{"_id":"65d2473e4643487270026101","slug":"campal-calling-plants-will-get-micronutrients-from-seaweed-yield-will-increase-hisar-news-c-21-hsr1005-324693-2024-02-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैंपल कॉलिंग : समुद्री शैवाल से पौधों को मिलेंगे सूक्ष्म पोषक तत्व, बढ़ेगी पैदावार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैंपल कॉलिंग : समुद्री शैवाल से पौधों को मिलेंगे सूक्ष्म पोषक तत्व, बढ़ेगी पैदावार
विज्ञापन
हिसार। सिरसा रोड स्थित उत्तरी क्षेत्र कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान (टीटीसी) में आयोजित कृषि दर्शन एक्सपो विभिन्न कंपनियों ने अलग-अलग प्रकार के जैविक उर्वरक प्रदर्शित किए हैं। एक कंपनी ने समुद्री शैवाल से बने उर्वरक प्रदर्शित किए हैं। कंपनी की मानें तो समुद्री शैवाल से पौधाें को भरपूर मात्रा में सूक्ष्म पौषक तत्व मिलेंगे, जिससे पैदावार में भी बढ़ोतरी होगी।
बायोस्टेड कम्पनी के प्रतिनिधि अमोल के मुताबिक समुद्री शैवाल में अन्य जैविक उर्वरकों की तुलना में अधिकतम सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। यह मिट्टी की पीएच को बनाए रखने में मदद करता है। यह मिट्टी व जड़ों के बीच तनाव को कम करने में भी मदद करता है। उनकी कंपनी नार्वे का समुद्री शैवाल इस्तेमाल करती है तो सबसे अच्छा मना जाता है, क्योंकि वह 6 माह ही दिन निकलता है। उनके पास अलग-अलग फसलों के हिसाब से अलग-अलग प्रकार का उर्वरक है। अगर कोई किसान समुद्री शैवाल प्रयोग में लाता है तो उसे रसायनयुक्त उर्वरक का 20 प्रतिशत तक कम इस्तेमाल करना पड़ेगा। चूंकि किसान हर साल रसायनयुक्त उर्वरकों की मात्रा को बढ़ा रहा है। मगर समुद्री शैवाल के इस्तेमाल के बाद उसे रसायनयुक्त उर्वरक की मात्रा नहीं बढ़ानी पड़ेगी।
जूस रखेगा दिल का ख्याल
न्यू नैना देवी कंपनी ने एक्सपो में विभिन्न प्रकार के मेडिसिनल जूस प्रदर्शित किए हैं। कंपनी के प्रतिनिधि मुकेश ने बताया कि उनकी कंपनी ने अंजीर, अश्वगंधा व अर्जुन की छाल का जूस बनाया है। अर्जुन की छात्र वात्त, पित्त व कफ पर काम करती है। जब पित्त बढ़ती है तो नसों में ब्लॉकेज की समस्या आती और बीपी कम या ज्यादा होता है। अश्वगंधा भी दिल पर काम करता है। वहीं अंजीर में फाइबर काफी ज्यादा होता है, जिससे मोटापा कम होता है। अगर किसी को अपने दिल का ख्याल रखना है तो वह इस जूस का इस्तेमाल करें। इसके अलावा उन्होंने अंजीर व मोरिंगा का जूस भी बनाया। मोरिंगा में सभी तरह खनिज तत्व होते हैं। जूस में आंवला, बथुआ व पालक का भी इस्तेमाल किया है। आंवला विटामिन सी, बथुआ एंटी ऑक्सीडेंट व पालक आयरन का अच्छा स्रोत है।
विज्ञापन
ट्रैक्टर चलाने की लागत की कम
सकूल सोल्यूशन कम्पनी ने बैटरी चालित ट्रैक्टर हलदार 750 प्रदर्शित किया। कंपनी के मुताबिक यह ट्रैक्टर 15 हॉर्स पावर का है। इसमें 2 टन तक के भार को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसके आगे और पीछे की तरफ हाइड्रोलिक लिफ्ट लगी हुई है। यह संकरी जगह में बहुत ही आसानी से काम करता है। इसमें आटोमैटिक गियर सिस्टम है जैसे कि कार में होता है। 6 से 7 घंटे में पूरा चार्ज होने के बाद 4 से 6 घंटे तक काम कर सकता है। कंपनी का दावा है कि इस ट्रैक्टर को प्रति घंटा चलाने की लागत एक कप चाय से भी कम है।
टायर घिसने के बाद भी बढ़ेगी चौड़ाई
वहीं जेके टायर कंपनी की तरफ से ट्रैक्टरों के टायर प्रदर्शित किए गए। कंपनी प्रतिनिधि कन्हैया चौधरी ने बताया कि उनकी कंपनी ने स्टैपलर तकनीक से ट्रैक्टर का टायर तैयार किया है। इस तकनीक खासियत यह है कि जैसे-जैसे टायर घिसेगा, उसकी चौड़ाई बढ़ती जाएगी। इस टायर की ऊंचाई 40.5 एमएम है। इस टायर के 20 से 30 प्रतिशत घिसने के बाद इसकी चौड़ाई बढ़ जाएगी। दरअसल इसके नीचे वाला हिस्सा चौड़ा है। चौड़ा होने के कारण यह रोड से चिपट कर चलेगा। इस कारण से खेत में काम करते समय या गीली मिट्टी में काम करते समय टायर नहीं फिसलेगा व तेल की खपत कम होगी, जिससे डीजल की बचत होगी। इसके अलावा उनकी कंपनी ने पहली बार ट्रैक्टर के टायरों में स्टील के वायर इस्तेमाल किए हैं। इस कारण से टायर में पंक्चर कम होगा और इसकी लाइफ ज्यादा होगी।
