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एक मोहर के सहारे चल रही सरपंची
Hisar
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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बाढड़ा (भिवानी)। डालावास गांव के नवनिर्वाचित्त सरपंच मंदीप श्योराण बीते ढाई साल से गांव के सरपंच तो हैं लेकिन वे इस पद से जुड़ा कोई काम नहीं कर सकते। कारण, उनके पास ग्राम पंचायत से संबंधित रिकार्ड ही नहीं है। गांव की पूर्व महिला सरपंच ने नया सरपंच चुने जाने के ढाई साल बाद भी चार्ज और ग्राम पंचायत से संबधित रिकार्ड उन्हें नहीं सौंपा है। इस मामले का खुलासा उस समय हुआ जब गांव के एक व्यक्ति ने आरटीआई के तहत गांव में विकास कार्य न होने के बारे में जानकारी मांगी। बीडीपीओ कार्यालय से राज्य सूचना अधिकार कार्यालय इस बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके। वहीं निर्वाचित सरपंच एक मोहर के सहारे ही खुद को सरपंच बता रहे हैं और वे गांव में कोई विकास कार्य नहीं करवा सकते।
प्रदेश सरकार द्वारा 6 जून 2010 को प्रदेश भर में पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव करवाए गए थे। इसमें खंड के गांव डालावास से मंदीप श्योराण को सरपंच पद के लिए चुना गया। सरपंच निर्वाचित्त होते ही उसने निवर्तमान महिला सरपंच सुमन देवी से रिकार्ड व चार्ज मांगा तो उन्होंने जल्द ही सारा जिम्मा सौंपने का आश्वासन दिया। महिला सरपंच का वह आश्वासन आज तक कोरा आश्वासन ही बना हुआ है। इस दौरान ग्राम पंचायत के खाते में लाखों रुपयों की राशि जमा होने के बाद भी विकास के नाम पर एक ईंट तक नहीं लग सकी है। डालावास गांव के आधा दर्जन पंचों ने जिला उपायुक्त को सारे मामले की जांच कर गांव में ठप पड़े विकास कार्य शुरूकरवाने की मांग की तो इस मामले की ओर प्रशासन का ध्यान गया। आनन फानन में जांच कर मामला सुलझाने की कोशिशें तेज हुईं। निर्वाचित्त सरपंच मंदीप ने बताया कि उन्होंने अपना पक्ष विभाग के सामने रख दिया है।
डालावास निवासी आनंद सिंह पुत्र दलबीर सिंह ने जनवरी 2011 में विकास एवं पंचायत पंचायत विभाग से आरटीआई के तहत वर्ष 2005 से वर्ष 2011 तक की समयावधि में हुए विकास कार्यो का ब्यौरा मांगा तो उन्हें यह जानकारी गांव के सरपंच से लेने के आदेश दिए गए। आनंद सिंह ने जब सरपंच को पत्र लिखा तो उससे जो जानकारी मिली, वह चौंकाने वाली थी। नए सरपंच ने उन्हें विकास संबंधी जानकारी देने के बजाए पत्र लिखकर बताया कि उन्हें अभी तक चार्ज ही नहीं मिला है। आनंद ने बताया कि उन्होंने जिला उपायुक्त से पूर्व सरपंच सुमन देवी पर गांव के विकास कार्यों में धांधली और रिकार्ड देने में लापरवाही की शिकायत की थी। इस पर कुछ कार्रवाई तो हुई लेकिन बाद में फिर सारे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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एसडीएम के सर्च वारंट पर भी नहीं मिला चार्ज
चरखी दादरी के एसडीएम डा. जेके आभीर ने डालावास में पूर्व महिला सरपंच द्वारा निर्वाचित्त सरपंच को प्रभार न सौंपे जाने पर 11 अप्रैल 1210 को बीडीपीओ बाढड़ा के पत्र पर गौर करते हुए हरियाणा पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 18, 4, में मिली शक्तियों से पुलिस स्टेशन बाढड़ा को सर्च वारंट जारी करने का आदेश दिया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि चार्ज देने में मनमानी कर रही पूर्व महिला सरपंच सुमन देवी पत्नि सुरेश कुमार को तुरंत खोज कर उससे सारे रिकार्ड को कब्जे में लेकर ग्राम सचिव के हवाले किया जाए और इस मामले में हुई प्रगति पर 30 अप्रैल को उपमंडलाधीश कार्याल को अवगत करवाया जाए। एसडीएम के आदेश भी सात माह गुजरने के बाद भी कोई प्रभाव नहीं डाल सके।
सुमन देवी को 22 को अंतिम मौका : श्योराण
