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Hisar News: रूठा मानसून....बारिश के इंतजार में आसमां पर टकटकी
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गांव कैमरी के पास खेत में सूखने के कगार पर पहुंची मूंग की फसल
हिसार। आसमान में बादलों की आवाजाही, कभी गर्जन, तेज हवा तो कभी बूंदाबांदी...यह सब देखकर हर दिन लगता है आज अच्छी बारिश होगी। इस उम्मीद में लोग दिनभर आसमां पर टकटकी लगाए रहते हैं लेकिन शाम तक सारे पूर्वानुमान धरे रह जाते हैं। मानसून का आगाज फीका रहने से फसल बुवाई की रफ्तार भी घट गई है। जिले में करीब 91 हजार हेक्टेयर खेत खाली पड़े हैं। करीब 2.13 लाख 812 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है लेकिन वहां भी हालात संतोषजनक नहीं हैं। मूंग, कपास और धान की फसलें पर्याप्त पानी नहीं मिलने से सूखने लगी हैं।
जिले में जुलाई में सामान्य बारिश का आंकड़ा 140 मिमी है लेकिन इस मानसून में अब तक केवल 44.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। पिछले साल जुलाई के अंतिम दो दिनों में ही 103 मिमी बारिश हुई थी जबकि पूरे माह में 170 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई थी। पिछले वर्ष मानसून के दौरान जिले के कई हिस्सों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। हजारों एकड़ क्षेत्र लंबे समय तक जलमग्न रहा। इसके विपरीत इस वर्ष जून में प्री-मानसून की बारिश भी सामान्य से कम रही और जुलाई भी लगभग सूखा बीत रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में अब तक खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा 2.13 लाख 812 हेक्टेयर तक ही पहुंच पाया है। पिछले साल इसी अवधि तक यह आंकड़ा 3.08 लाख 51 हजार हेक्टेयर और 2024 में 3.05 लाख 18 हजार हेक्टेयर था। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में अब तक करीब 91 हजार हेक्टेयर कम क्षेत्र में बुवाई हुई है।
धान और बाजरा पर सबसे अधिक असर
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर धान और बाजरा पर पड़ा है। धान का रकबा वर्ष 2025 के 1.25 लाख 51 हजार हेक्टेयर से घटकर 60.755 हजार हेक्टेयर रह गया है। बाजरा का रकबा 30.72 हजार हेक्टेयर से घटकर 17.209 हजार हेक्टेयर हो गया है। इसी तरह ग्वार की बुवाई 24.65 हजार हेक्टेयर के मुकाबले 17.985 हजार हेक्टेयर रह गई है जबकि कपास का क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले 84.96 हजार हेक्टेयर से घटकर 80.94 हजार हेक्टेयर दर्ज किया गया है।
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जिले में इस साल बारिश का ब्यौरा (मिमी में)
क्षेत्र
जून
जुलाई
हिसार
14
37.8
हांसी
02
94
आदमपुर
05
25
बरवाला 45
98
नारनौंद 06
68
बास
00
65
उकलाना 14
70
बालसमंद
00
12
खेड़ी जालब 00
44
खरीफ फसलों की बुवाई (हजार हेक्टेयर में)
फसल
2024
2025
2026
धान
109.50
125.51
60.755
बाजरा
33.33
30.72
17.209
कपास
100.63
84.96
80.94
मूंग
23.03
26.64
22.858
ग्वार
24.05
24.65
17.985
ज्वार 17.97 12.71 14.065
कुल 308.510 305.190 213.812
कम बारिश से फसलों पर बढ़ा कीटों का प्रकोप
कम बारिश के कारण हिसार, आदमपुर और बालसमंद क्षेत्र में फसलें सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। नमी की कमी से कई फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। कृषि विभाग की टीम ने 9 जुलाई को आदमपुर के गांव खारा बरवाला क्षेत्र में कपास की फसल पर लीफ हॉपर (जैसिड्स) का प्रकोप पाया। वहीं 11 जुलाई को उकलाना के साहू गांव में धान की फसल में येलो स्टेम बोरर की मौजूदगी दिखी।
