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96639 मतदाता चुनेंगे हांसी, बास, बरवाला की शहरी सरकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 12:38 AM IST
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96639 voters will choose the urban government of Hansi, Bas, Barwala
हिसार। जिले की एक नगर परिषद और दो नगर पालिकाओं के मतदाता 24 अप्रैल को अपनी शहरी सरकार चुनेंगे। हांसी नगर परिषद, बरवाला और बास नगर पालिका के चुनाव होंगे। पहली बार नगर पालिका बनी सिसाय और आदमपुर में अभी चुनाव नहीं होंगे। इसके लिए इंतजार करना होगा। बास में पहली बार चुनाव होने जा रहा है। तीनों शहरों के मतदाता पहली बार सीधे तौर पर अपने अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। बरवाला में 19 हजार, हांसी में 65 हजार, बास में 12639 मतदाता वोटिंग करेंगे। हालांकि मतदाताओं की सूची एक बार फिर से संशोधित होगी।
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हांसी : पेयजल, सफाई, सीवरेज व सड़कों का मुद्दा रहेगा खास
पहली बार हांसी नगर परिषद चेयरपर्सन का चुनाव शहर की जनता सीधे तौर पर चुनेगी। हांसी नगर परिषद चुनाव की तारीख का एलान हो चुका हैं। तीन माह पूर्व में नगर परिषद चेयरपर्सन सीट को लेकर ड्रॉ निकाला गया था। हांसी में चेयरपर्सन का पद कोई भी लड़ सकता है। अबकी बार चुनाव में विकास का मुद्दा मुख्य रहेगा। शहर की खस्ताहाल सड़कें, पेयजल, सफाई व सीवरेज व्यवस्था काफी अहम मुद्दा रहेगा।
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पहली दफा ऐसा होगा जब शहर की जनता सीधे तौर पर चेयरपर्सन चुनेगी। पार्षदों का ड्रॉ पहले ही निकाला चुका है । 22 मई 2016 को नगर परिषद के चुनाव हुए थे। 22 जून 2016 को पार्षदों, चेयरपर्सन व डिप्टी चेयरपर्सन ने शपथ ली थी। 22 जून 2021 को नगर परिषद भंग हो गई थी। उसके बाद एसडीएम डॉ. जितेंद्र अहलावत ने 23 जून को बतौर प्रशासक काम संभाला। हांसी नगर परिषद चेयरपर्सन की कुर्सी पर सैनी व पंजाबी समाज का दबदबा रहा है। पूर्व मंत्री अत्तर सिंह के कार्यकाल में रामकुमार सैनी नगर परिषद के चेयरमैन रहे। 2016 में निर्मला सैनी चेयरपर्सन बनीं। जिनका कार्यकाल 22 जून 2021को समाप्त हुआ। पूनम इलावादी 2005 में नगर परिषद की चेयरपर्सन बनीं। पिंकी गाबा 2007 से 2010 तक चेयरमैन की कुर्सी पर काबिज रहीं। वर्ष 2010 से लेकर 2015 तक रीता शर्मा नगर परिषद की चेयरमैन बनीं। हांसी नगर परिषद में लगातार दो बार कोई चेयरमैन नहीं बन सका है।
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9 वार्ड महिला आरक्षित
शहर में करीब 65 हजार वोटर हैं। वहीं शहर में कुल 27 वार्ड हैं। इनमें से आगामी चुनाव के लिए 9 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं। वार्ड 1 व 27 एससी वर्ग की महिला के लिए होगा। इसके अलावा 4, 10, 12, 16, 17, 21 व 22 वार्ड आरक्षित हैं। वहीं 19, 26 व 11 वार्ड एससी ओपन हैं, वहां पर एससी वर्ग का कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़ सकता हैं।
बास : चेयरपर्सन और 13 पार्षद बनाएंगे बास की अपनी सरकार
बास। नगरपालिका बनने से पहले चार गांव बास खुर्द, बास बादशाहपुर, बास आजमपुर व बास आजमशाहपुर में चार सरपंच चुने जाते थे। पहली बास नपा चेयरपर्सन और 13 नगर पालिका पार्षद चुने जाएंगे। इन चार गांवों में कुल 52 पंचायत मेंबर चुने जाते थे, लेकिन पालिका बनने के बाद यहां पर सिर्फ 13 वार्ड पार्षदों का चयन होगा। बास नगरपालिका के 12639 मतदाता सीधे चेयरमैन का चयन करेंगे। इसके अलावा वार्ड अनुसार पार्षदों का चुनाव होगा। सरकार ने 2018 में बास को नगरपालिका का दर्जा दिया था। उम्मीद जताई जा रही है कि नगरपालिका बनने के बाद बास में राजनीतिक प्रतियोगिता बढ़ेगी। मतदाता की संख्या व एरिया बढ़ जाने से चुनाव के इच्छुक लोगों को ज्यादा पसीना बहाना पड़ेगा। चेयरमैन का सीधा चुनाव होने के कारण वहीं इस दौड़ को जीत सकेगा जिसका पूरे एरिया में अच्छा रसूख हो।
बरवाला : अनारक्षित है चेयरमैन का पद
बरवाला। नपा चुनावों में पहली बार बरवाला नगर पालिका में चेयरमैन का चुनाव सीधे तौर पर होना है। शहर में कुल वार्ड 19 हैं। करीबन 31 हजार मतदाताओं द्वारा सीधे तौर पर शहर का चेयरमैन चुना जाना है। इससे पहले चुने गए पार्षद ही चेयरमैन का चुनाव करते आ रहे थे। नए नियमों के तहत होने वाले चुनाव में इस बार चेयरमैन का पद अनारक्षित है।

मौजूदा समय में शहर में दूषित पानी की निकासी की समस्या सबसे प्रमुख है। शहर में स्ट्रीट लाइट सुचारु न होने की समस्या व शहर के विकास का मुद्दा भी खास है। यही नहीं नपा कार्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति व खाली पड़े पद भी लोगों के लिए काफी दिक्कतें पैदा कर रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि इस बार के चुनाव के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति होने से उनके कार्य समय पर होंगे। क्षेत्रवासियों का मानना है कि बरवाला में चेयरमैन पद के चुनाव पहली बार ओपन हो रहे हैं। ऐसे में शहर की जनता भी चाहेगी के चेयरमैन पद के सभी दावेदारों में से ऐसा प्रत्याशी चुना जाए, जो शहर के इन ज्वलंत मुद्दों का समाधान करवाए। बरवाला नगर पालिका वर्ष 1983 में बनी थी।
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