फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   a seminar held in a agriculture university

जैव-विविधता का कम होना सभी के लिए चिंता का विषय: डॉ. ओपी चौधरी

Wed, 17 Jul 2019 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jul 2019 12:27 AM IST
विज्ञापन
a seminar held in a agriculture university
एचएयू में आयोजित सेमिनार में सीडी का विमोचन करते कुलपति डॉ. केपी सिंह व अन्य। - फोटो : Hisar
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के बेसिक साइंस कॉलेज के जीव विज्ञान व मत्स्य पालन विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार का मंगलवार को शुभारंभ हुआ। सेमिनार में जीव कल्याण विभाग के अध्यक्ष एवं पशु पालन व डेयरी विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. ओपी चौधरी मुख्य अतिथि थे। कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। सेमिनार का मुख्य विषय ‘जैव-विविधता: इसकी समस्याएं, चुनौतियां और अवसर’ है।
विज्ञापन

मुख्य अतिथि डॉ. ओपी चौधरी ने कहा कि जैव-विविधता का कम होना सभी के लिए चिंता का विषय है। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार अनुमान है कि चार महाद्वीपों पर ग्लोबल वार्मिंग के कारण 2050 तक 10 प्रतिशत प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी। जैव विविधता से प्रभावित कुछ स्वास्थ्य मुद्दों में आहार, स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा, संक्रामक रोग, चिकित्सा विज्ञान और औषधीय संसाधन, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य शामिल हैं। बढ़ती जनसंख्या के कारण, भूमि उपयोग में परिवर्तन, वनों की कटाई और प्रदूषण के कारण जैव-विविधता को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा उर्वरक और कीटनाशक के अत्याधिक प्रयोग से मिट्टी का वातावरण दूषित हो जाता है, जिससे मानव जीवन के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है। 2006 में कई प्रजातियों को औपचारिक रूप से दुर्लभ या लुप्तप्राय या खतरे में वर्गीकृत किया गया था। इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि लाखों और प्रजातियां खतरे में हैं, जिन्हें औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी गई है। आईयूसीएन रेड लिस्ट मानदंड का उपयोग करके मूल्यांकन की गई 40,177 प्रजातियों में से लगभग 40 प्रतिशत को अब विलुप्त होने के खतरे के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने सीडी व एल्यूमनाई बुक का विमोचन किया।
विज्ञापन

पुन: जीवित किया जा सकता है : कुलपति
कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि आजकल मानवजनित गतिविधियों, पर्यावरण प्रदूषण, संक्रमित खाद्य पदार्थों, पर्यावरण बदलाव, पानी की बढ़ती कमी व निरंतर रूप से वनों की कटाई जैव-विविधता के लिए खतरा बनती जा रही हैं। जैव विविधता को संरक्षण प्रदान करने से प्रलुप्त होती प्रजातियों को पुन: जीवित किया जा सकता है। जीव विज्ञान व मत्स्य पालन विभाग की अध्यक्षा डॉ. रचना गुलाटी ने बताया कि इस सेमिनार में जम्मु कश्मीर, मेघालय, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, बिहार आदि स्थानों से प्रतिभागी भाग लेने आए हैं। इस अवसर पर डॉ. एसके सहरावत, कुलसचिव डॉ. बीआर कंबोज, ओएसडी टू वीसी डॉ. एमके गर्ग, डीन, डायरेक्टर्स, फैकल्टी व विद्यार्थी उपस्थित थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed