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चंदगीराम अखाड़े में 40 पहलवान सुविधाओं के अभाव में कर रहे अभ्यास

Thu, 11 Aug 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार Updated Thu, 11 Aug 2016 12:38 AM IST
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Akhada of Chandgi Ram, players without fascility, Hisar
चंदगीराम अखाड़ा - फोटो : bureau

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान देने वाला गांव सिसाय स्थित चंदगीराम अखाड़ा इन दिनों सुविधाओं के लिए तरस रहा है। अखाड़े में मौजूूदा समय में करीब 40 पहलवान हैं, जिनमें से 15 पहलवान ऐसे हैं, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ढेरों पदक जीत चुके हैं।

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देश का नाम रोशन करने वाले ये खिलाड़ी छोटी-छोटी चीजों के लिए परेशान हो रहे हैं। आलम यह है कि अखाड़े में अभ्यास करने के लिए न तो इन पहलवानों को पर्याप्त जगह मिल पा रही है और ना ही कसरत करने के लिए पर्याप्त उपकरण। सरकार की ओर से भी इनको कोई आर्थिक सहायता नहीं दी जा रही है। गौरतलब है कि अखाड़ा करीब वर्षों से चल रहा है।
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चंदगीराम अखाड़े में पहलवानों को कुश्ती का अभ्यास करवाने वाले कोच विकास ने बताया कि अखाड़े में बरसात के समय पानी भर जाता है, जिसके कारण मैट भी गीला हो जाता है। इसे सूखने में भी काफी दिन लग जाते हैं।
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इस कारण खिलाड़ियों को कुश्ती का अभ्यास करने में भी मुश्किल होती है। वहीं खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए बनाया गया कमरा छोटा होने की वजह से खिलाड़ियों को पूरी जगह नहीं मिल पा रही है। इसके साथ कसरत के लिए उपकरणों का भी अभाव है।


अंतरराष्ट्रीय पहलवान करते हैं अभ्यास

अखाड़े में अंतरराष्ट्रीय स्तर के काफी पहलवान अभ्यास करते हैं। पहलवान नवीन कुमार जो 50 किलोग्राम भार वर्ग में 5 बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है।

नवीन ने हाल ही में तुर्की में हुई प्रतियोगिता में वर्ल्ड स्कूल गेम में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया था। वहीं विशाल दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ओर से खेल चुका है। विशाल ने भी तुर्की में हुई वर्ल्ड स्कूल गेम प्रतियोगिता में 69 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल किया था। इनके अलावा विजय, हरिनेश, दीपक, राहुल, विश्वास, पवन, विष्णु आदि पहलवान हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल से लेकर कांस्य पदक हासिल कर चुके हैं।


चंदगीराम के नाम पर खोला था अखाड़ा
 सिसाय गांव के ही हिंद केसरी का खिताब जीत चुके चंदगीराम के नाम पर अखाड़ा खोला गया था। राज्य स्तर पर कुश्ती में कई पदक जीत चुके सुभाष पहलवान ने इसे खोला था। गौरतलब है कि चंदगीराम के बेटे जगदीश और बेटी सोनिका ने भी पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए हिंद केसरी का खिताब जीता था।

रजिस्टर्ड अखाड़ा होने पर भी हो रही असुविधाओं के बारे में गौर किया जाएगा। खिलाड़ियों को आ रही असुविधाओं को जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
- सूबे सिंह बैनीवाल, जिला शिक्षा अधिकारी, हिसार
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