बीडीपीओ (बाढड़ा) भूपसिंह श्योराण ने कहा कि उन्हें तीन दिन पहले ही सारी जानकारी मिली है और 16 नवंबर को उन्होंने डालावास की पूर्व सरपंच सुमन देवी को ग्राम पंचायत का समस्त रिकार्ड 22 नवंबर तक खंड कार्यालय में जमा करवाने का अंतिम नोटिस भेजा है। उन्होंने कहा कि ढाई वर्ष बीतने के बाद भी चार्ज न मिलना बड़े ही अचंभे की बात है और इससे गांव का विकास पूरी तरह ठप्प है। अगर महिला सरपंच ने 22 नवंबर को भी रिकार्ड नहीं दिया तो उसके खिलाफ विभागीय व कानूनी मदद ली जाएगी।
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प्रदेश सरकार द्वारा 6 जून 2010 को प्रदेश भर में पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव करवाए गए थे। इसमें खंड के गांव डालावास से मंदीप श्योराण को सरपंच पद के लिए चुना गया। सरपंच निर्वाचित्त होते ही उसने निवर्तमान महिला सरपंच सुमन देवी से रिकार्ड व चार्ज मांगा तो उन्होंने जल्द ही सारा जिम्मा सौंपने का आश्वासन दिया। महिला सरपंच का वह आश्वासन आज तक कोरा आश्वासन ही बना हुआ है। इस दौरान ग्राम पंचायत के खाते में लाखों रुपयों की राशि जमा होने के बाद भी विकास के नाम पर एक ईंट तक नहीं लग सकी है। डालावास गांव के आधा दर्जन पंचों ने जिला उपायुक्त को सारे मामले की जांच कर गांव में ठप पड़े विकास कार्य शुरूकरवाने की मांग की तो इस मामले की ओर प्रशासन का ध्यान गया। आनन फानन में जांच कर मामला सुलझाने की कोशिशें तेज हुईं। निर्वाचित्त सरपंच मंदीप ने बताया कि उन्होंने अपना पक्ष विभाग के सामने रख दिया है।
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डालावास निवासी आनंद सिंह पुत्र दलबीर सिंह ने जनवरी 2011 में विकास एवं पंचायत पंचायत विभाग से आरटीआई के तहत वर्ष 2005 से वर्ष 2011 तक की समयावधि में हुए विकास कार्यो का ब्यौरा मांगा तो उन्हें यह जानकारी गांव के सरपंच से लेने के आदेश दिए गए। आनंद सिंह ने जब सरपंच को पत्र लिखा तो उससे जो जानकारी मिली, वह चौंकाने वाली थी। नए सरपंच ने उन्हें विकास संबंधी जानकारी देने के बजाए पत्र लिखकर बताया कि उन्हें अभी तक चार्ज ही नहीं मिला है। आनंद ने बताया कि उन्होंने जिला उपायुक्त से पूर्व सरपंच सुमन देवी पर गांव के विकास कार्यों में धांधली और रिकार्ड देने में लापरवाही की शिकायत की थी। इस पर कुछ कार्रवाई तो हुई लेकिन बाद में फिर सारे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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एसडीएम के सर्च वारंट पर भी नहीं मिला चार्ज
चरखी दादरी के एसडीएम डा. जेके आभीर ने डालावास में पूर्व महिला सरपंच द्वारा निर्वाचित्त सरपंच को प्रभार न सौंपे जाने पर 11 अप्रैल 1210 को बीडीपीओ बाढड़ा के पत्र पर गौर करते हुए हरियाणा पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 18, 4, में मिली शक्तियों से पुलिस स्टेशन बाढड़ा को सर्च वारंट जारी करने का आदेश दिया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि चार्ज देने में मनमानी कर रही पूर्व महिला सरपंच सुमन देवी पत्नि सुरेश कुमार को तुरंत खोज कर उससे सारे रिकार्ड को कब्जे में लेकर ग्राम सचिव के हवाले किया जाए और इस मामले में हुई प्रगति पर 30 अप्रैल को उपमंडलाधीश कार्याल को अवगत करवाया जाए। एसडीएम के आदेश भी सात माह गुजरने के बाद भी कोई प्रभाव नहीं डाल सके।
सुमन देवी को 22 को अंतिम मौका : श्योराण
बीडीपीओ (बाढड़ा) भूपसिंह श्योराण ने कहा कि उन्हें तीन दिन पहले ही सारी जानकारी मिली है और 16 नवंबर को उन्होंने डालावास की पूर्व सरपंच सुमन देवी को ग्राम पंचायत का समस्त रिकार्ड 22 नवंबर तक खंड कार्यालय में जमा करवाने का अंतिम नोटिस भेजा है। उन्होंने कहा कि ढाई वर्ष बीतने के बाद भी चार्ज न मिलना बड़े ही अचंभे की बात है और इससे गांव का विकास पूरी तरह ठप्प है। अगर महिला सरपंच ने 22 नवंबर को भी रिकार्ड नहीं दिया तो उसके खिलाफ विभागीय व कानूनी मदद ली जाएगी।