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पुरानी ईंटों से बना डाला माइनर
Hisar
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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डबवाली (सिरसा)। गांव शेरगढ़ के किसानों ने नहरी विभाग के एक कनिष्ठ अभियंता पर ठेकेदार से मिलीभगत करके माइनर नंबर छह के निर्माण में घटिया सामग्री प्रयोग करने तथा लेबल नीचे गिराए जाने का आरोप लगाया है। किसानों की शिकायत पर विभाग के कार्यकारी अभियंता ने मामले की जांच करवाने के आदेश दिए है।
नहरी विभाग की ब्रांच रोड़ी के कार्यकारी अभियंता बीके जग्गा ने स्वीकार किया कि गांव शेरगढ़ के किसानों की शिकायत उन्हें मिली है। जिसमें उन्होंने विभाग के जेई तथा माइनर का निर्माण करने वाले ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महकमे के एसडीई को मामले की जांच करने के आदेश दिए गए हैं। फिलहाल माइनर में पानी चल रहा है। रविवार को बंदी होने के बाद एसडीई मौका का निरीक्षण करके अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बाक्स
55 लाख रुपये से हुआ है माइनर का निर्माण
करीब 55 लाख रुपये की लागत से माइनर नंबर छह का निर्माण कार्य पूरा हुआ है। निर्माण के बाद पहली बार माइनर में पानी छोड़ा गया लेकिन सैकड़ों एकड़ भूमि सिंचाई से वंचित रह गई। गांव शेरगढ़ के किसान गुरमीत सिंह, प्रकाश सिंह, बलराज सिंह, गुरजंट सिंह, बलतेज सिंह, बलजीत सिंह ने नहरी विभाग शाखा रोड़ी के कार्यकारी अभियंता बीके जग्गा को भेजी अपनी शिकायत में कहा है कि शेरगढ़ गांव में माइनर नंबर छह का पुनर्निर्माण किया गया था ताकि लोगों को सिंचाई सुविधा सुचारू रूप से मिल सकें लेकिन ठेकेदार तथा विभाग के एक कनिष्ठ अभियंता ने टेल तक लेबल को नीचा गिरा दिया है। पानी न लगने के कारण उनकी करीब दो हजार एकड़ भूमि प्रभावित हुई है।
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पुरानी ईंटों का किया गया है प्रयोग
किसानों ने आरोप लगाया है कि माइनर का निर्माण करते समय 31 बुर्जी से लेकर टेल तक जो ईंटे लगाई गई है, वे पुरानी हैं। निर्माण सामग्री भी सही तरीके से नहीं लगाई गई है। जिससे माइनर को कभी भी नुक्सान पहुंच सकता है। किसानों ने शिकायत में मामले की जांच करवाकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
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नहरी विभाग की ब्रांच रोड़ी के कार्यकारी अभियंता बीके जग्गा ने स्वीकार किया कि गांव शेरगढ़ के किसानों की शिकायत उन्हें मिली है। जिसमें उन्होंने विभाग के जेई तथा माइनर का निर्माण करने वाले ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महकमे के एसडीई को मामले की जांच करने के आदेश दिए गए हैं। फिलहाल माइनर में पानी चल रहा है। रविवार को बंदी होने के बाद एसडीई मौका का निरीक्षण करके अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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55 लाख रुपये से हुआ है माइनर का निर्माण
करीब 55 लाख रुपये की लागत से माइनर नंबर छह का निर्माण कार्य पूरा हुआ है। निर्माण के बाद पहली बार माइनर में पानी छोड़ा गया लेकिन सैकड़ों एकड़ भूमि सिंचाई से वंचित रह गई। गांव शेरगढ़ के किसान गुरमीत सिंह, प्रकाश सिंह, बलराज सिंह, गुरजंट सिंह, बलतेज सिंह, बलजीत सिंह ने नहरी विभाग शाखा रोड़ी के कार्यकारी अभियंता बीके जग्गा को भेजी अपनी शिकायत में कहा है कि शेरगढ़ गांव में माइनर नंबर छह का पुनर्निर्माण किया गया था ताकि लोगों को सिंचाई सुविधा सुचारू रूप से मिल सकें लेकिन ठेकेदार तथा विभाग के एक कनिष्ठ अभियंता ने टेल तक लेबल को नीचा गिरा दिया है। पानी न लगने के कारण उनकी करीब दो हजार एकड़ भूमि प्रभावित हुई है।
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पुरानी ईंटों का किया गया है प्रयोग
किसानों ने आरोप लगाया है कि माइनर का निर्माण करते समय 31 बुर्जी से लेकर टेल तक जो ईंटे लगाई गई है, वे पुरानी हैं। निर्माण सामग्री भी सही तरीके से नहीं लगाई गई है। जिससे माइनर को कभी भी नुक्सान पहुंच सकता है। किसानों ने शिकायत में मामले की जांच करवाकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।