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Rakhi Garhi: डेढ़ साल बाद 32 करोड़ से बन रहे संग्रहालय में चित्रों से हडप्पा संस्कृति का इतिहास को जान सकेंगे

Sun, 11 Sep 2022 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौंद, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौंद, हिसार (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 11 Sep 2022 02:13 AM IST
सार

ऐतिहासिक नगरी राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। म्यूजियम में 5 हजार पुरानी हड़प्पा की कलाकृतियों को सहेज कर रखा जाएगा। पुनर्वास कार्यों के लिए 8 करोड़ 50 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं। 

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museum being built with 32 crores will be able to know the history of Harappan culture
संग्राहलय का निरीक्षण करते सीएम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सिंधू घाटी सभ्यता का ऐतिहासिक नगर राखीगढ़ी को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलने जा रही है। राखीगढ़ी में इंटरनेशनल म्यूजियम का काम करीब डेढ़ साल में पूरा होगा। यहां 32 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक संग्रहालय बना रही है। इसमें रेस्ट हाउस, हॉस्टल और एक कैफे का निर्माण किया जा रहा है। पुनर्वास कार्यों के लिए 8 करोड़ 50 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं। लगभग 5 हजार पुरानी हड़प्पा की कलाकृतियों को सहेज कर रखा जाएगा।

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राखीगढ़ी में बनाया जा रहा म्यूजियम कई मायनों में होगा खास
इस म्यूजियम में फोटोग्राफ्स लैब तैयार की गई है, जिनमें चित्रों के माध्यम से आगंतुक राखीगढ़ी के इतिहास को जान सकेंगे। म्यूजियम में किड्ज जोन भी बनाया गया है। ताकि बच्चे भी खेल-खेल में अपने इतिहास से अवगत हो सकें। ओपन एयर थिएटर, गैलरी, पुस्तकालय का निर्माण भी करवाया गया है। जिससे आगंतुक, विशेष तौर पर युवा पीढ़ी को इतिहास की जानकारी मिलेगी। बता दें केंद्र सरकार की ओर से देश में पर्यटन स्थलों व पांच ऐतिहासिक स्थल बनाने के लिए 2500 करोड़ रुपये की घोषणा की थी। उनमें राखीगढ़ी भी शामिल है।
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यह भी पढ़ें : Hisar: मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया राखीगढ़ी का दौरा, ग्रामीणों को होम स्टे नीति के तहत दिए जाएंगे लाइसेंस
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राखीगढ़ी के पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित होने से एक ओर जहां पर्यटन बढ़ेगा वहीं हरियाणा के राजस्व में भी वृद्धि होगी और यहां पर्यटकों के आने से गांव के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। राखीगढ़ी के निवासी अशोक चेयरमैन ने कहा कि इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने से इस इलाके का तेजी से विकास होगा। सुखबीर मलिक ने कहा कि राखी गढ़ी का नाम इंटरनेशनल लेवल पर आएगा। विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे। वीरेंद्र सिंधु ने कहा कि राखीगढ़ी में म्यूजियम बनने से प्रदेश व देश के लोगों, विशेष रूप से युवा पीढ़ी को यहां के इतिहास के बारे में जानकारी मिलेगी। वे जान सकेंगे हरियाणा का इतिहास वर्षों पुराना है।

राखीगढ़ी का इतिहास
राखीगढ़ी हरियाणा के हिसार जिले के नारनौंद उपमंडल में स्थित है। यहां राखी खास और राखी शाहपुर गांवों के अलावा आसपास के खेतों में पुरातात्विक साक्ष्य फैले हुए हैं। राखीगढ़ी में सात टीले (आरजीआर-1 से लेकर आरजीआर-7) हैं, जो हड़प्पा सभ्यता की सबसे बड़ी बस्ती है।


भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इस गांव में पहली बार 1963 में खुदाई शुरू की थी। इसके बाद 1998-2001 के बीच डॉ. अमरेंद्र नाथ के नेतृत्व में एएसआई ने फिर खुदाई शुरू की। बाद में पुणे के डेक्कन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वसंत शिंदे के नेतृत्व में 2013 से 2016 व 2022 में राखीगढ़ी में उत्खनन कार्य हुआ है।

राखीगढ़ी में 1998 से लेकर अब तक 56 कंकाल मिले हैं, जिनका डीएनए परीक्षण चल रहा है। प्रो. वसंत शिंदे के अनुसार राखीगढ़ी में पाई गई सभ्यता करीब 5000-5500 ई.पू. की है, जबकि मोहनजोदड़ो में पाई गई सभ्यता का समय लगभग 4000 ई. पू. माना जाता है। मोहनजोदड़ो का क्षेत्र करीब 300 हेक्टेयर है, जबकि राखीगढ़ी 550 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फैला है। अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, गुजरात और राजस्थान से इसका व्यापारिक संबंध था। पत्थरों या धातुओं से जेवर बनाने के लिए इस्तेमाल होता था।

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