इस बार मानसून में कम बारिश के कारण बुवाई भी देरी से हो रही है। उम्मीद है अगस्त के पहले सप्ताह तक लक्ष्य के अनुरूप रकबा पूरा हो जाएगा। पिछले साल की तुलना में कपास का क्षेत्र थोड़ा कम हुआ है, जबकि बाजरा और धान का रकबा बढ़ने की संभावना है। फिलहाल कम बारिश से फसलों को कोई बड़ा नुकसान नहीं है लेकिन यह दौर जारी रहा तो चिंता का विषय होगा। - डॉ. राजबीर सिंह, उप निदेशक, कृषि विभाग, हिसार
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जिले में जुलाई में सामान्य बारिश का आंकड़ा 140 मिमी है लेकिन इस मानसून में अब तक केवल 44.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। पिछले साल जुलाई के अंतिम दो दिनों में ही 103 मिमी बारिश हुई थी जबकि पूरे माह में 170 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई थी। पिछले वर्ष मानसून के दौरान जिले के कई हिस्सों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। हजारों एकड़ क्षेत्र लंबे समय तक जलमग्न रहा। इसके विपरीत इस वर्ष जून में प्री-मानसून की बारिश भी सामान्य से कम रही और जुलाई भी लगभग सूखा बीत रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में अब तक खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा 2.13 लाख 812 हेक्टेयर तक ही पहुंच पाया है। पिछले साल इसी अवधि तक यह आंकड़ा 3.08 लाख 51 हजार हेक्टेयर और 2024 में 3.05 लाख 18 हजार हेक्टेयर था। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में अब तक करीब 91 हजार हेक्टेयर कम क्षेत्र में बुवाई हुई है।
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धान और बाजरा पर सबसे अधिक असर
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर धान और बाजरा पर पड़ा है। धान का रकबा वर्ष 2025 के 1.25 लाख 51 हजार हेक्टेयर से घटकर 60.755 हजार हेक्टेयर रह गया है। बाजरा का रकबा 30.72 हजार हेक्टेयर से घटकर 17.209 हजार हेक्टेयर हो गया है। इसी तरह ग्वार की बुवाई 24.65 हजार हेक्टेयर के मुकाबले 17.985 हजार हेक्टेयर रह गई है जबकि कपास का क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले 84.96 हजार हेक्टेयर से घटकर 80.94 हजार हेक्टेयर दर्ज किया गया है।
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जिले में इस साल बारिश का ब्यौरा (मिमी में)
क्षेत्र
जून
जुलाई
हिसार
14
37.8
हांसी
02
94
आदमपुर
05
25
बरवाला 45
98
नारनौंद 06
68
बास
00
65
उकलाना 14
70
बालसमंद
00
12
खेड़ी जालब 00
44
खरीफ फसलों की बुवाई (हजार हेक्टेयर में)
फसल
2024
2025
2026
धान
109.50
125.51
60.755
बाजरा
33.33
30.72
17.209
कपास
100.63
84.96
80.94
मूंग
23.03
26.64
22.858
ग्वार
24.05
24.65
17.985
ज्वार 17.97 12.71 14.065
कुल 308.510 305.190 213.812
कम बारिश से फसलों पर बढ़ा कीटों का प्रकोप
कम बारिश के कारण हिसार, आदमपुर और बालसमंद क्षेत्र में फसलें सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। नमी की कमी से कई फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। कृषि विभाग की टीम ने 9 जुलाई को आदमपुर के गांव खारा बरवाला क्षेत्र में कपास की फसल पर लीफ हॉपर (जैसिड्स) का प्रकोप पाया। वहीं 11 जुलाई को उकलाना के साहू गांव में धान की फसल में येलो स्टेम बोरर की मौजूदगी दिखी।
इस बार मानसून में कम बारिश के कारण बुवाई भी देरी से हो रही है। उम्मीद है अगस्त के पहले सप्ताह तक लक्ष्य के अनुरूप रकबा पूरा हो जाएगा। पिछले साल की तुलना में कपास का क्षेत्र थोड़ा कम हुआ है, जबकि बाजरा और धान का रकबा बढ़ने की संभावना है। फिलहाल कम बारिश से फसलों को कोई बड़ा नुकसान नहीं है लेकिन यह दौर जारी रहा तो चिंता का विषय होगा। - डॉ. राजबीर सिंह, उप निदेशक, कृषि विभाग, हिसार