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Hisar News: फैजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ब्लेड रनर दिलबाग ने जीता कांस्य पदक
Sat, 01 Mar 2025 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sat, 01 Mar 2025 12:53 AM IST
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हिसार में कांस्य पदक के साथ ब्लेड रनर दिलबाग।
हिसार। दुबई में हुई फैजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिसार के गांव कालवास के ब्लेड रनर दिलबाग ने कांस्य पदक पर कब्जा किया है। दिलबाग ने 3.74 मीटर लंबी छलांग लगाई और पदक पर कब्जा किया।
अब दिलबाग एशियन चैंपियनशिप के लिए होने वाले ट्रायल की तैयारी शुरू करेगा। वह गिरी सेंटर में कोच भूपेंद्र बामल के पास अभ्यास करता है।
इस चैंपियनशिप में दिलबाग ने टी-63 कैटेगिरी में भाग लिया था। दिलबाग का कहना है कि 2026 में एशियन चैंपियनशिप आयोजित होनी है। इसी पर उसका फोकस रहेगा।
वहीं, दिलबाग ने पिछले साल दिसंबर में थाइलैंड में आयोजित हुई वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट यूथ गेम्स में 17.57 सेकंड में 100 मीटर दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। दिलबाग शुक्रवार को ही अपने गांव पहुंचा है। चैंपियनशिप फरवरी माह में आयोजित हुई थी।
साढ़े पांच साल की उम्र में हादसे में गंवाई थी एक टांग, नहीं तोड़ा हौसला : ब्लेड रनर दिलबाग बताते है कि साढ़े पांच साल की उम्र में सड़क हादसे में एक टांग गंवाने के बाद भी उसने हौसला नहीं तोड़ा। दिलबाग ने तकलीफ और दर्द को झेला और खेलों में ही नाम रोशन करने की ठान ली।
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2021 में गिरी सेंटर में दिलबाग ने दौड़ का अभ्यास किया। जिंदगी की दौड़ को पैरों के बजाय हौसले से जीतते हुए दिलबाग ने आज ब्लेड रनर के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
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अब दिलबाग एशियन चैंपियनशिप के लिए होने वाले ट्रायल की तैयारी शुरू करेगा। वह गिरी सेंटर में कोच भूपेंद्र बामल के पास अभ्यास करता है।
इस चैंपियनशिप में दिलबाग ने टी-63 कैटेगिरी में भाग लिया था। दिलबाग का कहना है कि 2026 में एशियन चैंपियनशिप आयोजित होनी है। इसी पर उसका फोकस रहेगा।
वहीं, दिलबाग ने पिछले साल दिसंबर में थाइलैंड में आयोजित हुई वर्ल्ड एबिलिटीस्पोर्ट यूथ गेम्स में 17.57 सेकंड में 100 मीटर दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। दिलबाग शुक्रवार को ही अपने गांव पहुंचा है। चैंपियनशिप फरवरी माह में आयोजित हुई थी।
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साढ़े पांच साल की उम्र में हादसे में गंवाई थी एक टांग, नहीं तोड़ा हौसला : ब्लेड रनर दिलबाग बताते है कि साढ़े पांच साल की उम्र में सड़क हादसे में एक टांग गंवाने के बाद भी उसने हौसला नहीं तोड़ा। दिलबाग ने तकलीफ और दर्द को झेला और खेलों में ही नाम रोशन करने की ठान ली।
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2021 में गिरी सेंटर में दिलबाग ने दौड़ का अभ्यास किया। जिंदगी की दौड़ को पैरों के बजाय हौसले से जीतते हुए दिलबाग ने आज ब्लेड रनर के रूप में अपनी पहचान बनाई है।