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Hisar News: बदहाल बस अड्डा... न ठौर मुसाफिरों का, न ठिकाना सुविधाओं का
Sat, 02 Aug 2025 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sat, 02 Aug 2025 12:51 AM IST
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बदहाली का शिकार बना कस्बे का बस स्टैंड।
बहल। कस्बे का बस अड्डा इन दिनों बदहाली के ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां मुसाफिरों के लिए न ठहरने की जगह है और न हीं सुविधाओं का कोई नामोनिशान। पूरा परिसर गंदे पानी की झील में तब्दील हो चुका है जहां न बसें रुक पाती हैं और न हीं यात्री खड़े रहकर उनकी प्रतीक्षा कर सकते हैं। हालत यह हो गए है कि बस अड्डा अब महज बेहसहारा पशुओं की शरणस्थली बनकर रह गया है और अधिकतर बसें बाहर सड़क पर ही सवारियां भरने को मजबूर हैं।
यह बस अड्डा इनेलो शासन काल में बना था जिसका उद्घाटन तत्कालीन सांसद अजय चौटाला और शिक्षा मंत्री बहादुर सिंह ने किया था। तब इसे एक सुविधायुक्त परिसर के तौर पर विकसित करने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन सरकार बदलने के बाद यह अड्डा उपेक्षा की भेंट चढ़ गया। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन से इसकी हालत सुधारने की गुहार लगाई मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। नतीजा यह कि यात्रियों के बैठने के लिए बना हॉल जर्जर हो चुका है और चारों ओर जलभराव बना रहता है। चहारदीवारी टूट चुकी है जिससे बेसहारा पशुओं का जमावड़ा रोजमर्रा की तस्वीर बन गया है।
साफ-सफाई की कमी, शौचालय भी बेकार
बस अड्डे की दयनीय स्थिति के चलते अधिकांश बसें परिसर के बाहर ही रुकती हैं और यात्री वहीं से चढ़ते-उतरते हैं। सवारियों के लिए बनाए गए शौचालयों की हालत भी बेहद खराब है। नियमित सफाई न होने से उनका उपयोग असंभव हो गया है यहां तक कि उनके पास से गुजरना भी मुश्किल हो रहा है। समाजसेवी राजेश अग्रवाल, हिम्मत जावला सहित अन्य नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक नया बस अड्डा नहीं बनता तब तक मौजूदा अड्डे की स्थिति में सुधार लाया जाए।
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डेढ़ साल पहले रखी थी नई नींव, अब तक नहीं लगी एक भी ईंट
पूर्व मंत्री जेपी दलाल की मांग पर 24 दिसंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बहल के नए बस अड्डे की वर्चुअल आधारशिला रखी थी। तब लोगों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा और क्षेत्र को एक आधुनिक बस अड्डा मिलेगा लेकिन डेढ़ साल बीतने को है, न तो कोई निर्माण शुरू हुआ और न हीं कोई ठोस पहल दिखी। फाइलें अब भी दफ्तरों में घूम रही हैं और जमीन पर एक ईंट तक नहीं लगी। परिवहन विभाग की इस लापरवाही ने लोगों की उम्मीदों को गहराई से झकझोर दिया है।
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यह बस अड्डा इनेलो शासन काल में बना था जिसका उद्घाटन तत्कालीन सांसद अजय चौटाला और शिक्षा मंत्री बहादुर सिंह ने किया था। तब इसे एक सुविधायुक्त परिसर के तौर पर विकसित करने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन सरकार बदलने के बाद यह अड्डा उपेक्षा की भेंट चढ़ गया। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन से इसकी हालत सुधारने की गुहार लगाई मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। नतीजा यह कि यात्रियों के बैठने के लिए बना हॉल जर्जर हो चुका है और चारों ओर जलभराव बना रहता है। चहारदीवारी टूट चुकी है जिससे बेसहारा पशुओं का जमावड़ा रोजमर्रा की तस्वीर बन गया है।
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साफ-सफाई की कमी, शौचालय भी बेकार
बस अड्डे की दयनीय स्थिति के चलते अधिकांश बसें परिसर के बाहर ही रुकती हैं और यात्री वहीं से चढ़ते-उतरते हैं। सवारियों के लिए बनाए गए शौचालयों की हालत भी बेहद खराब है। नियमित सफाई न होने से उनका उपयोग असंभव हो गया है यहां तक कि उनके पास से गुजरना भी मुश्किल हो रहा है। समाजसेवी राजेश अग्रवाल, हिम्मत जावला सहित अन्य नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक नया बस अड्डा नहीं बनता तब तक मौजूदा अड्डे की स्थिति में सुधार लाया जाए।
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डेढ़ साल पहले रखी थी नई नींव, अब तक नहीं लगी एक भी ईंट
पूर्व मंत्री जेपी दलाल की मांग पर 24 दिसंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बहल के नए बस अड्डे की वर्चुअल आधारशिला रखी थी। तब लोगों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा और क्षेत्र को एक आधुनिक बस अड्डा मिलेगा लेकिन डेढ़ साल बीतने को है, न तो कोई निर्माण शुरू हुआ और न हीं कोई ठोस पहल दिखी। फाइलें अब भी दफ्तरों में घूम रही हैं और जमीन पर एक ईंट तक नहीं लगी। परिवहन विभाग की इस लापरवाही ने लोगों की उम्मीदों को गहराई से झकझोर दिया है।