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भारत मित्र स्तंभ: खांडा खेड़ी गांव में लोकार्पण समारोह का भव्य शुभारम्भ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी पहुंचे

Thu, 12 Oct 2023 07:16 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Thu, 12 Oct 2023 07:16 PM IST
सार

खांडा खेड़ी गांव में पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के पिता स्वर्गीय चौधरी मित्रसेन आर्य की स्मृति में बनाए गए भारत मित्र स्तम्भ के लोकार्पण के अवसर में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। स्तंभ का लोकार्पण आरएसएस प्रमुख डॉ.मोहन भागवत द्वारा किया गया।

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Bharat Mitra Pillar: Grand inauguration ceremony in Khanda Kheri village, Rishi Muni arrived from India
समारोह स्थल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिसार के गांव खांडा खेड़ी में भारत मित्र स्तंभ लोकार्पण समारोह का भव्य आरंभ हो चुका है। देशभर के महान ऋषि मुनि, साधु खांडा खेड़ी गांव में पहुंचे हुए हैं। वहीं, इस कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और बाबा रामदेव भी पहुंचे हैं। डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा, हांसी के विधायक विनोद भयाना, भिवानी लोकसभा सांसद धर्मबीर सिंह, बरवाला के विधायक जोगीराम सिहाग, पूर्व शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा साहित कई बड़े नेता समझ में पहुंच चुके हैं।

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि वो सारे प्रभाव हमारे यहां भी आए हैं। यह सोने का नहीं जागृत रहने का समय है। एक एक घर में हमें नीति का शिक्षण देना होगा। संस्कारों का शिक्षण देना पड़ेगा। नई पीढ़ी से संवाद करना होगा। हम सभी के पास मोबाइल हो जाने के कारण संवाद बंद हो गया है। अपने बच्चों के संवाद कर उन्हें अपनी संस्कृति से अवगत कराना होगा। महापुरुषों की जय जय कारण करने की बजाए उनके जीवन का अनुसरण करें।समाज में अच्छाई को पहचनना पड़ता है उसे पुरस्कृत करना पड़ता है। अच्छाई का प्रोत्साहन करना हमारा कर्तव्य बनता है। हमारे पूर्वजों ने ऐसा पराक्रम किया किसी को जीता नहीं, किसी को बदला नहीं। सभी को जैसे थे उसे अच्छा बनाया। आर्य मनुष्य नहीं संस्कृति है। उसको ग्रहण कर हम वास्तव में मनुष्य बनते हैं।
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जिले के गांव खांडा खेड़ी में मित्र स्तंभ का उद्घाटन करने पहुंचे डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि उपनिषदों में हमारे पूर्वजों ने कहा है कि बाहर की दुनिया को जानो, विज्ञान को जानो। उसका उपयोग अपने जीवन को सार्थक व सुखी ब बनाने के लिए करो। अध्यात्म को जानो। सत्य को जानो, उसको जानकर मृत्यु पर विजय प्राप्त करो। पश्चिम में जाओगे तो आपको खूब धन कमाने वाले लोगों की कहानियां मिलेगी। राजाओं, धर्म की कहानी मिलेंगी। अपने पिता का वचन निभाने के लिए जिस ने 14 साल वन में काट दिए।
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ऐसे श्री राम की कहानी 8 हजार साल बाद भी याद है। देश की स्वतंत्रता के लिए अपने पूरे जीवन की कमाई राणा प्रताप को देने वाले की कहानी है। हमारे यहां कमाने वाला बड़ा नहीं बांटने वाला बड़ा है। ज्ञान मिला है तो बांटो, धन मिला है उसे बांटो। पहलवान हो तो लोगों को बलवान बनाओ। जीवन का यश महत्वपूर्ण नहीं है। जीवन की सार्थकत्व महत्वपूर्ण है। आप जीते हैं दस लोगों को जिलाते हैं तो आपका जीवन सार्थक हो गया। यह जीवन का तरीका है। आज पर्यावरण की हानि हो रही है। पता है किन चीजाें से हो रही है लेकिन उनकाे छोड़ नहीं सकते। परिवार टूट रहे है, अपराध बढ़ रहे हैं। छोटे बच्चे हथियार लेकर दूसरे लोगों को भून देते हैं। सारा जीवन अस्त व्यस्त हो गया

इस कलयुग में भारत का जीवन सबसे अच्छा है। हमारे यहां का व्यक्ति आज भी बच्चों को कहता है बड़ों के पैर छुओ। हमारे यहां संस्कार, संस्कृति, अपनत्व का संबंध कायम है। इस कारण हम विपत्ति में निराश नहीं होते। कुछ साल पहले सितंबर में अमेरिका में गया था। वहां लोग इतने साल बाद भी लोग सितंबर महीने में बाहर नहीं निकलते। हमारे यहां मुंबई में ब्लास्ट हुआ अगले ही दिन उतनी ही भीड़ थी। भुज में इतना बड़ा भूकंप आया हम उबर गए। नासिक में बाढ़ आई तो सब कुछ बह उससे भी हम लोग उबर गए। ऐसी विपदा में कमर तो टूट जाती है लेकिन हिम्मत नहीं टूटती। हमारी संस्कृति जीवन का पुरुषार्थ सिखाती है।

शेर व बकरी की कहानी सुनाई....

डॉ. मोहन भागवत ने बकरी और शेर की कहानी सुनाते हुए कहा कि अपने परिचय का बहुत महत्व होता है। शेर को खुद का परिचय न हो तो वह भी बकरियों के साथ रहकर बकरी जैसा व्यवहार करने लगता है। उसे खुद का परिचय हो जाए तो वह शेर है। हमें अपने पराक्रम की जानकारी होनी चाहिए। अगर हम मानते हैं कि पराक्रमी पूर्वजों के वंशज है तो हम भी पराक्रमी बनेंगे। अगर मानेंगे कि हम मार खाते रहे हैं तो हम भी मार खाते रहेंगे।

मुगलों के खिलाफ स्वामी दयानंद ने लिखा पूरा अध्याय...

योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि राष्ट्र धर्म, राष्ट्र हित सर्वोपरि है। इस विचार को संकल्प लेकर हमें आगे बढ़ना होगा। वीरता का शा स्वामी दयानंद के सपनों को पूरा करने के लिए काम करना होगा। मुगलों के खिलाफ पूरा अध्याय लिखने का साहस महर्षि दयानंद ने लिया। किसी में हिम्मत नहीं थी कि वह मुगलों के खिलाफ लाइन भी लिख दें। आज के समय में संयुक्त परिवार खत्म हो रहे हैं। खून के रिश्ते खून खून हो रहे हैं। वेद हमारे आचरण का आधार हैं। वेद के अनुसार चलाना हमारा धर्म है।

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