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कॉलोनियों को नियमित करने के लिए कॉलोनाइजर ने नहीं किया आवेदन तो कार्रवाई तय
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कॉलोनाइजर के साथ बैठक करते डीटीपी मोहन सिंह। साथ में एटीपी पुष्कर दत्त।
- फोटो : Hisar
हिसार। प्रदेश सरकार की तरफ से शहरी सीमा के बाहर बसी अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के बारे में अधिसूचना जारी करने के बाद शुक्रवार को जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) ने कॉलोनाइजर के साथ बैठक की। इस दौरान कॉलोनाइजर को स्पष्ट तौर पर कहा गया कि अगर वह कॉलोनियों को नियमित होने के लिए आवेदन नहीं करते हैं तो उनकी कॉलोनियों पर कार्रवाई तय है। बैठक में कॉलोनाइजर से प्रदेश सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना के बारे में भी अवगत करवाया गया। अधिसूचना को लेकर कॉलोनाइजर ने भी प्रश्न पूछे, जिनका जवाब अधिकारियों ने दिया।
पिछले दिनों डीटीपी की तरफ से अवैध कॉलोनियों को लेकर ड्रोन सर्वे करवाया गया था। इस दौरान शहरी सीमा से बाहर 350 से ज्यादा कॉलोनियां मिली थीं। विभाग ने इन कॉलोनियों के 177 कलस्टर बनाए थे। एक कलस्टर में एक से ज्यादा कॉलोनियां शामिल हैं। बता दें कि अभी हाल ही में प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत एक जुलाई 2022 से पहले नगर निगम, नगर परिषद या नगर पालिका की सीमा से बाहर बसी अवैध कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा। प्रदेश सरकार की तरफ से जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। वहीं कॉलोनाइजर को आवेदन करने के लिए 6 माह का समय दिया गया है। कॉलोनाइजर की तरफ से आवेदन करने के बाद कमेटी दस्तावेजों की जांच के बाद आयुक्त व उपायुक्त की सहमति से आवेदकों को डिमांड लेटर जारी किए जाएंगे।
आवेदन करने के बाद कॉलोनी पर नहीं चलेगा पीला पंजा
बैठक में अधिकारियों ने कॉलोनाइजर को बताया कि अगर वह आवेदन करते हैं तो उनकी कॉलोनी पर पीला पंजा नहीं चलेगा। हालांकि अवैध कॉलोनियों पर उनकी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। कार्रवाई करते समय अगर उक्त कॉलोनाइजर ने आवेदन नहीं किया गया तो उस पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
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शहरी एरिया में बसी कॉलोनियों को लेकर यूएलबी लेगा अंतिम फैसला
वहीं शहरी एरिया में बसी अवैध कॉलोनियों को नियमित करने को लेकर अंतिम फैसला शहरी स्थानीय निकाय ही लेगा। इस संबंध में डीटीपी की तरफ से इन कॉलोनियों के ले आउट प्लान बनाकर मुख्यालय भेज दिए गए थे। वहां से इन्हें शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) के मुख्यालय भेज दिया गया। मुख्यालय ने इन प्लान को जिला स्तर पर भेज दिया, जो इनका सत्यापन करने का काम करेंगी। अभी निकाय मंत्री ने मानसून सत्र में बताया कि तीन माह के अंदर निकायों को इनके सत्यापन का काम पूरा करना होगा। इसके बाद इन्हें वैध करने काम किया जाएगा। बता दें कि डीटीपी के सर्वे में शहरी एरिया में 198 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां मिली थीं।
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पिछले दिनों डीटीपी की तरफ से अवैध कॉलोनियों को लेकर ड्रोन सर्वे करवाया गया था। इस दौरान शहरी सीमा से बाहर 350 से ज्यादा कॉलोनियां मिली थीं। विभाग ने इन कॉलोनियों के 177 कलस्टर बनाए थे। एक कलस्टर में एक से ज्यादा कॉलोनियां शामिल हैं। बता दें कि अभी हाल ही में प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत एक जुलाई 2022 से पहले नगर निगम, नगर परिषद या नगर पालिका की सीमा से बाहर बसी अवैध कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा। प्रदेश सरकार की तरफ से जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। वहीं कॉलोनाइजर को आवेदन करने के लिए 6 माह का समय दिया गया है। कॉलोनाइजर की तरफ से आवेदन करने के बाद कमेटी दस्तावेजों की जांच के बाद आयुक्त व उपायुक्त की सहमति से आवेदकों को डिमांड लेटर जारी किए जाएंगे।
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आवेदन करने के बाद कॉलोनी पर नहीं चलेगा पीला पंजा
बैठक में अधिकारियों ने कॉलोनाइजर को बताया कि अगर वह आवेदन करते हैं तो उनकी कॉलोनी पर पीला पंजा नहीं चलेगा। हालांकि अवैध कॉलोनियों पर उनकी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। कार्रवाई करते समय अगर उक्त कॉलोनाइजर ने आवेदन नहीं किया गया तो उस पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
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शहरी एरिया में बसी कॉलोनियों को लेकर यूएलबी लेगा अंतिम फैसला
वहीं शहरी एरिया में बसी अवैध कॉलोनियों को नियमित करने को लेकर अंतिम फैसला शहरी स्थानीय निकाय ही लेगा। इस संबंध में डीटीपी की तरफ से इन कॉलोनियों के ले आउट प्लान बनाकर मुख्यालय भेज दिए गए थे। वहां से इन्हें शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) के मुख्यालय भेज दिया गया। मुख्यालय ने इन प्लान को जिला स्तर पर भेज दिया, जो इनका सत्यापन करने का काम करेंगी। अभी निकाय मंत्री ने मानसून सत्र में बताया कि तीन माह के अंदर निकायों को इनके सत्यापन का काम पूरा करना होगा। इसके बाद इन्हें वैध करने काम किया जाएगा। बता दें कि डीटीपी के सर्वे में शहरी एरिया में 198 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां मिली थीं।