मास्टर राजेंद्र, रमेश किरोड़ीवाल, भागसिंह, राजेश, अशोक लीला, छबीलदास किरोड़ीवाल, महेंद्र सैनी, केहर सिंह सैनी आदि उपस्थित थे। समिति सदस्यों ने कहा कि स्व. चौ. नंदराम सैनी ने वर्ष 1962 में सैनी सभा का गठन किया था। इसके बाद समाज के उत्थान, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने जैसे उद्देश्यों को मद्देनजर रखते हुए वर्ष 1965 में ट्रस्ट का गठन किया गया। सभा के संविधान में कहा गया था कि ट्रस्ट के सदस्यों का चयन सैनी सभा के पदेन सदस्यों द्वारा किया जाएगा। एडवोकेट मुकेश सैनी ने आरोप लगाया कि पिछले 30-35 साल से सभा के पदाधिकारियों का चयन ट्रस्ट के सदस्य अपनी मर्जी से कर रहे हैं, जिसकी समाज को कोई सूचना नहीं दी जाती। इसके चलते समाज आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक रूप से पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने समाज के उत्थान के लिए चुनाव को नियमानुसार कराए जाने की मांग की। इस बात को लेकर बैठक में दोनों ओर के सदस्यों में काफी देर तक बहस होती रही। गहमागहमी के बीच बैठक खत्म कर प्रधान ओमप्रकाश जाने लगे तो समिति सदस्यों ने सभा के पुनर्गठन के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया।
ये ट्रस्टी रहे बैठक में उपस्थित
बैठक में सभा के 30 ट्रस्टियों में से केवल 10 ट्रस्टी उपस्थित हुए। इनमें प्रधान ओमप्रकाश सैनी, सचिव नरेंद्र सैनी, राजेंद्र खेड़ा, धर्मपाल सैनी, पवन सैनी, सीताराम सैनी, राजकुमार सैनी, ओंकार सैनी, रघुवीर सैनी और सुनील सैनी उपस्थित थे। ट्रस्ट के तीन सदस्यों पवन सैनी, धर्मपाल सैनी, राजेंद्र खेड़ा वाले ने संघर्ष समिति सदस्यों की मांग का समर्थन किया।
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यदि सभा पदाधिकारियों ने 15 दिन में पुनर्गठन की कोई कार्रवाई नहीं की तो समिति की बैठक बुलाकर सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाएगा। इसमें कानूनी रूप से लड़ाई लड़ने के लिए आगामी रणनीति बनाई जाएगी। समाज के हित में किसी भी कीमत पर सभा में गलत काम नहीं होने दिए जाएंगे।
मुकेश सैनी मोनू, सदस्य, सैनी संघर्ष समिति, हिसार।
जो सदस्य चार बार से मीटिंग में नहीं आता, उसे सभा से बाहर निकाल रहे हैं, लेकिन जिन लोगों ने फर्जी तरीके से ट्रस्ट में आजीवन 11 सदस्य ज्वाइन कराए, उनको भी बाहर निकालना चाहिए। संघर्ष समिति की मांगें जायज हैं। मैं उनका समर्थन करता हूं।
एडवोकेट पवन सैनी, इलेक्टेड ट्रस्टी, सैनी सभा ट्रस्ट।
बैठक में कोई हंगामा नहीं हुआ। ट्रस्ट में 11 आजीवन सदस्य बनाने का मामला उठा था, लेकिन वे तो 10 साल पहले बनाए थे। विरोध करने वालों को कहा है कि वे अपना रिप्रेजेंट करें, उस पर विचार किया जाएगा। चार बैठकों में नहीं आने वालों को हटाने के मामले में मीटिंग में एजेंडा पारित किया गया था।
ओमप्रकाश सैनी सीसवालिया, प्रधान, सैनी सभा ट्रस्ट, हिसार।