इफको ने वितरित किए बीज
इफको की तरफ से किसानों को मेले के दौरान मूंग व धान के बीजों को वितरण किया। साथ ही किसानों को नई किस्मों के बारे में जानकारी दी। संस्थान के निदेशक मुकेश जैन ने बताया कि कृषि प्रदर्शनी के जरिये किसान ही नहीं आमजन के लिए आधुनिक व नई तकनीक लाना कृषि दर्शन किसान मेले का मुख्य उद्देश्य है।
विज्ञापन
बायोस्टेड कम्पनी के प्रतिनिधि अमोल के मुताबिक समुद्री शैवाल में अन्य जैविक उर्वरकों की तुलना में अधिकतम सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। यह मिट्टी की पीएच को बनाए रखने में मदद करता है। यह मिट्टी व जड़ों के बीच तनाव को कम करने में भी मदद करता है। उनकी कंपनी नार्वे का समुद्री शैवाल इस्तेमाल करती है तो सबसे अच्छा मना जाता है, क्योंकि वह 6 माह ही दिन निकलता है। उनके पास अलग-अलग फसलों के हिसाब से अलग-अलग प्रकार का उर्वरक है। अगर कोई किसान समुद्री शैवाल प्रयोग में लाता है तो उसे रसायनयुक्त उर्वरक का 20 प्रतिशत तक कम इस्तेमाल करना पड़ेगा। चूंकि किसान हर साल रसायनयुक्त उर्वरकों की मात्रा को बढ़ा रहा है। मगर समुद्री शैवाल के इस्तेमाल के बाद उसे रसायनयुक्त उर्वरक की मात्रा नहीं बढ़ानी पड़ेगी।
विज्ञापन
जूस रखेगा दिल का ख्याल
न्यू नैना देवी कंपनी ने एक्सपो में विभिन्न प्रकार के मेडिसिनल जूस प्रदर्शित किए हैं। कंपनी के प्रतिनिधि मुकेश ने बताया कि उनकी कंपनी ने अंजीर, अश्वगंधा व अर्जुन की छाल का जूस बनाया है। अर्जुन की छात्र वात्त, पित्त व कफ पर काम करती है। जब पित्त बढ़ती है तो नसों में ब्लॉकेज की समस्या आती और बीपी कम या ज्यादा होता है। अश्वगंधा भी दिल पर काम करता है। वहीं अंजीर में फाइबर काफी ज्यादा होता है, जिससे मोटापा कम होता है। अगर किसी को अपने दिल का ख्याल रखना है तो वह इस जूस का इस्तेमाल करें। इसके अलावा उन्होंने अंजीर व मोरिंगा का जूस भी बनाया। मोरिंगा में सभी तरह खनिज तत्व होते हैं। जूस में आंवला, बथुआ व पालक का भी इस्तेमाल किया है। आंवला विटामिन सी, बथुआ एंटी ऑक्सीडेंट व पालक आयरन का अच्छा स्रोत है।
विज्ञापन
ट्रैक्टर चलाने की लागत की कम
सकूल सोल्यूशन कम्पनी ने बैटरी चालित ट्रैक्टर हलदार 750 प्रदर्शित किया। कंपनी के मुताबिक यह ट्रैक्टर 15 हॉर्स पावर का है। इसमें 2 टन तक के भार को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसके आगे और पीछे की तरफ हाइड्रोलिक लिफ्ट लगी हुई है। यह संकरी जगह में बहुत ही आसानी से काम करता है। इसमें आटोमैटिक गियर सिस्टम है जैसे कि कार में होता है। 6 से 7 घंटे में पूरा चार्ज होने के बाद 4 से 6 घंटे तक काम कर सकता है। कंपनी का दावा है कि इस ट्रैक्टर को प्रति घंटा चलाने की लागत एक कप चाय से भी कम है।
टायर घिसने के बाद भी बढ़ेगी चौड़ाई
वहीं जेके टायर कंपनी की तरफ से ट्रैक्टरों के टायर प्रदर्शित किए गए। कंपनी प्रतिनिधि कन्हैया चौधरी ने बताया कि उनकी कंपनी ने स्टैपलर तकनीक से ट्रैक्टर का टायर तैयार किया है। इस तकनीक खासियत यह है कि जैसे-जैसे टायर घिसेगा, उसकी चौड़ाई बढ़ती जाएगी। इस टायर की ऊंचाई 40.5 एमएम है। इस टायर के 20 से 30 प्रतिशत घिसने के बाद इसकी चौड़ाई बढ़ जाएगी। दरअसल इसके नीचे वाला हिस्सा चौड़ा है। चौड़ा होने के कारण यह रोड से चिपट कर चलेगा। इस कारण से खेत में काम करते समय या गीली मिट्टी में काम करते समय टायर नहीं फिसलेगा व तेल की खपत कम होगी, जिससे डीजल की बचत होगी। इसके अलावा उनकी कंपनी ने पहली बार ट्रैक्टर के टायरों में स्टील के वायर इस्तेमाल किए हैं। इस कारण से टायर में पंक्चर कम होगा और इसकी लाइफ ज्यादा होगी।
इफको ने वितरित किए बीज
इफको की तरफ से किसानों को मेले के दौरान मूंग व धान के बीजों को वितरण किया। साथ ही किसानों को नई किस्मों के बारे में जानकारी दी। संस्थान के निदेशक मुकेश जैन ने बताया कि कृषि प्रदर्शनी के जरिये किसान ही नहीं आमजन के लिए आधुनिक व नई तकनीक लाना कृषि दर्शन किसान मेले का मुख्य उद्देश्य है।