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बैठक में सैनी संघर्ष समिति के सदस्यों एडवोकेट मुकेश सैनी, मुकेश सैनी मोनू, सतबीर, आनंद, छबीलदास, सुंदर, रोबिन, अमित, सुमित, मास्टर नरेश, मास्टर रमेश, मास्टर राजेंद्र, रमेश किरोड़ीवाल, भागसिंह, राजेश, अशोक लीला, छबीलदास किरोड़ीवाल, महेंद्र सैनी, केहर सिंह सैनी आदि उपस्थित थे। समिति सदस्यों ने कहा कि स्व. चौ. नंदराम सैनी ने वर्ष 1962 में सैनी सभा का गठन किया था। इसके बाद समाज के उत्थान, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने जैसे उद्देश्यों को मद्देनजर रखते हुए वर्ष 1965 में ट्रस्ट का गठन किया गया। सभा के संविधान में कहा गया था कि ट्रस्ट के सदस्यों का चयन सैनी सभा के पदेन सदस्यों द्वारा किया जाएगा। एडवोकेट मुकेश सैनी ने आरोप लगाया कि पिछले 30-35 साल से सभा के पदाधिकारियों का चयन ट्रस्ट के सदस्य अपनी मर्जी से कर रहे हैं, जिसकी समाज को कोई सूचना नहीं दी जाती। इसके चलते समाज आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक रूप से पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने समाज के उत्थान के लिए चुनाव को नियमानुसार कराए जाने की मांग की। इस बात को लेकर बैठक में दोनों ओर के सदस्यों में काफी देर तक बहस होती रही। गहमागहमी के बीच बैठक खत्म कर प्रधान ओमप्रकाश जाने लगे तो समिति सदस्यों ने सभा के पुनर्गठन के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया।
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ये ट्रस्टी रहे बैठक में उपस्थित
बैठक में सभा के 30 ट्रस्टियों में से केवल 10 ट्रस्टी उपस्थित हुए। इनमें प्रधान ओमप्रकाश सैनी, सचिव नरेंद्र सैनी, राजेंद्र खेड़ा, धर्मपाल सैनी, पवन सैनी, सीताराम सैनी, राजकुमार सैनी, ओंकार सैनी, रघुवीर सैनी और सुनील सैनी उपस्थित थे। ट्रस्ट के तीन सदस्यों पवन सैनी, धर्मपाल सैनी, राजेंद्र खेड़ा वाले ने संघर्ष समिति सदस्यों की मांग का समर्थन किया।
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यदि सभा पदाधिकारियों ने 15 दिन में पुनर्गठन की कोई कार्रवाई नहीं की तो समिति की बैठक बुलाकर सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाएगा। इसमें कानूनी रूप से लड़ाई लड़ने के लिए आगामी रणनीति बनाई जाएगी। समाज के हित में किसी भी कीमत पर सभा में गलत काम नहीं होने दिए जाएंगे।
मुकेश सैनी मोनू, सदस्य, सैनी संघर्ष समिति, हिसार।
जो सदस्य चार बार से मीटिंग में नहीं आता, उसे सभा से बाहर निकाल रहे हैं, लेकिन जिन लोगों ने फर्जी तरीके से ट्रस्ट में आजीवन 11 सदस्य ज्वाइन कराए, उनको भी बाहर निकालना चाहिए। संघर्ष समिति की मांगें जायज हैं। मैं उनका समर्थन करता हूं।
एडवोकेट पवन सैनी, इलेक्टेड ट्रस्टी, सैनी सभा ट्रस्ट।
बैठक में कोई हंगामा नहीं हुआ। ट्रस्ट में 11 आजीवन सदस्य बनाने का मामला उठा था, लेकिन वे तो 10 साल पहले बनाए थे। विरोध करने वालों को कहा है कि वे अपना रिप्रेजेंट करें, उस पर विचार किया जाएगा। चार बैठकों में नहीं आने वालों को हटाने के मामले में मीटिंग में एजेंडा पारित किया गया था।
ओमप्रकाश सैनी सीसवालिया, प्रधान, सैनी सभा ट्रस्ट, हिसार।